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ओडिशा में जनगणना ड्यूटी पर लगे दो शिक्षकों की हीटस्ट्रोक से मौत, जानिए इस साल क्यों पड़ रही है इतनी भीषण गर्मी
भारत में लगातार बढ़ती गर्मी अब एक बड़ी चिंता बन चुकी है। देश के कई हिस्सों में तीव्र गर्मी और लू से लोगों को गंभीर परेशानी झेलनी पड़ रही है। ओडिशा में भीषण गर्मी के बीच जनगणना ड्यूटी कर रहे दो शिक्षकों की लू लगने से मौत ने हालात की गंभीरता को उजागर कर दिया है। मयूरभंज के राजकपूर हेम्ब्रम और सुंदरगढ़ के अनुराग एक्का बीमार होने के बावजूद काम पर लगे रहे, जिससे उनकी जान चली गई। दरअसल, सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया ग्लोबल वॉर्मिंग की मार झेल रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, दुनिया के 100 सबसे गर्म शहरों में से 92 भारत में हैं और अब हालात ऐसे हैं कि दिन के साथ-साथ रातें भी बेहद गर्म रहने लगी हैं, जिसे 'सीवियर वार्म नाइट' कहा जाता है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर गर्मी इतनी खतरनाक क्यों होती जा रही है। आइए, जानते हैं विस्तार से -

मयूरभंज में शिक्षक की मौत
ओडिशा के मयूरभंज जिले से एक दुखद घटना सामने आई है। बेतनटी क्षेत्र के बायदनाथ हाई स्कूल में पढ़ाने वाले शिक्षक राजकपूर हेम्ब्रम की रविवार शाम इलाज के दौरान मौत हो गई। बताया जा रहा है कि जनगणना ड्यूटी से लौटने के बाद उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई और वह बेहोश हो गए। अस्पताल ले जाने पर डॉक्टर उन्हें बचा नहीं सके। स्कूल प्रशासन के मुताबिक, उन्हें तीन गांवों में सर्वे का काम सौंपा गया था। वहीं परिवार का आरोप है कि तबीयत ठीक न होने के बावजूद उनसे लगातार फील्ड में काम कराया जा रहा था, जिससे उनकी हालत और खराब हो गई।
सुंदरगढ़ में दूसरी घटना
ऐसा ही एक और मामला सुंदरगढ़ जिले में सामने आया। यहां जरदा सरकारी हाई स्कूल के शिक्षक अनुराग एक्का जनगणना के काम के दौरान शनिवार को अचानक बीमार पड़ गए। पहले उन्हें पास के स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, लेकिन हालत बिगड़ने पर जिला अस्पताल रेफर किया गया। इलाज के दौरान उनकी भी मौत हो गई। इन दोनों घटनाओं ने भीषण गर्मी के बीच काम कर रहे लोगों की सुरक्षा और व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बढ़ती गर्मी की वजह क्या है?
इस साल देश में पड़ रही तेज गर्मी के पीछे कई कारण एक साथ काम कर रहे हैं। सबसे बड़ी वजह है हीट वेव की बढ़ती तीव्रता, जो अब पहले से ज्यादा लंबे समय तक और ज्यादा असर के साथ देखने को मिल रही है। सबसे पहले बात करें 'हीट डोम' की यह ऐसी स्थिति होती है, जब गर्म हवा जमीन के पास ही फंसी रह जाती है। ऊपर की ओर उच्च दबाव की परत एक ढक्कन की तरह काम करती है, जिससे गर्म हवा ऊपर नहीं जा पाती और तापमान तेजी से बढ़ जाता है।
इसके अलावा, कमजोर पश्चिमी विक्षोभ भी एक कारण है। आमतौर पर ये सिस्टम मौसम में बदलाव लाकर थोड़ी राहत देते हैं, लेकिन जब ये कमजोर पड़ जाते हैं, तो गर्मी लगातार बनी रहती है। सबसे अहम वजह जलवायु परिवर्तन (क्लाइमेट चेंज) है। पृथ्वी का औसत तापमान लगातार बढ़ रहा है, जिससे हीटवेव ज्यादा बार और ज्यादा खतरनाक रूप में सामने आ रही हैं। शहरों में स्थिति और गंभीर हो जाती है। कंक्रीट की इमारतें और सड़कें दिनभर गर्मी सोखती हैं और रात में छोड़ती हैं, जिससे रातें भी ठंडी नहीं हो पातीं इसे अर्बन हीट आइलैंड इफेक्ट कहा जाता है। साथ ही पेड़ों की कमी और घटता भूजल स्तर हवा में नमी कम कर देते हैं, जिससे गर्मी और ज्यादा चुभने लगती है।
वैश्विक स्तर पर भी बदलाव देखने को मिल रहा है। अल नीनो जैसे मौसमीय पैटर्न गर्मी को और बढ़ा रहे हैं। मौसम एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि आने वाले महीनों में इसका असर और तेज हो सकता है, जिससे तापमान सामान्य से काफी ऊपर जा सकता है। यानी साफ है कि बढ़ती गर्मी किसी एक वजह से नहीं, बल्कि कई कारणों के मिलकर असर डालने से और भी खतरनाक होती जा रही है।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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