Latest Updates
-
गर्मियों में भूलकर भी न खाएं ये 5 फल, फायदे की जगह पहुंचा सकते हैं शरीर को भारी नुकसान -
Himachal Day 2026 Wishes In Pahadi: 'पहाड़ां री खुशबू, देओदारे री छां', अपनों को भेजें पहाड़ी शुभकामनाएं -
Pohela Boishakh 2026 Wishes: 'शुभो नबो बोर्शो' के साथ शुरू करें नया साल, अपनों को भेजें ये शानदार संदेश -
Himachal Day 2026 Wishes: हिमाचल है हमारा अभिमान...हिमाचल दिवस पर प्रियजनों को भेजें ये खास शुभकामना संदेश -
Aaj Ka Rashifal, 15 April 2026: इन 4 राशियों की आज पलटने वाली है किस्मत, क्या आपकी राशि भी है शामिल? -
Grahan in April 2026: अप्रैल में ग्रहण है या नहीं? नोट कर लें साल के सभी सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण की तारीख -
पाचन से लेकर जोड़ों के दर्द से राहत दिलाने तक, जानें अर्ध मत्स्येन्द्रासन के फायदे और अभ्यास का सही तरीका -
Vastu Tips: घर में कपूर के साथ मिलाकर जलाएं ये दो चीजें, दूर होगी नकारात्मक ऊर्जा और मिलेगा सुकून -
Real vs Fake Watermelon: कहीं आप भी तो नहीं खा रहे मिलावटी तरबूज? इन आसान तरीकों से करें असली और नकली की पहचान -
Pana Sankranti 2026: आज ओडिशा में मनाई जा रही है पना संक्रांति, जानें शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि
Paryushan 2024 : क्यों जैन नहीं खाते हैं प्याज- आलू, इस वजह से खाने से करते हैं परहेज
Why don't Jains eat garlic and onions : हम जब भी फ्लाइट में ट्रेवल करते हैं या रेस्तरां में जाते हैं, तो हम एक चीज नोटिस करते हैं वो हैं वेज-नॉनवेज के बीच एक और मील टाइप होता है वो हैं जैन मील। जैन आहार या भोजन उसे कहा जाता है जिसमें बिना लहसुन, प्याज और आलू का इस्तेमाल किए बनाया जाता है।
जैन धर्म के अलावा हिंदू धर्म में भी धार्मिक कार्यों में बनने वाले भोजन में लहसुन-प्याज को वर्जित मानते हैं। इस परंपरा को आज भी फॉलो किया जाता है। आइए जानते हैं कि आखिर जैन आलू, लहसुन और प्याज से क्यों परहेज करते हैं?

यह है वजह
जैन धर्म अहिंसा पर जोर देता है जैन धर्म का मानना है कि प्याज और लहसुन जैसे तामसिक खाद्य पदार्थ क्रोध और तनाव को विकसित करते हैं। इसलिए पारंपरिक विचार रखने वाले जैन धर्म के अनुयायी बिना प्याज और लहसुन वाला भोजन ही करते हैं। इसके अलावा ये सेक्स हार्मोन को बढ़ावा देते हैं, जो कामेच्छा को प्रेरित करते हैं और इस वजह से मन ध्यान और आध्यात्म से भटकता है।
कंदमूल से भी रहते हैं दूर
प्याज-लहसुन के अलावा जैन जमीन के अंदर पैदा होने वाली सब्जियों का भी सेवन नहीं करते हैं। जैन आलू, अदरक, लहसुन, चुकन्दर, गाजर, मूली, शकरकंद को खाने से परहेज करते हैं। इन सब्जियों को कंदमूल कहते हैं। जैनियों का मानना है कि जमीन के नीच उगने वाली सब्जियों में कई सारे सूक्ष्म जीव और जीवाणु होते हैं जो हमें नग्न आंखों से नहीं दिखते। ऐसे में जब वे ये सब्जियां खाते हैं तो इन सूक्ष्म जीवों को भी खा लेते हैं जो एक तरह से हिंसा है।
आयुर्वेद में प्याज-लहसुन को माना है तामसिक
आयुर्वेद में खाद्य पदार्थों को तीन श्रेणियों में बांटा जाता है- सात्विक, राजसिक और तामसिक। सात्विक भोजन मतलब सादा खाना। राजसिक भोजन मतलब चटपटा खाना और तामसिक भोजन मतलब राक्षसी खाना। प्याज-लहसुन राजसिक और तामसिक भोजन के भाग हैं। आयुर्वेद में भी प्याज-लहसुन खाने की मनाही है।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications











