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पाकिस्तान के 12 जिलों में मिला पोलियो, सालों पहले कैसे वायरस फ्री हो गया था भारत, कितनी खतरनाक है ये बीमारी
Polio Crisis in Pakistan: पोलियो एक गंभीर और जानलेवा बीमारी है, जो पोलियोवायरस के कारण होती है। पिछले कुछ वर्षों में, दुनिया के अधिकांश देश इस बीमारी से मुक्त हो चुके हैं। हालांकि, पाकिस्तान और अफगानिस्तान अभी भी पोलियो से प्रभावित हैं।
रिपोर्ट्स के अनुसार, दुनिया के करीब 85% पोलियो के मामले केवल पाकिस्तान में ही दर्ज किए जाते हैं। हाल ही में पाकिस्तान के 12 जिलों में इस वायरस की पुष्टि हुई है, जिससे भारत में भी चिंता बढ़ गई है। भारत को 2014 में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा पोलियो-मुक्त देश घोषित किया गया था, लेकिन पाकिस्तान से लोगों की आवाजाही के कारण वायरस के पुनः प्रवेश की आशंका बनी हुई है।

पोलियो क्या है?
पोलियो एक संक्रामक बीमारी है, जो मुख्य रूप से पोलियोवायरस से फैलती है। यह वायरस संक्रमित व्यक्ति के मल के संपर्क में आने या दूषित पानी एवं भोजन के माध्यम से फैलता है। ज्यादातर मामलों में, इस संक्रमण के लक्षण हल्के होते हैं या फिर बिल्कुल दिखाई नहीं देते। हालांकि, कुछ गंभीर मामलों में यह लकवे (पैरालिसिस) का कारण बन सकता है और मृत्यु तक हो सकती है।
पोलियो क्यों खतरनाक है?
पोलियो का सबसे बड़ा खतरा यह है कि संक्रमित व्यक्ति को लक्षण नजर नहीं आते, लेकिन वह दूसरों में वायरस फैला सकता है। पोलियो के लक्षण दो प्रकार के हो सकते हैं:
नॉन-पैरालिटिक पोलियो: यह हल्का पोलियो होता है, जिसके लक्षण फ्लू जैसे होते हैं, जैसे बुखार, गले में खराश, सिरदर्द, उल्टी और शरीर में दर्द। ये लक्षण लगभग 10 दिनों तक रह सकते हैं।
पैरालिटिक पोलियो: यह गंभीर स्थिति होती है, जिसमें रीढ़ की हड्डी और ब्रेनस्टेम प्रभावित होते हैं। इससे मांसपेशियों में कमजोरी और लकवा हो सकता है। दुर्लभ मामलों में, यह घातक भी हो सकता है।
किन लोगों को पोलियो का अधिक खतरा होता है?
पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चे: इस आयु वर्ग के बच्चों में संक्रमण की संभावना अधिक होती है।
वे लोग जिन्हें पोलियो वैक्सीन की पूरी खुराक नहीं मिली है।
कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोग: जिनका इम्यून सिस्टम कमजोर होता है, वे इस बीमारी के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं।
पोलियो प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोग: ऐसे क्षेत्रों में वायरस का प्रसार तेज़ी से हो सकता है।
भारत में पोलियो कब खत्म हुआ?
भारत ने पोलियो के खिलाफ लंबी लड़ाई लड़ी और इसे समाप्त करने में सफलता पाई। 2 अक्टूबर 1995 को भारत में पल्स पोलियो टीकाकरण कार्यक्रम शुरू किया गया था, जिसके तहत पांच साल से कम उम्र के सभी बच्चों को पोलियो की खुराक दी गई। इस व्यापक अभियान के कारण, भारत में पोलियो का आखिरी मामला 2011 में दर्ज किया गया था। इसके बाद, 27 मार्च 2014 को WHO ने भारत को पोलियो-मुक्त देश घोषित कर दिया।
पाकिस्तान में बढ़ते पोलियो मामलों से भारत को क्या खतरा है?
यूनिसेफ की रिपोर्ट के अनुसार, कोरोनाकाल के दौरान कई माता-पिता ने अपने बच्चों को पोलियो और अन्य आवश्यक टीकों की पूरी खुराक नहीं दिलवाई। इससे बच्चों में पोलियो वायरस के खिलाफ इम्यूनिटी पूरी तरह विकसित नहीं हो पाई होगी। यदि ऐसे बच्चे पोलियो वायरस के संपर्क में आते हैं, तो उनमें संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। हालांकि, इसकी संभावना कम है, फिर भी एहतियात बरतना आवश्यक है।
सावधानी क्यों जरूरी है?
सीमावर्ती इलाकों में सतर्कता: पाकिस्तान और भारत के बीच लोगों की आवाजाही जारी रहती है, जिससे संक्रमण फैलने की आशंका बनी रहती है।
बच्चों को पोलियो की पूरी खुराक दिलवाएं: माता-पिता को सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके बच्चों को पोलियो टीकाकरण की सभी खुराकें समय पर मिलें।
संक्रमण की रोकथाम के लिए निगरानी: स्वास्थ्य विभाग को उन क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देना चाहिए, जहां पोलियो के मामले सामने आ सकते हैं।
व्यक्तिगत स्वच्छता का ध्यान रखें: दूषित जल और भोजन से बचें, खासकर उन इलाकों में जहां संक्रमण का खतरा अधिक हो सकता है।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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