Latest Updates
-
बारिश के मौसम में सर्दी-खांसी और गले की खराश से हैं परेशान तो आजमाएं ये 5 घरेलू उपाय, मिलेगी तुरंत राहत -
Sawan 2026 Shivling Puja Vidhi: शिवलिंग पर सबसे पहले क्या चढ़ाना चाहिए? जानिए सावन में जलाभिषेक का सही तरीका -
Radhika Ambani Look: लंदन में Dior की सिंपल सी ड्रेस पहन छाईं राधिका अंबानी, लेकिन कीमत सुन उड़ जाएंगे आपके होश -
Sawan First Somwar 2026: सावन का पहला सोमवार आज, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त, विधि और व्रत के जरूरी नियम -
Happy Sawan Somwar 2026 Wishes: शिव का नाम...सावन के पहले सोमवार पर अपनों को भेजें ये खास शुभकामनाए संदेश -
बारिश के मौसम में तेजी से बढ़ रहा है वायरल फीवर का खतरा, जानिए लक्षण और बचाव के उपाय -
Friendship Day Wishes For Best Friend: इन संदेशों के जरिए बेस्ट फ्रेंड को दें फ्रेंडशिप डे की बधाई -
Happy Friendship Day 2026 Wishes: तेरी मेरी यारी...इन संदेशों के साथ दोस्तों को दें फ्रेंडशिप डे की शुभकामनाएं -
आगरा की अवनी गुप्ता ने Miss Supranational 2026 में बढ़ाया भारत का मान, कॉर्पोरेट जॉब छोड़ बनाई टॉप 12 में जगह -
सावन में भूलकर भी न करें इन चीजों का सेवन, एक्सपर्ट से जानें सावन में क्या खाएं और क्या नहीं
महाराष्ट्र में गुइलेन-बैरे सिंड्रोम से पहली मौत, 16 वेंटिलेटर पर, 101 केस एक्टिव, महंगा है इस बीमारी का इलाज
1st Death Due To Guillain-Barre Syndrome : महाराष्ट्र के पुणे में GBS के 100 से अधिक मामले सामने आए हैं, जिनमें 16 मरीज वेंटिलेटर पर हैं। सोलापुर में इस बीमारी से एक व्यक्ति की मौत की भी खबर है। हालांकि अभी इसकी पुष्टि नहीं हुई है लेकिन रिपोर्ट के अनुसार, पीड़ित पुणे में संक्रमण की चपेट में आने के बाद सोलापुर की यात्रा की थी।
गुलेन बैरी सिंड्रोम (GBS) एक गंभीर ऑटोइम्यून न्यूरोलॉजिकल बीमारी है, समय रहते इस बीमारी की इलाज की आवश्यकता जरूरी है। ऐसे में ये जानना जरूरी है कि आखिर गुलेन बैरी सिंड्रोम क्या है और कितनी खतरनाक बीमारी है ओर इससे बचने के तरीके क्या है?

क्या है गुलेन बैरी सिंड्रोम?
गुलेन बैरी सिंड्रोम (GBS) एक ऑटोइम्यून न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर है, जिसमें शरीर का इम्यून सिस्टम अपनी ही नर्व्स पर हमला करता है। यह समस्या मुख्य रूप से पेरिफेरल नर्वस सिस्टम को प्रभावित करती है, जो मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी के बाहर की नसों को नियंत्रित करता है।
नर्वस सिस्टम दो हिस्सों में बंटा होता है: सेंट्रल नर्वस सिस्टम (मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी) और पेरिफेरल नर्वस सिस्टम (शरीर की अन्य नसें)। GBS में इम्यून सिस्टम पेरिफेरल नर्वस सिस्टम पर हमला करता है, जिससे तंत्रिका संचार बाधित होता है। इसे गंभीर स्थिति मानते हुए तुरंत इलाज जरूरी है।
इसी बीमारी से गई थी अमेरिकी राष्ट्रपति रूजवेल्ट की जान
गुलेन बैरी सिंड्रोम (GBS) एक दुर्लभ न्यूरोलॉजिकल बीमारी है, जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली नसों पर हमला करती है। यह हर साल प्रति लाख में केवल 1-2 लोगों को प्रभावित करती है। GBS से पीड़ित लगभग 7.5% मरीजों की मृत्यु हो जाती है, जो इसकी गंभीरता दर्शाता है।
पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति फ्रैंकलिन डी. रूजवेल्ट की मृत्यु का कारण भी यह बीमारी थी। GBS के कारण उन्हें लकवा हो गया था, और उनका निचला शरीर काम करना बंद कर चुका था। हालांकि, उस समय उनकी मौत का कारण पोलियो बताया गया था। बाद में हुई रिसर्च से स्पष्ट हुआ कि उनकी मृत्यु का असल कारण गुलेन बैरी सिंड्रोम था। इस बीमारी का सही समय पर उपचार बेहद जरूरी है।
गुलेन बैरी सिंड्रोम का नाम फ्रांसीसी न्यूरोलॉजिस्ट जॉर्जेस गुलेन और जीन एलेक्जेंडर बैरी के नाम पर रखा गया है। इन दोनों ने 1916 में फ्रांसीसी डॉक्टर आंद्रे स्ट्रोहल के साथ मिलकर इस बीमारी पर महत्वपूर्ण रिसर्च की थी।
पेरू में लगानी पड़ी थी हेल्थ इमरजेंसी
2023 में पेरू में गुलेन बैरी सिंड्रोम के बढते मामलों के चलते वहां की सरकार को 90 दिनों के लिए हेल्थ इमरजेंसी घोषित करनी पड़ी थी, ताकि स्थिति को नियंत्रित किया जा सके।
गुलेन बैरी सिंड्रोम (GBS) के लक्षण
गुलेन बैरी सिंड्रोम (GBS) के लक्षण तेजी से विकसित होते हैं और इसमें मुख्य रूप से निम्नलिखित समस्याएँ होती हैं:
कमजोरी और सुन्नता: यह आमतौर पर हाथों और पैरों में महसूस होती है, जो धीरे-धीरे पूरे शरीर में फैल सकती है।
लकवा: शरीर के निचले हिस्से में कमजोरी या लकवा आ सकता है, जिससे चलने-फिरने में दिक्कत हो सकती है।
सांस लेने में कठिनाई: गहरे मामलों में, यह सिंड्रोम श्वसन तंत्र को प्रभावित कर सकता है, जिससे सांस लेने में समस्या हो सकती है।
दर्द और झुनझुनी: शरीर में दर्द, जलन या झुनझुनी महसूस हो सकती है, खासकर हाथों और पैरों में।
प्रतिक्रियाओं में धीमापन: रिफ्लेक्स और सामान्य शारीरिक प्रतिक्रियाएँ धीमी हो सकती हैं।
विभ्रांतियाँ: गहरे मामलों में, मानसिक स्थिति भी प्रभावित हो सकती है।
अगर किसी व्यक्ति में ये लक्षण दिखते हैं, तो तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए, क्योंकि GBS का सही समय पर इलाज जरूरी है।
गुलेन बैरी सिंड्रोम का कारण
गुलेन बैरी सिंड्रोम का मुख्य कारण शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली का अपने ही तंत्रिका तंत्र पर हमला करना है। यह आमतौर पर वायरल संक्रमण, जैसे फ्लू, कोविड-19, या आंतों के संक्रमण के बाद उत्पन्न होता है, जिससे नसों में सूजन और क्षति होती है।
गुलेन बैरी सिंड्रोम का इलाज और इसकी कीमत
GBS का इलाज महंगा होता है, जिसमें मरीजों को आमतौर पर इम्युनोग्लोबुलिन (IVIG) इंजेक्शन का कोर्स करना पड़ता है। निजी अस्पताल में एक इंजेक्शन की कीमत लगभग ₹20,000 होती है। पुणे के एक अस्पताल में भर्ती 68 वर्षीय मरीज के परिजनों ने बताया कि उनके मरीज को इलाज के दौरान 13 इंजेक्शन लगाने पड़े। डॉक्टरों के अनुसार, GBS के 80% मरीज अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद 6 महीने में बिना किसी सपोर्ट के चलने-फिरने लगते हैं। हालांकि, कुछ मामलों में मरीजों को ठीक होने में एक साल या उससे भी अधिक समय लग सकता है।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications