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प्रेगनेंसी ही नहीं इन 5 कारणों से भी मिस हो सकते हैं पीरियड्स, भूलकर भी न करें नजरअंदाज
Missed Periods Causes Other Than Pregnancy: पीरियड्स या माहवारी महिलाओं के शरीर की एक प्राकृतिक प्रक्रिया है। आमतौर पर 20 से 45 साल की उम्र में महिलाओं को हर महीने पीरियड्स आते हैं। सामान्य रूप से हर 28 से 45 दिन के बीच पीरियड्स होना सही माना जाता है। लेकिन कई बार पीरियड्स समय पर नहीं आते या कई महीने तक रुक जाते हैं। इसे इर्रेगुलर पीरियड्स या मिस्ड पीरियड्स कहा जाता है। आजकल यह समस्या महिलाओं में बहुत आम हो गई है, जिसकी मुख्य वजह गलत खानपान, तनाव और खराब लाइफस्टाइल है। पीरियड्स मिस होना प्रेगनेंसी का सबसे पहला लक्षण होता है। ऐसे में, ज्यादातर लोग पीरियड्स मिस होने को प्रेग्नेंसी से जोड़ते हैं, लेकिन ऐसा हमेशा जरूरी नहीं है। जी हां, पीरियड्स मिस होने के पीछे और भी कई कारण हो सकते हैं। तो आइए, जानते हैं कि पीरियड्स मिस होने के क्या कारण हो सकते हैं?

पीसीओएस
आज के समय में पीसीओएस यानी पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम की समस्या महिलाओं में आम हो गयी है। इसमें ओवरी में छोटे-छोटे सिस्ट बन जाते हैं और हार्मोन असंतुलित हो जाते हैं। इसकी वजह से ओव्यूलेशन नहीं हो पाता और पीरियड्स या तो बहुत लेट आते हैं या कई बार आते ही नहीं।
तनाव
लंबे समय तक स्ट्रेस या चिंता में रहने से भी पीरियड्स मिस हो सकते हैं। दरअसल, जब आप तनाव में होते हैं, तो दिमाग से निकलने वाले सिग्नल शरीर के हार्मोन को प्रभावित करते हैं, जिससे पीरियड्स का टाइम गड़बड़ा जाता है।
थायराइड की समस्या
थायराइड हार्मोन का लेवल ज्यादा या कम होने पर भी मासिक चक्र पर असर पड़ता है। इसकी वजह से कई बार पीरियड्स देरी से आते हैं या फिर मिस हो सकते हैं। अगर आपको पीरियड्स की समस्या के साथ-साथ थकान, बाल झड़ना या वजन में अचानक बदलाव महसूस हो, तो डॉक्टर से मिलकर थायराइड की जांच जरूर कराएं।
दवाओं के साइड-इफेक्ट्स
कुछ स्टडीज के मुताबिक, बर्थ कंट्रोल पिल्स, एंटी-डिप्रेशन और एंटी-स्ट्रेस दवाओं का सेवन करने के साइड-इफेक्ट्स के कारण भी पीरियड्स मिस हो सकते हैं। इन दवाओं की वजह से पीरियड्स मिस या अनियमित होने की समस्या हो सकती है। अगर आप भी इन दवाओं का सेवन कर रही हैं और आपको समय पर पीरियड्स नहीं होते, तो डॉक्टर से संपर्क करें।
वजन बढ़ना या घटना
अगर आपका वजन बहुत तेजी से बढ़ता या घटता है, तो इसका असर आपके हार्मोन पर पड़ता है। दरअसल, शरीर में फैट की मात्रा बदलने से हार्मोनल बैलेंस बिगड़ जाता है, जिससे पीरियड्स अनियमित या मिस हो सकते हैं।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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