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Diphtheria Outbreak : राजस्थान में डिप्थीरिया से 29 दिन में 7 बच्चों की मौत, जानिए इस जानलेवा बीमारी के लक्षण?
Diphtheria Outbreak in Rajasthan : दुनियाभर में 70 के दशक तक घातक बीमारी रही डिप्थीरिया यानी गलघोटू फिर लौट आई है। पंजाब में 3 साल की बच्ची की मौत के बाद अब राजस्थान के डीग में डिप्थीरिया बीमारी फैलने से एक महीने के अंदर 7 बच्चों की मौत की खबर सामने आई है। इसके अलावा इस क्षेत्र में 24 बच्चें अभी भी संक्रमित बताए जा रहे हैं। मामलों की बढ़ती संख्या को देखकर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और जयपुर से चिकित्सा विभाग की टीमें डीग पहुंची है। गांव-गांव में बच्चों का टीकाकरण अभियान की शुरुआत की है।
डिप्थीरिया एक गंभीर बैक्टीरियल संक्रमण है, जो गले और श्वसन तंत्र को प्रभावित करता है और कभी-कभी त्वचा पर भी असर डालता है। यह बैक्टीरिया Corynebacterium diphtheriae के कारण होता है। इसका संक्रमण तेजी से फैल सकता है और समय पर इलाज न होने पर जानलेवा भी हो सकता है।

राजस्थान में इस बीमारी के फैलने की वजह
जानकारी के अनुसार यह बीमारी जन्म से 16 साल तक के बच्चों को अपनी चपेट में लेती हैं। डिप्थीरिया से बचाव के लिए बच्चों का टीकाकरण कराना जरूरी है। सरकार हर महीने गांव-गांव जाकर टीकाकरण अभियान चलाती है लेकिन कई परिवार बुखार के डर से अपने बच्चों का टीकाकरण नहीं कराते हैं। मेवात क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में लोगों के जागरूकता की कमी के कारण टीकाकरण की दर कम है, जिसके परिणामस्वरुप बच्चें इस बीमारी की चपेट में आ गए हैं।
डिप्थीरिया के लक्षण
- गले में तेज दर्द या सूजन हो सकती है।
- हल्का या मध्यम बुखार आ सकता है।
- टॉन्सिल, गले या नाक के अंदर सफेद या भूरे रंग की मोटी झिल्ली बन सकती है।
- सांस लेने में कठिनाई होती है, खासकर बच्चों में।
- गला और गर्दन के आसपास सूजन हो सकती है, जिसे "बुलनेक" कहा जाता है।
- आवाज कर्कश हो सकती है।
- अत्यधिक कमजोरी और थकान महसूस होती है।
डिप्थीरिया के कारण
- यह Corynebacterium diphtheriae बैक्टीरिया से फैलता है।
हवा के जरिए संक्रमण: संक्रमित व्यक्ति के खांसने या छींकने से यह हवा में फैल सकता है।
- संक्रमित व्यक्ति के निकट संपर्क या उनकी वस्तुओं का उपयोग करने से संक्रमण हो सकता है।
- जिन लोगों को बचपन में डिप्थीरिया का टीका नहीं लगाया गया होता, उन्हें इसका अधिक खतरा होता है।
डिप्थीरिया का इलाज
- डिप्थीरिया बैक्टीरिया द्वारा छोड़े गए टॉक्सिन को निष्क्रिय करने के लिए एंटीटॉक्सिन दिया जाता है।
- संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए एंटीबायोटिक्स, जैसे पेनिसिलिन या एरिथ्रोमाइसिन दिया जाता है।
- गंभीर मामलों में मरीज को अस्पताल में भर्ती करना पड़ता है, जहां उन्हें सांस लेने में मदद के लिए ऑक्सीजन या वेंटिलेटर की जरूरत हो सकती है।
- संक्रमित व्यक्ति को दूसरों से अलग रखा जाता है ताकि संक्रमण और न फैले।
वैक्सीनेशन हैं बचाव
डिप्थीरिया से बचने का एकमात्र उपाय बचपन में DPT (डिप्थीरिया, टेटनस, पर्टुसिस) वैक्सीन है, यह सबसे प्रभावी रोकथाम है। यह टीका जन्म से 16 साल तक बच्चों को टीके लगाए जाते हैं।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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