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सेप्टिसीमिया की वजह से शारदा सिन्हा ने गंवाई जान, क्या है ये बीमारी और कब बन जाती है घातक?
Sharda Sinha Death cause : बिहार की स्वर कोकिला शारदा सिन्हा का मंगलवार को दिल्ली एम्स में निधन हो गया था। वो 2018 से मल्टीपल मायलोमा से जूझ रही थी। यह बीमारी एक प्रकार ब्लड कैंसर है। वह काफी समय से एम्स के कैंसर विभाग में भर्ती थीं और वेंटिलेंटर हैं।
उनके निधन की खबर के बाद एम्स नई दिल्ली की ओर से जारी बयान के अनुसार शारदा सिन्हा की मौत सेप्टिसीमिया की वजह से हुई थी। हालांकि गायिका को ब्लड कैंसर था, लेकिन मौत की असल वजह सेपिटसीमिया थी। आइए बताते हैं कि सेप्टिसीमिया क्या होता है और किन लोगों के लिए जानलेवा हो सकता है।

सेप्टिसीमिया क्या है?
सेप्टिसीमिया, सेप्टिक का गंभीर रूप होता है। सेप्टिसीमिया एक गंभीर और जानलेवा स्थिति है जिसमें शरीर में संक्रमण फैलने के कारण रक्त में ज़हरीले तत्व (टॉक्सिन) का स्तर बढ़ जाता है। सरल भाषा में बोले तो खून जहरीला बनने लगता है। जब यह स्थिति अत्यधिक गंभीर हो जाती है, तो इसे सेप्टिक शॉक कहा जाता है, जिसमें रक्तचाप अत्यधिक गिर सकता है और कई अंगों की कार्यक्षमता बिगड़ सकती है।
किन लोगों के लिए है खतरनाक
कमजोर इम्यून सिस्टम वाले लोग: जैसे कि बुजुर्ग, नवजात शिशु, कैंसर के मरीज, एचआईवी/एड्स के मरीज, और जो लोग इम्यूनोसप्रेसिव दवाओं पर हैं।
गंभीर बीमारियों से ग्रसित लोग: जैसे कि मधुमेह, हृदय रोग, या किडनी की बीमारियां।
अस्पताल में भर्ती मरीज: लंबे समय तक अस्पताल में रहना या आईसीयू में भर्ती रहना संक्रमण के जोखिम को बढ़ा सकता है।
बड़े ऑपरेशन या घाव: जो लोग बड़े ऑपरेशन से गुजरे हों या जिनके शरीर में बड़े घाव हों, उनमें संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है।
ब्लड कैंसर के मरीजों के लिए है क्यों है घातक?
क्लीवरलैंड क्लिनिक के मुताबिक ब्लड कैंसर के मरीजों में सेप्टिसीमिया का खतरा अधिक होता है, क्योंकि कैंसर और उसके उपचार (जैसे कीमोथेरेपी) रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर कर देते हैं। इम्यूनिटी कमजोर होने पर शरीर बैक्टीरिया, वायरस, और फंगल संक्रमणों से प्रभावी ढंग से लड़ने में सक्षम नहीं होता, जिससे संक्रमण का खतरा और बढ़ जाता है।
सेप्टिसीमिया कैसे बनता है मौत का कारण?
पहला चरण: संक्रमण के कारण शरीर में सूजन होने लगती है। इम्यून सिस्टम बैक्टीरिया या वायरस से लड़ने के लिए रसायनों का निर्माण करता है, जिससे सूजन होती है। इस चरण में बुखार, तेज हृदयगति और सांस लेने में कठिनाई जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
दूसरा चरण: सूजन और संक्रमण बढ़ने से रक्तचाप में गिरावट आती है, जिससे अंगों तक ऑक्सीजन और रक्त की आपूर्ति प्रभावित होती है। इस स्थिति में शरीर के अंग सही ढंग से काम नहीं कर पाते और अंगों की विफलता का खतरा बढ़ जाता है।
तीसरा चरण (सेप्टिक शॉक): यह अंतिम और सबसे गंभीर चरण है, जिसमें शरीर के एक या अधिक अंग विफल हो जाते हैं। सेप्टिक शॉक में रक्तचाप इतना गिर सकता है कि इसे नियंत्रित करना कठिन हो जाता है। इस चरण में ब्रेन डैमेज और दिल के अचानक रुक जाने जैसी स्थितियां पैदा हो सकती हैं, जो मृत्यु का कारण बन सकती हैं।
सेप्टिसीमिया से बचाव
डॉक्टरों मरीजों की इम्यूनिटी को बनाए रखने के लिए उचित देखभाल और संक्रमण की रोकथाम पर इन बातों का विशेष ध्यान रखने की सलाह देते हैं-
- धूम्रपान इम्यून सिस्टम को कमजोर करता है और संक्रमण का खतरा बढ़ाता है। धूम्रपान छोड़ने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहतर होती है।
- अनावश्यक दवाओं का सेवन प्रतिरोधक क्षमता पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है और शरीर में बैक्टीरिया का असंतुलन पैदा कर सकता है।
- कैंसर के मरीजों को सेप्टिसीमिया से बचाने के लिए उन्हें साफ-सफाई और संक्रमण से बचाव के विशेष उपाय अपनाने की सलाह दी जाती है।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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