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Social Media Side Effects On Mental Health: आज के डिजिटल दौर में सोशल मीडिया हमारे जीवन का अहम हिस्सा बन चुका है। इंस्टाग्राम, फेसबुक, यूट्यूब और ट्विटर जैसे प्लेटफॉर्म्स पर लोग अपने विचार, तस्वीरें और वीडियो शेयर करते हैं। लेकिन जहां एक ओर सोशल मीडिया लोगों को जोड़ने और खुद को व्यक्त करने का मौका देता है, वहीं दूसरी ओर यह मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर भी डाल रहा है। आज के समय में ज्यादातर लोग अपने हर सोशल मीडिया पोस्ट पर मिलने वाले लाइक्स, कमेंट्स और फॉलोअर्स की गिनती पर ध्यान देते हैं। किसी पोस्ट पर कम लाइक्स आना या फॉलोअर्स का घट जाना, कई बार लोगों को परेशान कर देता है। खासकर, युवाओं और कंटेंट क्रिएटर्स के लिए सोशल मीडिया अब आत्मसम्मान से जुड़ा मुद्दा बन गया है। पिछले कुछ समय में सोशल मीडिया ट्रेंड्स या ट्रोलिंग के कारण आत्महत्या के भी कई मामले सामने आए हैं। ऐसे में, सवाल यह उठता है कि सोशल मीडिया के नकारात्मक प्रभाव से कैसे बचा जाए। आइए, जानते हैं डॉ. सुमित गक्खड़, विजिटिंग कंसल्टेंट - मनोचिकित्सा, नारायणा अस्पताल, जयपुर से -
लाइक्स और फॉलोअर्स की दौड़ में खराब होती मेंटल हेल्थ
हमारे समाज में शारीरिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता तो हमेशा रही है, लेकिन मानसिक स्वास्थ्य को अक्सर नजरअंदाज किया जाता है। पिछले कुछ सालों में भारत में मानसिक स्वास्थ्य की चर्चा जरूर बढ़ी है, लेकिन मानसिक परेशानियों के मामले भी बढ़े हैं, और इसमें सोशल मीडिया की भूमिका को नकारा नहीं जा सकता। 2023 के आंकड़ों के अनुसार, भारत के करीब 67।5% वयस्क नियमित रूप से सोशल मीडिया का उपयोग करते हैं। खासकर युवा और किशोर वर्ग में यह संख्या और भी अधिक है, जहां रोजाना घंटों ऑनलाइन रहना, दूसरों से तुलना करना और अधिक लाइक्स या फॉलोअर्स पाने की चाह सामान्य बात बन चुकी है।

मानसिक स्वास्थ्य पर सोशल मीडिया का असर
आज के युवाओं के लिए सोशल मीडिया सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि पहचान और आत्मसम्मान का माध्यम बन चुका है। किसी पोस्ट पर कम लाइक्स आना या फॉलोअर्स का घट जाना कई बार लोगों को परेशान कर देता है। कुछ इंस्टाग्राम इन्फ्लुएंसर्स ने इंटरव्यू में बताया कि कैसे घटते फॉलोअर्स और नेगेटिव कमेंट्स ने उनकी मानसिक स्थिति को काफी प्रभावित किया। खुद को बेहतर दिखाने की चाह के कारण उनमें चिंता, डिप्रेशन और आत्मसम्मान की कमी जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। कई बार जब उन्हें उम्मीद के मुताबिक लाइक्स या कमेंट्स नहीं मिलते, तो वे खुद को असफल महसूस करते हैं। कुछ किशोर तो ट्रेंड्स और वायरल चैलेंज के दबाव में खतरनाक कदम तक उठा लेते हैं।
कमेंट्स और ट्रोलिंग का मानसिक असर
नकारात्मक या अपमानजनक कमेंट्स किसी की भी मानसिक शांति छीन सकते हैं। कई लोग ट्रोलिंग का सामना करते-करते आत्मविश्वास खो देते हैं और खुद पर शक करने लगते हैं। बार-बार की आलोचना, तुलना और ऑनलाइन दबाव से व्यक्ति भावनात्मक रूप से थक जाता है।
कैसे रखें अपनी मानसिक सेहत सुरक्षित
मनोवैज्ञानिक कुछ व्यावहारिक सुझाव देते हैं जिन्हें अपनाकर मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखा जा सकता है:
सोशल मीडिया पर बिताए जाने वाले समय को सीमित करना चाहिए; दिन में एक से दो घंटे से अधिक इसके लिए समय न दें।
सोशल मीडिया पर अपनी तुलना दूसरों से न करें क्योंकि ऑनलाइन दिखने वाली तस्वीरें अक्सर वास्तविकता से दूर होती हैं।
अपनी भावनाओं को परिवार और मित्रों के साथ साझा करें, आवश्यक हो तो मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ की मदद लें।
तनाव कम करने के लिए नियमित शारीरिक व्यायाम, योग और मेडिटेशन का अभ्यास करें।
सोने से पहले मोबाइल और अन्य डिजिटल डिवाइसों का उपयोग बंद कर दें ताकि नींद प्रभावित न हो।
सोशल मीडिया पर मिलने वाले नकारात्मक या अपमानजनक कमेंट्स को नजरअंदाज करना सीखें और साइबर बुलींग की स्थिति में संबंधित प्लेटफॉर्म पर रिपोर्ट करें।
मानसिक स्वास्थ्य संबंधी किसी भी समस्या को गंभीरता से लें और समय रहते उपचार कराएं।
निष्कर्ष
भारत में बढ़ती सोशल मीडिया पहुंच ने जीवन को कई पहलुओं में सरल बनाया है, लेकिन इसके साथ मानसिक स्वास्थ्य की चुनौतियां भी सामने आई हैं। सोशल मीडिया का संतुलित और जागरूक उपयोग ही इन चुनौतियों का समाधान हो सकता है। समय-समय पर अपनी मानसिक स्थिति की जांच करना और जरूरत पड़ने पर मदद लेना, स्वस्थ सोशल मीडिया अनुभव सुनिश्चित करता है। केवल तभी इस डिजिटल युग में मानसिक स्वास्थ्य सुरक्षित रह सकता है और युवा पीढ़ी साइबर दुनिया की चमक के पीछे छिपे खतरों से बच सकती है।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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