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खड़े होने में परेशानी, खून की कमी, धरती पर लौटने पर सुनीता विलियम्स को घेर सकते हैं ये हेल्थ इश्यूज
Sunita Williams Return to Earth: अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स और उनके साथी बुच विल्मोर और उनके दो अन्य साथी नौ महीने अंतरिक्ष में अपना समय बिताने के बाद धरती पर लौट रहे हैं। वे 19 मार्च की सुबह 3:27 बजे स्पेसएक्स के ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट से फ्लोरिडा के तट पर उतरेंगे। अंतरिक्ष से लौटने के बाद उनका शरीर किन स्वास्थ्य समस्याओं का सामना कर सकता है, यह जानना बेहद जरूरी है।
अंतरिक्ष में भारहीनता (जीरो ग्रैविटी) के कारण शरीर में कई बदलाव होते हैं। जब कोई अंतरिक्ष यात्री लंबे समय तक स्पेस में रहता है, तो उनके हड्डियों, मांसपेशियों, खून, इम्यून सिस्टम और संवेदी क्षमताओं पर गहरा असर पड़ता है। वैज्ञानिकों के अनुसार, वापस लौटने पर अंतरिक्ष यात्रियों को चलने-फिरने में कठिनाई हो सकती है, थकान महसूस हो सकती है और अन्य शारीरिक परेशानियां हो सकती हैं। आइए जानते हैं अब धरती पर लौटने के बाद सुनीता विलिम्यस के ऊपर क्या-क्या स्वास्थ्य संकट मंडरा रहा है?

शरीर में खून की कमी
यूनिवर्सिटी ऑफ़ ओटावा के एक अध्ययन में पाया गया कि अंतरिक्ष में रहने से खून की लाल रक्त कोशिकाओं (रेड ब्लड सेल्स) की संख्या कम हो जाती है। शोध में 14 अंतरिक्ष यात्रियों का अध्ययन किया गया, जिसमें यह पता चला कि अंतरिक्ष में उनके शरीर में अधिक रेड ब्लड सेल्स नष्ट हो रहे थे। यह कमी पूरे मिशन के दौरान बनी रही। जब वे धरती पर लौटे, तो उनमें कमजोरी और थकान देखी गई। लाल रक्त कोशिकाओं की संख्या कम होने से शरीर में ऑक्सीजन का प्रवाह भी प्रभावित होता है, जिससे कमजोरी और सुस्ती महसूस होती है।
मांसपेशियां और हड्डियां कमजोर होना
धरती पर गुरुत्वाकर्षण के कारण हमारी मांसपेशियां और हड्डियां मजबूत बनी रहती हैं। लेकिन अंतरिक्ष में भारहीनता के कारण मांसपेशियों का उपयोग कम हो जाता है, जिससे वे धीरे-धीरे कमजोर होने लगती हैं। इसके अलावा, स्पेस में हड्डियों पर दबाव नहीं पड़ता, जिससे उनका घनत्व (Bone Density) कम हो जाता है। वैज्ञानिकों के अनुसार, हर महीने हड्डियों का घनत्व लगभग 1% कम हो सकता है। इससे अंतरिक्ष यात्रियों को धरती पर लौटने के बाद खड़े होने, चलने और दौड़ने में कठिनाई हो सकती है।
इम्यून सिस्टम पर असर
अंतरिक्ष में लंबे समय तक रहने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यून सिस्टम) कमजोर हो सकती है। इससे वे बैक्टीरिया और वायरस के संक्रमण के प्रति अधिक संवेदनशील हो सकते हैं। साथ ही, अंतरिक्ष में उच्च स्तर की रेडिएशन (विकिरण) के कारण अंतरिक्ष यात्रियों में कैंसर होने का खतरा भी बढ़ सकता है। स्पेस में जीरो ग्रैविटी के कारण शरीर सामान्य तरीके से काम नहीं करता, जिससे इम्यून सिस्टम कमजोर हो जाता है।
सूंघने की क्षमता हो सकती है प्रभावित
अंतरिक्ष में खून का बहाव ऊपर की ओर होता है, जिससे चेहरा फूल जाता है और नाक बंद होने की संभावना बढ़ जाती है। यह स्थिति किसी व्यक्ति के सूंघने की क्षमता को प्रभावित कर सकती है। स्पेस में लंबी अवधि तक रहने से ब्लड सर्कुलेशन प्रभावित होता है, जिससे नाक के आसपास परतें जमने लगती हैं और धीरे-धीरे गंध पहचानने की क्षमता कम हो जाती है।
रेडिएशन का खतरा
अंतरिक्ष में पृथ्वी की तुलना में कई गुना अधिक रेडिएशन होता है, जिससे शरीर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। लंबे समय तक रेडिएशन के संपर्क में रहने से डीएनए क्षतिग्रस्त हो सकता है और कैंसर जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। वैज्ञानिक इस खतरे को कम करने के लिए विशेष सुरक्षा उपाय अपनाते हैं, लेकिन रेडिएशन का प्रभाव पूरी तरह समाप्त नहीं किया जा सकता।
धरती पर लौटने के बाद कैसी होगी रिकवरी?
अंतरिक्ष यात्रियों की सेहत को जल्दी ठीक करने के लिए विशेष डाइट और एक्सरसाइज दी जाती है। शरीर को सामान्य स्थिति में वापस लाने के लिए वैज्ञानिक तरीके से रिहैबिलिटेशन कराया जाता है। हालांकि, कुछ प्रभाव लंबे समय तक बने रह सकते हैं।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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