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Measles: बच्चों में तेजी से फैलता है खसरा रोग, सर्दी-जुकाम के अलावा ये है लक्षण
Measles symptoms : खसरा यानि मीसल्स एक अपर रेस्पिरेटरी वायरल इंफेक्शन है जो कई लोगों के लिए अपेक्षाकृत मामूली बीमारी हो सकती है, लेकिन एक्सपर्ट की मानें तो, वायरस से इंफेक्टेड लगभग 20 प्रतिशत लोगों को मुश्किल हालातों का अनुभव हो सकता है, जिसके लिए हॉस्पिटल में भर्ती होने की आवश्यकता होती है।
दरअसल, ये रूबेला वायरस के कारण होता है। और अगर किसी एक व्यक्ति को खसरा हो जाता है, तो 90 प्रतिशत संभावना होती है, कि उस व्यक्ति के आसपास के लोग भी इससे संक्रमित हो जाएंगे, अगर उन्होंने खसरा का टीका नहीं लगाया है।

सर्दी-जुकाम और लाल चकत्तों के अलावा भी इससे जुड़े लक्षण है जिन्हें हमें अनदेखा नहीं करना चाहिए। यहां हम खसरा के लक्षण और इसके बचाव से जुड़ी जरूरी बातें बताएंगे।
क्या है खसरा
खसरा (रूबेओला) एक वायरल बीमारी है जो बुखार और दाने का कारण बनती है। यह अत्यधिक संक्रामक है और जब खसरा से पीड़ित व्यक्ति बात करता है, खांसता है या छींकता है तो हवा के माध्यम से फैलता है। खसरे का कोई मेडिकल ट्रीटमेंट नहीं है। खसरे के खिलाफ सबसे अच्छा बचाव खसरे का टीका लगवाना है।
खसरा के कारण और रिस्क फैक्टर (Measles reason and risk factor)
खसरा पैरामाइक्सोवायरस फैमिली के एक वायरस के कारण होता है और आमतौर पर सीधे संपर्क और हवा के माध्यम से फैलता है। जब खसरा का वायरस शरीर में प्रवेश करता है, तो यह शुरू में मैक्रोफेज और डेंड्राइटिक सेल्स के रूप में जानी जाने वाली इम्यून सेल्स को इंफेक्टेड करता है। इफेक्टेड सेल्स अपनी कॉपी बनाती हैं और लिम्फ नोड्स में चली जाती हैं, जहां वे वायरस को लिम्फोसाइटों (श्वेत रक्त कोशिकाओं के प्रकार) में स्थानांतरित करती हैं जिन्हें बी और टी सेल्स के रूप में जाना जाता है।
ये इंफेक्टेड सेल्स पूरे शरीर में घूमती हैं और वायरस के कणों को ब्लड में छोड़ती हैं। प्लीहा, लिम्फ नोड्स, यकृत, थाइमस, स्किन और फेफड़े सभी वायरस से संक्रमित हो सकते हैं। फेफड़ों के संक्रमण के कारण खांसी और छींक आती है, जो मीसल्स फैलने का मुख्य कारण है। इसका वायरस उस एयर एरिया पर दो घंटे तक जीवित रह सकता है जहां कोई संक्रमित व्यक्ति खांसा या छींका हो।
यदि आप दूषित हवा में सांस लेते हैं या किसी संक्रमित सतह को छूने के बाद अपनी आंखों, नाक या मुंह को छूते हैं तो आप खसरे से इंफेक्टेड हो सकते है। दाने निकलने के चार दिन पहले और बाद में आप वायरस को किसी और तक पहुंचा सकते हैं। केवल मनुष्य ही ये वायरस फैलाते हैं।
किन्हें खसरा होने की संभावना अधिक
पांच साल की उम्र से छोटे बच्चे, 20 साल तक के युवा, गर्भवती महिलाओं के अलावा लो इम्यूनिटी वाले लोगों में ये बीमारी होने की संभावना अधिक रहती है।
खसरा के लक्षण (Symptoms of measles)
तेज़ बुखार
खांसी
बहती नाक
लाल, पानी भरी आंखें
मुंह पर सफेद दाग
कान में इंफेक्शन
निमोनिया
दस्त
एन्सेफलाइटिस (मस्तिष्क की सूजन)
मांसपेशियों में दर्द
मीसल्स को चार चरणों में विभाजित किया जा सकता है:
इन्क्यूबेशन (Incubation) – ये पहला चरण है जिसमें व्यक्ति खसरा के वायरस के संपर्क में आता है। ये आमतौर पर मीसल्स के लक्षण शुरू होने से 10 से 14 दिन पहले का होता है।
प्रोड्रोमल (Prodromal) – इसके दूसरे चरण को प्रोड्रोमल कहते हैं। जिसमें कुछ लक्षण दिखाई देने शुरू हो जाते हैं। जैसे कि बुखार, घबराहट, खांसी, कंजंक्टिवाइटिस और सर्दी-जुकाम।
रैश (Rash) – इस तीसरे चरण में दो से चार दिन बाद मैकुलोपापुलर (चपटे और लाल) रैश दिखाई देने लगते हैं।
रिकवरी (Recovery) – इस चरण में आते-आते मरीज रिकवर होने लगता है। इस चरण में यानी रोगी आमतौर पर दाने आने के चार दिन बाद तक संक्रामक होते हैं। फिर धीरे-धीरे खसरा का असर कम होने लगता है।
मीसल्स से बचाव के तरीके - (Prevention Tips for Measles)
- जब भी बाहर जाकर घर में आए तो साबुन या हैंडवॉश से हाथ जरूर धोएं।
- बच्चे को मीसल्स का टीका जरूर लगवाएं। पहला टीका शिशु को 15 महीने तक में लगवा सकते हैं और दूसरा टीका 6 साल की उम्र तक।
- ये टीका गर्भवती महिला और बड़े भी लगवा सकते हैं, लेकिन उसे कब लगवाना है, इस बारे में डॉक्टर बेहतर बता सकते हैं।
- अगर किसी को खसरा हुआ हो, तो उससे दूरी बनाकर रखें। अगर कोई उनके संपर्क आ भी जाएं, तो तुरंत डॉक्टर से बात करें।
- ऐसी चीजों का सेवन करें जिससे इम्यूनिटी बढ़ें।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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