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रातभर जागता रहता है आपका बच्चा, ये है इनसोमनिया के लक्षण
नींद की समस्या आज सिर्फ बड़ों के साथ ही नहीं है, बल्कि बच्चे भी इससे प्रभावित होने लगे हैं। ऐसे कई बच्चे हैं जो इनसोमनिया से पीड़ित है और इसलिए उन्हें रात में अच्छी नींद लेने में समस्या होती है। जब वे रात को ठीक से नींद नहीं लेते हैं, तो इससे उन्हें दिनभर थकान का अहसास होता है। साथ ही साथ, अन्य भी कई तरह की समस्याएं शुरू हो जाती हैं। ऐसे में यह पैरेंट्स की जिम्मेदारी बनती है कि वे अपने बच्चे को एक अच्छी नींद लेने में मदद करें।
आमतौर पर, इनसोमनिया से पीड़ित होने पर पैरेंट्स बच्चों की दवाइयां शुरू कर देते हैं। जबकि अगर आप चाहें तो दवाइयों से अलग भी कुछ आसान उपाय अपना सकते हैं। ये सभी उपाय बच्चे की यकीनन मदद करेंगे। तो चलिए आज इस लेख में हम आपको ऐसे ही कुछ टिप्स के बारे में बता रहे हैं-

स्लीप हाइजीन को करें फॉलो
अधिकतर बच्चों की नींद के पैटर्न में गड़बड़ी के कारण ही उन्हें नींद की समस्या होती है। इसलिए, अगर बच्चे अपना एक रूटीन तय करते हैं और स्लीप हाइजीन को फॉलो करते हैं तो इससे उन्हें नींद की समस्या से काफी हद तक निपटने में मदद मिलती है। कोशिश करें कि आप बच्चे को एक तय समय पर ही सुलाएं व जगाएं। भले ही शुरूआत में बच्चे को नींद ना आए, लेकिन फिर भी उसे बेड पर जाने के लिए कहें। इससे धीरे-धीरे उसकी स्लीपिंग हैबिट्स डेवलप होना शुरू हो जाएंगी।
नैपिंग भी हो शामिल
एक दिन में बच्चे को हेल्दी व एक्टिव रहने के लिए पर्याप्त घंटे की नींद लेनी चाहिए। हालांकि, यह जरूरी नहीं है कि बच्चा केवल रात में ही अपनी नींद पूरी करें। इसलिए, बच्चे की नींद की दिनचर्या में नैपिंग को शामिल करें। इससे बच्चा अधिक रिलैक्स्ड व फ्रेश महसूस करेगा। हालांकि, दिन में उसे बहुत अधिक देर तक सोने ना दें।

कमरे के तापमान पर दें ध्यान
कई बार हम इस ओर ध्यान नहीं देते हैं, लेकिन कमरे का तापमान भी बच्चे की नींद को प्रभावित कर सकता है। अगर कमरा बहुत अधिक ठंडा या गर्म होगा तो इससे बच्चे को रात में सोने में समस्या होगी। इतना ही नहीं, अगर वह सो भी जाता है तब भी वह आधी रात में नींद से उठ जाएगा और फिर इस स्थिति में उसे ठीक से नींद नहीं आएगी। इसलिए कमरे के तापमान के साथ-साथ लाइटिंग व शोर आदि पहलुओं पर भी अवश्य गौर करें।
अपनाएं रिलैक्सेशन तकनीक
यह तरीका उन बच्चों के लिए बेहद कारगर है, जिन्हें रात में सोने में काफी परेशानी होती है। अगर वे बेड पर लेटने के बाद भी बस इधर-उधर करवट ही बदलते रहते हैं तो ऐसे में रिलैक्सेशन तकनीक अपनाकर आप बच्चे को अच्छी नींद लेने के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं। मसलन, सोने से पहले ध्यान और ब्रीदिंग तकनीक अपनाकर बच्चे को अधिक बेहतर नींद आ सकती है।

बेड टाइम पर नो स्क्रीन
कुछ बच्चे रात को बिस्तर पर लेटने के बाद भी मूवी या कार्टून देखते रहते हैं। ऐसे में उन्हें ठीक ढंग से नींद नहीं आती है। स्क्रीन टाइम उनके दिमाग को उत्साहित रख सकता है, जिससे उनके लिए आराम करना मुश्किल हो जाता है। इसलिए यह सुनिश्चित करें कि सोने से कम से कम एक घंटे पहले बच्चे स्क्रीन से दूरी बना लें।
दवाओं का सहारा
आमतौर पर बच्चों को अच्छी नींद के लिए दवाएं ना लेने की ही सलाह दी जाती है, क्योंकि अधिकांश दवाओं के दुष्प्रभाव होते हैं। लेकिन अगर किसी भी उपाय से आराम ना मिले तो इस स्थिति में अंतिम उपचार के रूप में दवाओं की मदद ली जा सकती हैं। हालांकि, बच्चे को किसी भी तरह की दवा हमेशा डॉक्टर के परामर्श के बाद ही दें। आपको कभी भी किसी बच्चे को ओवर-द-काउंटर नींद की दवाइयां नहीं देनी चाहिए। इससे बच्चों को काफी नुकसान पहुंच सकता है।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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