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Uttarakhand Tunnel Crash: 41 श्रमिकों के जान के साथ सेहत पर भी मंडरा रहा खतरा, हो सकती हैं ये खतरनाक बीमारियां
Uttarakhand Tunnel Crash: जमीन धंसकने की वजह से उत्तरकाशी के सिलक्यारा सुरंग में 8 दिन यानी 200 घंटे से 40 मजदूरों फंसे हुए हैं। जिन्हें निकालने की कोशिश जारी है। हादसे की जगह पर एसडीआरएफ, आईटीबीपी और फायर टीमें मौजूद हैं। ताकि जरूरत के मुताबिक फटाफट इंतजाम हो सकें। हालांकि टनल के ऊपरी हिस्से से मलबा आ रहा है, जिसकी वजह से मजदूरों को निकालने में दिक्कत हो रही है।

अब भीतर फंसे लोग सिरदर्द और उल्टियों की शिकायत कर रहे हैं। ये तब होता है, जब शरीर में ऑक्सीजन या पोषण घटने लगे। उम्मीद जताई जा रही है कि सभी मजदूरों को जिंदा निकाल लिया जाए। हालांकि स्थिति को देखते हुए बचाव कार्यों में कम से कम दो दिन और लगने की उम्मीद जताई जा रही है। इसी बीच चलिए जानते हैं कि इतने दिन तक मलबे में फंसे रहने की वजह से इन 41 लोगों की सेहत के ऊपर किन-किन बीमारियों का खतरा मंडरा रहा है?
हाइपोक्सिया है बड़ा खतरा
हेल्थ एक्सपर्ट की मानें तो फिलहाल तो सबसे बड़ी चिंता यह है कि सुरंग में ऑक्सीजन की कमी के कारण श्रमिक गंभीर श्वसन समस्याओं, सांस लेने की समस्याओं और हाइपोक्सिया से पीड़ित हो सकते हैं। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (एनआईएच) के अनुसार, हाइपोक्सिया एक ऐसी स्थिति है जिसमें बदलती बाहरी स्थितियों के कारण शरीर को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन नहीं मिल पाता है।

सांस संबंधी हो सकती है समस्याएं
8 दिन से फंसे इन श्रमिकों को नाइट्रिक ऑक्साइड जैसी गैसों और सिलिका जैसे रसायनों के संपर्क में आने के कारण पहले से ही इन पर श्वसन संबंधी समस्याओं का खतरा मंडरा रहा है। लेकिन लंबे समय तक धूल और मलबे के संपर्क में रहने के कारण, अब उन्हें सांस फूलना, ब्रोंकाइटिस, खांसी, अस्थमा जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। जिसका दीर्घकालिक प्रभाव भी देखने को मिल सकता है।
अनियमित मलत्याग भी बड़ी समस्या
एक्सपर्ट के अनुसार एक और चिंता यह है कि ये लोग कुपोषण और कब्ज से पीड़ित हो सकते हैं क्योंकि उनकी आहार संबंधी आवश्यकताएं पूरी नहीं हो पा रही होगी।
लेकिन बड़ी समस्या यह भी है कि चूंकि उनके पास शौच या पेशाब करने के लिए कोई जगह नहीं होगी, इससे उनके स्वास्थ्य पर काफी असर पड़ सकता है,
हालांकि टाइम्स ऑफ इंडिया को उत्तरकाशी के मुख्य चिकित्सा अधिकारी आरसीएस पंवार ने बताया था कि " अनुरोध के अनुसार हमने पहले ही कब्ज और सिरदर्द के लिए दवाईयां और विटामिन सी की आपूर्ति कर दी है।"
यूटीआई होने की समस्या
लंबे समय तक पेशाब रोकने से न केवल मूत्र पथ संक्रमण (यूटीआई) हो सकता है, बल्कि दर्द, मूत्राशय में खिंचाव और भी बहुत सी समस्याएं हो सकती है।डॉक्टर ने कहा कि अगर कोई नियमित रूप से मल त्याग नहीं करता है तो मलाशय में सूजी हुई नसें, और पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियों को नुकसान जैसी जटिलताएं बढ़ सकती हैं।
क्लॉस्ट्रोफोबिया की बैठ सकता है डर
क्लॉस्ट्रोफोबिया यानी जब व्यक्ति किसी छोटी जगह जैसी लिफ्ट, कमरा या टनल में घंटों के लिए बंद हो जाता है तो अक्सर बंद जगहों में जाने पर बेचैनी वाली घबराहट महसूस होने लगती है और बंद और छोटी जगहों से डर लगता है। इसकी वजह से व्यक्ति लिफ्ट में, टनल (tunnel) में या किसी भी बंद कमरे में जानें से घबराता है। घबराहट बढ़ने सेव्यक्ति को पैनिक अटैक आने लगते हैं।
कहां तक पहुंचा रेस्क्यू ऑपरेशन
उत्तरकाशी जिला आपातकालीन नियंत्रण कक्ष से शनिवार सुबह मिली जानकारी के अनुसार, फिलहाल सुरंग में ड्रिलिंग का काम रुका हुआ है। बीबीसी की एक रिपोर्ट की मानें तो इन मजदूरों को निकालने के लिए दिल्ली से लाई गई ऑगर मशीन ने शुक्रवार (17 नवंबर ) शाम से काम करना बंद कर दिया है। इंदौर से एक नई मशीन लाई गई है। अब हॉरिजेंटल यानी सामने से ड्रिलिंग के बजाय वर्टिकल यानी ऊपर से छेद किया जा रहा है ताकि मलबे को आसानी से हटाया जा सके।
रविवार तक टनल के अंदर 70 मीटर में फैले मलबे में 24 मीटर छेद किया जा चुका है। हालांकि यह आधा भी नहीं है इसलिए दावा किया जा रहा है कि अभी भी कम से कम 4-5 दिनों का समय मजदूरों को बाहर निकालने के लिए लग सकता है।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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