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दिल्ली में आज से एक बार फिर शुरू हुआ खसरा-रूबेला वैक्सीनेशन अभियान, जानिए इसके लक्षण और इलाज

रूबेला एक वायरल संक्रमण रोग होता है, जिसमें लोगों को आमतौर पर हल्की बीमारी के लक्षण होते हैं। इसमे बुखार, गले में खराश और चेहरे पर शुरू होने वाले दाने शामिल हैं जो शरीर के सभी हिस्सों में फैल सकते हैं। रूबेला वायरस प्रेग्नेंट महिलाओं में मिसकेरेज की समस्या या बच्चों में गंभीर जन्म दोष पैदा कर सकता है। ऐसे में रूबेला के खिलाफ सबसे अच्छा बचाव MR वैक्सीन है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन ( WHO ) के मुताबिक, खसरा और रूबेला वायरस दुनिया के सबसे संक्रामक ह्यूमन वायरस में से एक है जो हर साल एक लाख से ज्यादा बच्चों की जान ले लेता है। खसरा और रूबेला दोनों वायरस को एक सुरक्षित और प्रभावी वैक्सीन के दो डोज से रोका जा सकता है। WHO के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले दो दशकों में, खसरे के टीके से वैश्विक स्तर पर 30 मिलियन से ज्यादा मौतों को टालने का अनुमान है।
खसरा-रूबेला वैक्सीनेशन अभियान की शुरुआत ?
साल 2023 की शुरुआत होते ही भारत के लिए एक महत्वपूर्ण लक्ष्य भी आया। भारत ने 2023 तक खसरा और रूबेला को खत्म करने का लक्ष्य रखा था, जो कोरोना संक्रमण के कारण 2020 की पहले की समय सीमा में चूक गया था। इससे पहले 2015 के लिए निर्धारित लक्ष्य भी चूक गया था। जिसके बाद साल 2019 में भारत ने 2020 इस लक्ष्य तक न पहुंच पाने के अनुमान के बाद 2023 तक खसरा और रूबेला वैक्सीन के लक्ष्य को पूरा करने का निर्णय लिया।
जनवरी 2019 में दिल्ली हाई कोर्ट के स्टे ऑर्डर और मार्च 2020 में कोरोना महामारी से प्रभावित होने के बाद, खसरा-रूबेला वैक्सीनेशन अभियान आज से दिल्ली में फिर से 5 साल तक के बच्चों के लिए शुरू हो रहा है। दिल्ली सरकार का परिवार कल्याण निदेशालय 6 हफ्ते तक यह विशेष अभियान चलाएगा। जिसके लिए परिवार कल्याण निदेशालय ने अपनी तैयारी पूरी कर ली है। निर्देशालय से जारी जानकारी के मुताबिक पांच साल तक के 10 लाख से ज्यादा बच्चों को MR वैक्सीन की तीसरी डोज लगाई जाएगी जो दिल्ली की सभी डिस्पेंसरियों और सरकारी अस्पतालों के साथ करीब 600 स्थायी वैक्सीनेशन सेंटर्स पर लगाए जाएंगे।
खसरा और रूबेला के संकेत और लक्षण
बच्चों में, रूबेला आमतौर पर हल्का होता है, जिसमें कुछ ध्यान देने वाले लक्षण होते हैं। बच्चों के शरीर पर आमतौर पर लाल चकत्ते पहला संकेत होते हैं। ये दाने आमतौर पर पहले चेहरे पर दिखाई देते हैं और फिर शरीर के बाकी हिस्सों में धीरे-धीरे फैल जाते हैं, और लगभग तीन दिनों तक रहते हैं। लेकिन दाने दिखने के 1 से 5 दिन पहले आपको ये लक्षण दिखाई दे सकते हैं-
1. हल्का बुखार
2. सिर दर्द
3. आंखें लाल होना
4. बेचैनी होना
5. खांसी
6. बहती नाक
बड़ों में आमतौर पर हल्की बीमारी नजर आती है, जिसमें हल्का बुखार, गले में खराश और दाने होते हैं जो चेहरे से शुरू होकर शरीर के बाकी हिस्सों में फैल जाते हैं। कुछ बड़ों को शरीर के ये दाने दिखने से पहले सिरदर्द, लाल आंख और बेचैनी की समस्या हो सकती है।
रूबेला से पीड़ित 70% महिलाओं को गठिया का अनुभव हो सकता है। रूबेला ब्लीडिंग की समस्याओं सहित गंभीर समस्याएं पैदा कर सकता है। रूबेला वायरस से सबसे ज्यादा समस्या प्रेग्नेंस महिला के गर्भ में पल रहे बच्चे को हो सकता है। कई प्रेग्नेंट महिलाओं का रूबेला वायरस से संक्रमित होने के कारण मिसकैरेज भी हो सकता है, या उसका बच्चा जन्म के तुरंत बाद मर सकता है।
खसरा और रूबेला का इलाज
रूबेला और खसरा से निपटने के लिए वैक्सीनेशन की मदद ली जा रही है। लेकिन सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के अनुसार इसका इलाज करने या इस बीमारी से जल्दी लड़ने के लिए कोई खास दवा नहीं है। कई मामलों में लक्षण हल्के होते हैं। ऐसे में हल्के लक्षणों को आराम करके और बुखार की दवाओं को खाकर ही ठीक किया जा सकता है। लेकिन अगर आप अपने लक्षणों या बच्चे के लक्षणों को लेकर परेशान हैं तो अपने निजी डॉक्टर से संपर्क जरूर करें।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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