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कैंसर का पता कई सालों तक नहीं चल पाता

फिलहाल कैंसर का पता लगाने के लिए की जाने वाली रक्तजांच में कैंसर कोशिकाओं द्वारा खून में छोड़े गए पदार्थ की मात्रा का उपयोग किया जाता है। अमेरिका की स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर संजीव गंभीर की नेतृत्व में हुए नए अनुसंधान के परिणाम में यह बात सामने आयी है कि कैंसर कोशिकाओं को ट्यूमर के रूप में विकसित होने और रक्त में परीक्षण में आने लायक विशेष पदार्थ छोड़ने में सालों लग सकते हैं।
कई बार तो इसमें एक दशक से भी ज्यादा का समय लग जाता है। डेली टेलीग्राफ की खबर के मुताबिक, ट्यूमर कोशिकाओं द्वारा रक्त में छोड़े गए पदार्थ का निर्माण स्वस्थ मानव शरीर में भी होता है और इसकी मात्रा जांच में आने लायक होने में सालों गुजर जाते हैं। अनुसंधानकर्ताओं का कहना है कि कैंसर की जांच के लिए और बेहतर तकनीक विकसित करने की जरूरत है।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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