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सावधान रहें 'साइलेंट किलर' ले सकता है आपकी जान
लखनऊ। उच्च रक्तचाप जो कई बीमारियों की जड़ है उसके प्रति लोगों में जारूकता की कमीं है। स्वस्थ्य जीवन शैली, स्वस्थ्य रक्तचाप पर सीधे असर डालती है। रक्तचाप को नियंत्रित करने के लिए जरूरी है कि शरीर का वजन कम हो। शरीर का वजन बढऩे से उच्च रक्तचाप(साइलेंट किलर) की समस्या हो जाती है जो जानलेवा भी हो सकती है। बचने के लिए जरूरी है कि व्यक्ति स्वस्थ्य भोजन यापन व सक्रिय जीवन जीए।

अध्ययन में यह बात सामने आयी है कि हाइपरटेंशन से प्रति वर्ष करीब डेढ़ अरब लोगों की जान चली जाती है। उसका प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। चिकित्सकों के अनुसार इसे साधारण भाषा में उच्च रक्तचाप कहा जा सकता है जबकि मेडिकल शब्दावली में इसे साइलेंट किलर भी कहते हैं। हाइपरटेंशन की गिरफ्त में आने पर रोगी की धमनियों में रक्तसंचार तेजी से होने लगता है जिससे शरीर के कई अंगों पर विपरीत प्रभाव पड़ता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के सर्वे की रिपोर्ट में यह तथ्य सामने आया है कि यह मृत्यु का एक बड़ा कारण बनकर सामने आ रहा है। विश्व में करोड़ों लोग इस समस्या से पीडि़त हैं। कुल रोगियों में से 57 प्रतिशत लोगों को इस रोग की जानकारी होती है जिसमें से 40 प्रतिशत को इसके इलाज की जानकारी होती है जबकि मात्र 25 प्रतिशत ही ऐसे होते हैं जो नियमित रूप से इसका इलाज कराते हैं। इससे बचने के लिए हमें नियमित तौर पर रक्तचाप की जांच करनी चाहिए। साथ ही लंबे समय तक रक्तचाप बढ़ा रहने पर चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।
साइलेंट किलर से बचने के उपाय
वजन पर नियंत्रण- तेजी से बढ़ते हुए संसार में मोटे और अधिक वजन वाले लोगों की संख्या बढ़ती जा रही है। वजन बढऩा सीधे हाइपरटेंशन को बढ़ावा देना है। (बॉडी मास इन्डेक्स) एक अच्छा तरीका है, जिससे आप समय-समय पर अपने शरीर का वजन अथवा बॉडी मास इन्डेक्स की देखरेख कर सकते हैं।
स्वस्थ्य भोजन- हमें भोजन में फल व हरी सब्जियों का अधिक सेवन करना चाहिए। भोजन में नमक की मात्रा कम रखनी चाहिए। साथ ही अल्कोहल व तम्बाकू के सेवन से बचना चाहिए।
सक्रिय जीवन- हमारा शरीर क्रियाशील है। लिहाजा हमें अधिकतर समय चलते-फिरते या शारीरिक श्रम करते रहना चाहिए। रोजाना 10 मिनट, दो बारव्यायाम करना स्वाथ्य के लिए लाभकारी रहता है।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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