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क्या वॉकिंग से आपके पैर मजबूत होते हैं?
अपने पैरों को शेप में लाने और उन्हें मजबूत बनाने का वॉकिंग एक बेहतरीन जरिया है। पर यह आपको नियमित रूप से करना होगा। हफ्ते में 5-6 दिन सामन्य से तेज वॉकिंग और फिर उसके बाद रिलैक्सिंग वॉक करने से कैरोली बर्न होती है और पैरों के मसल्स मजबूत होते हैं। रनिंग की अपेक्षा विशेषज्ञ पुरुषों को वॉकिंग की सलाह देते हैं, क्योंकि रनिंग में इंजुरी और हड्डी से जुड़ी समस्याओं का खतरा ज्यादा होता है। वॉकिंग ब्लड सर्कुलेशन को बढ़ा कर मसल्स को बेहतर बनाता है और बॉडी को रीलैक्स करता है। इससे पिंडली और जांघों पर जमे फैट भी बर्न होते हैं। इसके अलावा वॉकिंग से मसल्स में लचीलापन भी आता है और समय के साथ-साथ यह मजबूत भी होता है।
भले ही हम में से ज्यादातर लोग दिन में बहुत ज्यादा चलते हों, फिर भी रिसर्च से यह बात सामने आई है कि हम जरूरत से कम ही वॉक करते हैं। इसलिए जरूरी है कि हम वॉकिंग के लिए दिन में कुछ समय निकालें। यह बेहद आसान भी है और हमारे शरीर के लिए एक्सरसाइज का प्राकृतिक रूप भी है। यह सुरक्षित होने के साथ-साथ सरल भी है और ज्यादातर लोगों को पता होता है कि इसे कैसे किया जाता है। साथ ही इससे शरीर को बड़ी संख्या में लाभ पहुंचता है। हम नियमित वॉकिंग करके अपने दिल और फेफड़ों की सेहत को भी सुधार सकते हैं। एक औसत दर्जे के युवा को नियमित रूप से हर दिन 30 मिनट वॉकिंग करनी चाहिए।

1. स्ट्रेचिंग
सुबह में वॉकिंग से हमें जो लाभ मिलता है उसके बारे में आप सोच भी नहीं सकते हैं। इससे तंग और ठंडे पड़े मसल्स में खिंचाव आता है। साथ ही ऑक्सीजन अंदर जाने से मसल्स पिछले दिन की स्थिति में वापस आ जाता है। वॉक करने से मसल्स रीलैक्स और तरोताजा होते हैं। वॉकिंग के दौरान जो प्रोटीन बर्न होता है उससे पैरों के मसल्स मजबूत होते हैं।

2. ज्यादा ऑक्सीजन
जब आप नियमित वॉकिंग के लिए सुबह उठते हैं तो शरीर को ज्यादा मात्रा में ऑक्सीजन की जरूरत होती है। इससे जम्हाई ज्यादा आती है। वॉकिंग शुरू करने के बाद पूरे शरीर में ऑक्सीजन का संचार होता है। वॉकिंग में सबसे ज्यादा जोर पैरों पर पड़ता है, इसलिए शरीर पैरों के हिस्से में ज्यादा ऑक्सीजन भेजता है, जिससे यह मजबूत बनता है।

3. टोनिंग
नियमित वॉकिंग से मसल्स के आसपास फैट जमा नहीं होता है। जब हम अपने पैरों और पिंडलियों के आसपास जमा बड़ी मात्रा में फैट को कम करते हैं तो ढीले मसल्स मजबूत होते हैं। इससे पूरे पैर पर साकारात्मक असर पड़ता है।

4. सुरक्षित
रनिंग में इंजुरी का खतरा रहता है और इसे हर उम्र के लोगों के लिए करना मुश्किल हो जाता है। वहीं वॉकिंग को फिजिकल एक्सरसाइज के रूप में हर उम्र के लोग कर सकते हैं। इसे शरीर और हड्डियों पर ज्यादा जोर नहीं पड़ता है। यहां तक कि तेज वॉकिंग से भी घटने और टखने पर ज्यादा दबाव नहीं बनता है। साथ ही इससे शरीर को होने वाले लाभ का असर लंबे समय तक रहा है। वॉकिंग से इंजुरी की संभावना काफी कम होती है। इसमें सबसे ज्यादा जोर टखने पर पड़ता है और यदा-कदा क्रैंप से जूझना पड़ता है।

5. मसक्यूलर स्ट्रेंथ
वॉकिंग से आप मसक्यूलर स्ट्रेंथ हासिल कर सकते हैं। हालांकि इससे पूरे शरीर का फिटनेस हासिल नहीं किया जा सकता है। वॉकिंग से पैर का पिछला हिस्सा, पिंडली, घुटने के पीछे की नस और ग्लूटस पर असर पड़ता है। अगर आप अपने हाथ को स्विंग करेंगे तो इससे कंधे के पिछले हिस्से के मसल्स पर असर पड़ेगा। वॉकिंग एक लो-इंपैक्ट एक्सरसाइज है जो हड्डी और टिशू पर कम दबाव डालता है।



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