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जानिए, आयुर्वेद के अनुसार सोकर उठने का सही तरीका क्या है?
आयुर्वेद के अनुसार, एक साधारण सी दिनचर्या की सहायता से अपनी प्रतिरोधक शक्ति में सुधार कर सकते हैं और दिनभर तरोताज़ा रहने के लिए अपने शरीर के दोष को भी संतुलित कर सकते हैं।
उतनी ही नींद ठीक है जो आपको पूरे दिन सक्रिय रखे, आपको शायद अपने जागने का तरीका बदलने की जरूरत है। काम के लिए देर हो गयी-इस डर के साथ अगर आप अपने बिस्तर से लापरवाही से उठते हैं तो आप पूरा दिन केवल तनाव में रहेंगे। इसकी बजाय, उठने के बाद कुछ समय आराम करें।
उतनी ही नींद ठीक है जो आपको पूरे दिन सक्रिय रखे, आपको शायद अपने जागने का तरीका बदलने की जरूरत है। काम के लिए देर हो गयी-इस डर के साथ अगर आप अपने बिस्तर से लापरवाही से उठते हैं तो आप पूरा दिन केवल तनाव में रहेंगे। इसकी बजाय, उठने के बाद कुछ समय आराम करें।
आयुर्वेद के अनुसार, एक साधारण सी दिनचर्या की सहायता से, आप अपने शरीर और मन को साफ कर सकते हैं, अपनी प्रतिरोधक शक्ति में सुधार कर सकते हैं और दिनभर तरोताज़ा रहने के लिए अपने शरीर के दोष को भी संतुलित कर सकते हैं। आइए जानते हैं कि सुबह अपने बिस्तर से उठने का सही तरीका क्या होता हैं?
आयुर्वेद के अनुसार, आपको सूर्योदय से पहले जागना चाहिए ताकि आपका शरीर सूरज की ताल के साथ तालमेल बिठा सके। यह वह समय है जब पर्यावरण शुद्ध और शांत होता है, और मन नींद के बाद ताज़ा होता है। दिन के शुरुआती घंटों में उठना महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दिन के बाकी हिस्सों की लय सेट करता है।

स्टेप 1:
जब आप जागने के बाद उठना चाहें, तो पहले अपनी दाहिनी ओर मुड़ें और फिर उठकर बैठ जाएं। जब आप सो रहे होते हैं, तो आपका शरीर आराम की मुद्रा में होता है, और आपकी मेटाबॉलिक गतिविधि भी धीमी होती है। अगर आप अचानक से बायीं करवट लेकर उठते हैं, तो आपके कार्डियाक सिस्टम पर बहुत दबाव बन सकता है।

स्टेप 2:
जागने के बाद अपने बिस्तर पर आराम से बैठें और आसानी से उठें। फिर अपनी हाथेलियों को एक-दूसरे से रगड़ें और अपनी आंखों पर अपनी हथेलियां रखें। अपनी हथेलियों को आपस में रगड़कर आप अपने पूरे तंत्रिका अंत को सक्रिय कर देंगे, और आप तुरंत जागृत महसूस करेंगे। फिर धीरे-धीरे हथेलियों को ऊपर ले जाएं और अपने माथे और कंधे को कवर करें।

स्टेप 3:
अब जांचें कि आपकी नाक की किस तरफ से आपकी सांसे अधिक दृढ़ता से बह रही है। जहां आपको लगता है कि सांस का प्रवाह मज़बूत है उस तरफ की हथेली को चूमें, और फिर दूसरी तरफ की हथेली चूमें। चुंबन से ऊर्जा प्रदान होती है।

स्टेप 4:
फिर बिस्तर से बाहर निकलें और जिस तरफ की सांस मज़बूत हो, उस तरफ ज़मीन को पहले पैर से छूएं।



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