कहीं स्‍कूल में आपका बच्‍चा या ऑफिस में आपके पार्टनर इमोशनल अब्‍यूज का शिकार तो नहीं हैं?

Posted By: Staff
Subscribe to Boldsky

अपने रुतबे और पॉवर का इस्तेमाल करते हुए किसी को भी मानसिक रूप से प्रताड़ित करना आज कल की लाइफस्टाइल की बहुत ही गंभीर समस्या है। ऑफिस हो या घर कुछ लोग हर जगह इमोशनल एब्यूज के शिकार हो जाते हैं। इमोशनल एब्यूज का असर कई बार फिजिकल एब्यूज से भी ज्यादा गहरा होता है। इससे पीड़ित व्यक्ति इस हद तक अंदर से टूट जाता है जिससे पूरी तरह उबर पाने में उसे बहुत वक़्त लगता है। अगर पीड़ित व्यक्ति सिर्फ छोटे समयाविधि में इस दौर से गुज़रता है तो उसके ठीक होने की संभावना बची रहती है लेकिन जो लम्बे समय तक इससे पीड़ित रहता है उसकी मुश्किलें काफी बढ़ जाती हैं।

शार्ट टर्म रिस्पांस: इमोशनल एब्यूज कई रूपों में हो सकता है और इसका असर भी उसी अनुसार होता है। किसी की सरेआम बेइज्जती कर देने से या सबके सामने डांट देने से भी कुछ लोग इतने आहत हो जाते हैं कि वे मानसिक रोग की चपेट में आ जाते हैं।

आइये यहां जानते हैं कि इमोशनल एब्यूज के शिकार व्यक्ति के व्यवहार में कैसे बदलाव आते हैं।

1-कनफ्यूजन :

1-कनफ्यूजन :

बच्चे हो या बड़े कोई भी जब इमोशनल एब्यूज का शिकार होता है तो वे समझ नहीं पाते कि इस सिचुएशन में कैसे रियेक्ट करें और इस स्थिति का ठीक से सामना नहीं कर पाते हैं। अधिकतर मामलों में वे खुद को ऐसा समझाते हैं कि जैसे उनके साथ ऐसा कुछ बुरा हुआ ही नहीं है और सब कुछ जल्दी ठीक हो जायेगा।

2- डर और गिल्ट:

2- डर और गिल्ट:

अधिकांश मामलों में इमोशनल एब्यूज से पीड़ित व्यक्ति इस सिचुएशन के लिए खुद को ही दोषी मानता है। ऐसी स्थिति में पीड़ित व्यक्ति को हमेशा पीड़ित करने वाले इंसान से डर लगा हुआ रहता है। खुद को दोषी समझने के कारण वे हमेशा गिल्ट के साथ जीते हैं जिससे उनके मानसिक स्तर पर बुरा असर पड़ता है।

3- तेज गुस्सा:

3- तेज गुस्सा:

इमोशनल एब्यूज के शिकार होने वाले लोग तेज गुस्सा दिखाने लगते हैं और जिसने उन्हें परेशान किया है उसको अकेले में गाली देने लगते हैं। कई पीड़ित व्यक्तियों में यह नेचर देखा गया है कि वे पीड़ित करने वाले व्यक्ति की हर बात में नेगेटिव एंगल खोजने लगते हैं और सबसे उसकी बुराई करते चलते हैं। ऐसे लोग अकेले में रोने भी लगते हैं।

4- आत्मविश्वास में कमी :

4- आत्मविश्वास में कमी :

इन सब चीजों के कारण उनका आत्म विश्वास पूरी तरह खत्म हो जाता है और वे खुद को किसी काम के लायक नहीं समझते हैं। कुछ ही दिनों में वे पूरी तरह नकारात्मक विचारों से भर जाते हैं। ऐसी हालत में वे किसी से आंख मिलाने से कतराने लगते हैं और हमेशा खुद को लाचार महसूस करते हैं।

ऐसे मामलों में बच्चे बड़ो की तुलना में ज्यादा उत्सुक रहते हैं और वे ये जाने की कोशिश करते हैं कि उनके आस पास क्या चल रहा है। बच्चे आस पास की किसी भी चीज को लेकर पूरी तरह कॉंफिडेंट नहीं रहते हैं।

लॉन्ग टर्म इफ़ेक्ट:

लॉन्ग टर्म इफ़ेक्ट:

जो बच्चे लगातार बचपन से ही इमोशनल एब्यूज के शिकार होते रहते हैं उसका उन पर इतना गहरा असर पड़ता है कि वे पूरी जिंदगी इससे उबर नहीं पाते हैं। वही बड़ी उम्र वाले लोग इस सदमे को झेल तो लेते हैं लेकिन फिर भी उसके व्यवहार में कई बदलाव नज़र देते हैं।

हम यहां बच्चों और बड़ों में होने वाले बदलावों के बारे में बता रहे हैं।

1- डिप्रेशन :

1- डिप्रेशन :

जो लोग बहुत लम्बे समय तक भावनात्मक रूप से शोषित रहते हैं वे खुद इतने अकेले पड़ जाते हैं कि किसी भी ज़रूरत या मदद के लिए भी कभी किसी के पास नहीं जाते हैं। उनका ये रवैया उन्हें समाज से पूरी तरह अलग कर देता है जिससे आगे चलकर वे क्लिनिकल डिप्रेशन के शिकार हो जाते हैं। समय के साथ साथ उनकी स्थिति और बदतर होती चली जाती है।

बच्चे इस बीमारी की सबसे ज्यादा चपेट में आते हैं क्योंकि उनका पूरा बचपन और किशोरावस्था इसी दवाब को झेलते हुए बीता है। इसलिए वे अपने आगे की लाइफ में भी किसी के साथ खुश नहीं रह पाते हैं।

2- गुस्सा:

2- गुस्सा:

कई बार जब आपको परेशान करने वाला शख्स आपकी आंखों के सामने होता है लेकिन आप उसका कुछ भी बिगाड़ नहीं पाते हैं तो ऐसी स्थिति में आप अपना गुस्सा किसी और पर निकालने लगते हैं। यह इमोशनली एब्यूज लोगों के व्यवहार का सबसे प्रमुख लक्षण है। ऐसी स्थिति में बच्चे स्कूल में अपने दोस्तों के साथ लड़ाई करने लगते हैं और व्यस्क लोग ऑफिस में अपने दोस्तों पर या घर में अपनी वाइफ और पेरेंट्स पर गुस्सा निकालने लगते हैं। हालांकि इस स्थिति में भी वे अंदर से डरे हुए होते हैं।

3- स्लीप डिसऑर्डर:

3- स्लीप डिसऑर्डर:

रोजाना अपने बॉस से या किसी और के द्वारा पीड़ित होने पर आपकी मनस्थिति इतनी बिगड़ जाती है कि जब आप सोने जाते हैं तो आपको ठीक से नींद भी नहीं आती है। बच्चे और व्यस्क दोनों ही अनिद्रा जैसी गंभीर बीमरियों के शिकार होने लगते हैं।

4- एब्यूजर की तरफ झुकाव:

4- एब्यूजर की तरफ झुकाव:

कुछ मामलों में पीड़ित व्यक्ति बिना किसी ख़ास वजह के ही पीड़ित करने वाले के प्रति ही लगाव महसूस करने लगता है और उसकी तरफदारी करने लगता है। यह सबसे खतरनाक स्थिति है क्योंकि ऐसी स्थिति में किसी तीसरे व्यक्ति को यह समझ में नहीं आता है कि पीड़ित को कैसे इस सिचुएशन से बाहर निकला जाए। बच्चे खासतौर पर इस समस्या के शिकार हो जाते हैं क्योंकि वे लगातार इस उम्मीद में रहते हैं कि सामने वाला कभी उनके प्रति सकरात्मक झुकाव दिखाएगा लेकिन अफ़सोस कि कई मामलों में ऐसा कुछ होता नहीं है।

5- खुद को नुकसान पहुंचाना:

5- खुद को नुकसान पहुंचाना:

जो लोग बहुत लम्बे समय से इमोशनल एब्यूज से पीड़ित रहते हैं वे इस हद तक मानसिक रूप से प्रताड़ित हो जाते हैं कि वे खुद को ही नुकसान पहुंचाने लगते हैं। वयस्कों के व्यवहार में गुस्से में खुद को चोट पहुंचाना और आत्महत्या की कोशिश करना आम बात हो जाती हैं वहीँ छोटे बच्चे भी गुस्से में खुद को नुकसान पहुंचाने लगते हैं।

6- नशे की लत:

6- नशे की लत:

कई दिनों तक इस तरह परेशान रहने के बाद विक्टिम अपनी जिंदगी में खुश होने के दूसरे तरीके खोज लेता है। ऐसी स्थिति में अधिकतर लोग शराब, ड्रग्स और कई बुरी आदतों को अपनाने लगते हैं और उसी में खुद को व्यस्त रखते हैं। वहीँ बच्चे कम उम्र में ही स्मोकिंग और अल्कोहल का सेवन करना शुरू कर देते हैं।

7- किसी पर भरोसा नहीं:

7- किसी पर भरोसा नहीं:

बार बार किसी अन्य द्वारा प्रताड़ित करने के बाद आदमी इस स्थिति में पहुंच जाता है कि उसे पूरे समाज से ही भरोसा उठ जाता है। ऐसे लोग फिर ना तो अपने घर वालों की किसी बात का यकीन करते हैं ना ही बाहर किसी दोस्तों की बातों पर। उन्हें हमेशा ऐसा लगता है कि सामने वाला मदद करने की बजाय उनका कुछ नुकसान करना चाहता है। यही रवैया बच्चे भी अपनाने लगते हैं और वे भी किसी की बात नहीं मानते ना ही भरोसा करते हैं।

8- स्कूल ऑफिस में खराब परफॉरमेंस :

8- स्कूल ऑफिस में खराब परफॉरमेंस :

इमोशनल एब्यूज से पीड़ित व्यक्ति ना तो घर में खुश रहता है ना ही ऑफिस में और इसका सीधा असर उसकी प्रोफेशनल लाइफ पर पड़ता है। बच्चे अपनी पढ़ाई पर ध्यान नहीं देते हैं और ज्यादा टाइम इधर उधर गलत आदतों में बिता देते हैं जिससे उनका रिजल्ट खराब होने लगता है। हालांकि उन बच्चों में यह क्षमता होती है कि वे कुछ अच्छा कर सकें लेकिन मानसिक स्थिति के कारण वे ऐसा कुछ नहीं कर पाते हैं।

9- खानपान में बदलाव:

9- खानपान में बदलाव:

किसी भी काम में मन न लग पाने और हमेशा परेशान रहने का असर पीड़ित व्यक्ति के खानपान पर भी पड़ता है। इमोशनल एब्यूज से पीड़ित बच्चे और व्यस्क दोनों ही ना तो टाइम पर खाना खाते हैं ना ही अपने खाने की चीजों पर ठीक से ध्यान देते हैं। उनकी यह गलत आदत धीरे धीरे उन्हें कई बीमारियों का शिकार बना देता है।

शोषण किसी भी तरह का हो वो गलत ही है इसलिए आप जब भी अपने आस पास किसी ऐसे शख्स को देखें जिसे कोई लगातार परेशान कर रहा है या उसका शोषण कर रहा है तो उसकी मदद ज़रूर करें। खासतौर पर जो बच्चे इस समस्या से पीड़ित हों उनकी मदद ज़रूर करें और उसको इस खराब सिचुएशन से जितनी जल्दी हो सके बाहर लायें।

English summary

Short-Term And Long-Term Effects Of Emotional Abuse

Emotional abuse is far worse than physical abuse as the impact lasts much longer. Torturing a person this way breaks them from inside out and sometimes beyond repair.
Please Wait while comments are loading...