Latest Updates
-
Putrada Ekadashi Vrat Katha: पुत्रदा एकादशी पर जरूर करें इस व्रत कथा का पाठ, पूरी होगी संतान से जुड़ी हर कामना -
Putrada Ekadashi 2026 Wishes: विष्णु जी की भक्ति...इन संदेशों से अपनों को दें पुत्रदा एकादशी की शुभकामनाएं -
Putrada Ekadashi 2026: 23 या 24 अगस्त, कब है पुत्रदा एकादशी? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि -
कौन हैं क्रिकेटर मेधावी बिधूड़ी? ‘6-7’ सेलिब्रेशन के बाद इंटरनेट पर हुईं वायरल, खूबसूरती के दीवाने हुए फैंस -
दिल्ली में तेजी से बढ़ रहे स्वाइन फ्लू के मामले, जानें बच्चों में H1N1 के लक्षण और बचाव के उपाय -
53 की उम्र में दूल्हा बने अर्जुन रामपाल, गोवा में 14 साल छोटी गर्लफ्रेंड गैब्रिएला संग रचाई शादी -
IND vs SL 2nd Test: कोलंबो में सीरीज जीत की दहलीज पर भारत, बारिश और पिच का क्या है हाल? -
Varalakshmi Vrat Katha: वरलक्ष्मी व्रत के दिन जरूर पढ़ें ये व्रत कथा, धन से जुड़ी बाधाएं होंगी दूर -
Varalakshmi Vrat 2026 Wishes: मां लक्ष्मी का आशीर्वाद...वरलक्ष्मी व्रत पर प्रियजनों को भेजें ये शुभकामना संदेश -
Rakhi Gift Ideas For Sister: इस रक्षाबंधन बहन को दें ये 7 प्यार भरे तोहफे, देखते ही खुशी से झूम उठेगी
रेडिएशन से ज्यादा खतरनाक है मोटापा और धूम्रपान- स्टडी
बदलती जीवनशैली से मानव आबादी के रेडिएशन (विकिरण) की जद में आने की रफ्तार भी बढ़ रही है। दवाओं, एक्सरे, परमाणु उद्योगों, सेना द्वारा प्रयोग किए जा रहे गोलाबारूद से विकिरण का दायरा बढ़ रहा है।
कुछ ऐसी चीजें भी हैं,जो इससे भी ज्यादा नुकसानदायक हैं। ये हैं मोटापा, धूमपान और वायु प्रदूषण। ब्रिटेन की ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने एक अध्ययन के आधार पर यह निष्कर्ष पेश किया है।

शोधकर्ताओं के मुताबिक, अगर 100 व्यक्ति अपने जीवनकाल में 100 एमएसवी (मिलीसिवर्ट, विकिरण के स्तर मानक) के संपर्क में आते हैं तो उनमें से केवल एक व्यक्ति को कैंसर होने का खतरा है, जबकि 42 व्यक्ति अन्य कारणों से कैंसर की गिरफ्त में आ सकते हैं। इनमें मोटापा, धूमपान, बढ़ता वायु प्रदूषण आदि प्रमुख कारण हैं, जो आधुनिक दौर में कैंसर के बड़े कारण बन रहे हैं।
प्रोसीडिंग्स ऑफ रॉयल सोसाइटी जर्नल में प्रकाशित शोधपत्र के अनुसार, विकिरण के स्तर को 100 एमएसवी इसलिए रखा क्योंकि यह विकिरण का बहुत कम डोज है। सीटी स्कैन में एक पूरे चक्कर के दौरान व्यक्ति 10 एमएसवी विकिरण के संपर्क में आता है, वहीं ब्रिटेन में पर्यावरण के कारण हर व्यक्ति सालाना 2.3 एमएववी विकिरण के संपर्क में आता है।
ऑक्सफोर्ड विवि की प्रोफेसर एंजेला मैक्लीन के मुताबिक, परमाणु बमों, हादसों मरीजों पर दवाओं के असर, परमाणु उद्योग के कर्मियों के कारण होने वाले निम्न स्तरीय विकिरण के मानव स्वास्थ्य पर प्रभाव से हम भलीभांति परिचित हैं। अध्ययनों से स्पष्ट है कि उच्च विकिरण के संपर्क में आने पर कई प्रकार के कैंसर का भी खतरा पैदा होता है।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications