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जानिए क्या है हशिमोटो रोग, लक्षण और ईलाज
मानव शरीर में एक ऐसी सुरक्षा प्रणाली होती है जो शरीर को रोगों से बचाकर स्वस्थ रखती है। शरीर में पैदा होने वाले कीटाणु और विषाक्त पदार्थों से ये छुटाकरा दिलाता है। शरीर की इस सुरक्षा प्रणाली को इम्यून सिस्टम कहा जाता है और ये हमारी सेहत को दुरुस्त रखने में अहम भूमिका निभाता है।
स्ट्रेस, कुछ रोगों और दवाओं के साइड इफेक्ट्स और खराब जीवनशैली के कारण इम्यून सिस्टम मजबूत नहीं रह पाता है और इससे शरीर की कई बीमारियों से लड़ने की क्षमता कम होती रहती है।

कुछ मामलों में खुद इम्यून सिस्टम ही शरीर को नुकसान पहुंचाने लगता है और रोग पैदा करता है। खुद इम्यून सिस्टम की वजह से शरीर में होने वाली समस्याओं को ऑटोइम्यून डिजीज कहा जाता है। ऑटोइम्यून डिजीज़ में रह्मेटाएड अर्थराइटिस, लुपर, सेलिएक रोग, मल्टीपल स्कलेरोसिस आदि होता है।
क्या आपने कभी हशिमोटो रोग के बारे में सुना है ? ये एक अन्य ऑटोइम्यून रोग है जिसके बारे में लोगों को कम ही पता है।
तो चलिए जानते हैं हशिमोटो रोग के लक्षण, खतरे और इसके ईलाज के बारे में।
क्या है हशिमोटो रोग
जैसा कि हमने पहले भी बताया कि हशिमोटो रोग एक ऑटो इम्यून रोग है जिसमें इम्यून सिस्टम मानव शरीर के प्रमुख अंगों में से एक एंडोक्राइन ग्लैंड यानि की थायराएड ग्रंथि पर आक्रमण करने लगता है।
थाएराएड ग्रंथि एक छोटा सा एंडोक्राइन ग्लैंड होता है जो गले के नीचे स्थित होता है और ये शरीर की प्रमुख क्रियाओं जैसे मेटाबॉलिज्म, विकास के लिए हार्मोंस का उत्पादन करता है।
हशिमोटो रोग के कारण इम्यून सिस्टम थायराएड ग्लैंड पर आक्रमण कर देता है। इससे सूजन होने लगती है जोकि थाएराएड रोग का रूप ले लेता है। हशिमोटो रोग की वजह से हुर्द सूजन हायपरथायरायडिज्म का रूप ले लेती है। ये बीमारी मध्य उम्र की महिलाओं में ज्यादा होती है। हालांकि, ये ऑटो इम्यून बीमारी महिलाओं और पुरुषों दोनों को ही अपना शिकार बनाती है।
हशिमोटो रोग के लक्षण
आमतौर पर हशिमोटो रोग के लक्षण अंतिम चरण में दिखाई देते हैं लेकिल कुछ लोगों को गले में सूजन दिखाई देती है जोकि इस रोग का ही एक लक्षण है। हशिमोटो रोग के लक्षण धीरे-धीरे बढ़ते हैं लेकिन अगर इनका ईलाज ना किया जाए तो ये सालों में भयंकर रूप ले लेते हैं।
इसके कुछ प्रमुख लक्षण इस प्रकार हैं :
- भयंकर थकान और आलस
- कब्ज
- शरीर का पीला और सूखा पड़ना
- ज्यादा सर्दी लगना
- नाखूनों का कमजोर होना
- चेहरे में पफीनेस होना
- बालों का झड़ना
- जीभ का बढ़ना
- वजन बढ़ना
- बिना किसी कारण के मांसपेशियों में खिंचाव रहना
- मासिक धर्म में अधिक रक्तस्राव
- याद्दाश्त कमजोर होना
- डिप्रेशन
- हशिमोटो रोग के कारण
हशिमोटो रोग के प्रमुख कारण इस प्रकार हैं :
आनुवांशिक कारण
किसी ऑटोइम्यून रोग जैसे लुपुस, अर्थराइटिस या डायबिटीज़ आदि से ग्रस्त होना।
पर्यावरण विकिरण के संपर्क में आने के कारण
थायराएड सर्जरी होने के कारण
हार्मोनल ट्रीटमेंट या रेडिएशन थेरेपी की वजह से
हाई कोलेस्ट्रॉल
क्या आती हैं मुश्किलें
अगर समय रहते हशिमोटो रोग का ईलाज ना किया जाए तो निम्न स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं।
घेंघा रोग
अगर हशिमोटो रोग का ईलाज ना किया जाए तो सूजन की वजह से थाएराएड ग्लैंड का आकार बढ़ने लगता है। इस स्थिति को घेंघा कहते हैं और ये थायराएड ग्लैंड के अक्रियाशील होने की वजह से होता है।
ह्रदय रोग
हशिमोटो रोग के कारण ह्रदय रोग भी हो सकता है। अक्रियाशील थायराएड ग्रंथि की वजह से शरीर में एलडीएल की मात्रा बहुत बढ़ने लगती है जिससे धमनियां बंद हो जाती हैं और ह्रदय रोग पैदा करती हैं।
मानसिक विकार
हशिमोटो रोग का संबंध मानसिक विकार जैसे डिप्रेशन और लो सेक्शुअल लिबिडो से भी है। शरीर में थायराएड हार्मोंस की अस्थिरता के कारण मानसिक विकार हो सकता है।
मिक्सडेमा
अगर हशिमोटो रोग का ईलाज ना किया जाए तो इस गंभीर रोग के होने का खतरा रहता है। इसमें चक्कर आना, चेहरे और पैरों आदि में सूजन होना। इस रोग का ईलाज तुरंत करवाना चाहिए।
जन्म विकार
रिसर्च में सामने आया है कि जो महिलाएं हशिमोटो रोग का ईलाज करवाए बिना बच्चे को जन्म देती हैं उनके शिशु में जन्म विकार जैसे बौद्धिक और स्वभाव में दिक्कत या ह्रदय और दिमाग या किडनी में समस्या का खतरा रहता है।
हशिमोटो रोग का ईलाज
आमतौर पर हार्मोन टेस्ट से हशिमोटो रोग की पहचान की जा सकती है। इसके अलावा एंटीबॉडी टेस्ट भी किया जाता है।
हशिमोटो रोग के ईलाज में दवाओं के ज़रिए शरीर में आर्टिफिशियल हार्मोन डाले जाते हैं जोकि थायराएड हार्मोंस के उत्पादन को नियंत्रित कर इसे लक्षणों को कम करता है।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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