केरल में बाढ़ के बाद फैला 'रैट फीवर', जानिए 'लेप्टोस्पायरोसिस' के लक्षण और बचाव

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Rat Bite fever: Reason, Symptoms & Treatment | रैट बाईट फीवर के लक्षण - बचाव के उपाय | Boldsky

सदी की सबसे भयंकर बाढ़ त्रासदी झेलने के बाद केरल में अब "रैट फीवर" यानी कि "लेप्टोस्पायरोसिस" का खतरा मंडरा रहा है। केरल में लेप्टोस्पायरोसिस यानी रैट फीवर से मरने वालों की संख्या 15 पहुंच गई। इस बीमारी का फैलने खतरा बाढ़ के दौरान सबसे अधिक होता है। इस बीमारी के खतरे को समझते हुए सरकार ने भी अलर्ट जारी कर द‍िए हैं।

भारत में 2013 मे इस बीमारी का पहला मामला सामने आया था। उसके बाद से हर साल इस बीमारी के कारण करीब पांच हजार से ज्यादा लोगों प्रभावित होते है। हाल ही में मुंबई में भीइस बुखार के कैसेज देखने को मिले थे। अब केरल में लेप्टोस्पायरोसिस का खतरा मंडरा रहा है। आइए जानते है रैट फीवर या लेप्टोस्पायरोसिस के लक्षणों और बचाव के तरीको के बारे में। 

क्या है लेप्टोस्पायरोसिस?

क्या है लेप्टोस्पायरोसिस?

लेप्टोस्पायरोसिस एक जलजनित बैक्‍टीरिया है, जो मनुष्यों और जानवरों को प्रभावित करता है। यह लेप्टोस्पिरा जीनस के बैक्टीरिया के कारण होता है। यह संक्रमित जानवरों के मूत्र के जरिये फैलता है।

लेप्टोस्पायरोसिस के बैक्‍टीर‍िया चूहें, पक्षियों और स्‍तनधारी जीवों के जर‍िए इंसानों तक पहुंच सकते है। कोशिश करें कि आप ऐसी मिट्टी वाली जगह और पानी से दूर रहें, जहां जानवर ज्‍यादा घूमते है और मलमूत्र त्‍यागते हैं।

कैसे सम्‍पर्क में आता है ये बैक्‍टीर‍िया

कैसे सम्‍पर्क में आता है ये बैक्‍टीर‍िया

आप ऐसी जगह जहां जानवर ज्‍यादा घूमते है। वहां उनके मूत्र करने की ज्‍यादा सम्‍भावनाएं रहती हैं। अगर भूले से आप ऐसी जगह के सम्‍पर्क में आते हैं तो आपकी स्किन में दरारें और स्‍क्रेच उभरकर आ सकते है। ये बैक्‍टीरिया आपके चेहरे पर कान, नाक और जननांगों और घाव के जरिए प्रवेश कर सकते हैं।

पालतू जानवरों का रखें विशेष ध्‍यान

पालतू जानवरों का रखें विशेष ध्‍यान

यदि आपके घर में पालतू कुत्ता या गाय आदि है तो आपको उनसे ये बीमारी फ़ैल सकती है। इस बीमारी से ग्रस्त जानवर को अगर आप छूते हैं या उनके साथ खाते हैं तो बैक्टीरिया आपके शरीर में प्रवेश कर जाएंगे। दूसरी ओर अगर आपके घर में चूहों को ये बीमारी है तो भी आपके संक्रमित होने की काफी संभावना है।

 खुली चोट की वजह से

खुली चोट की वजह से

संक्रमित चूहों के मूत्र में बड़ी मात्रा में लेप्टोस्पायर्स होते हैं, जो बाढ़ के पानी में मिल जाते हैं। इसके बाद जब ये बैक्‍टीरिया त्वचा जैसे आंखों, नाक, मुंह के माध्यम से शरीर के सम्‍पर्क में आते है खासकर अगर त्वचा में कोई खुली चोट हो

लक्षण

लक्षण

लेप्टोस्पायरोसिस के लक्षण दो सप्ताह के भीतर दिखने शुरू होते है।आपको यह 104 डिग्री तक बुखार का आना। इसके अलावा इसमें सिरदर्द, मसल्स में दर्द, पीलिया, उल्टी आना, डायरिया, त्वचा पर रैशेज पड़ने जैसे लक्षण दिखते है।

यह लक्षण इतने सामान्य है कि इस बीमारी का पता लगाने के लिए आपको ब्लड टेस्ट कराने की जरूरत ही पड़ती है।

इलाज

इलाज

लेप्टोस्पायरोसिस का इलाज एंटीबायोटिक्स के जरिए ही किया जा सकता है। इसके अलावा शुरआती इलाज में डॉक्‍टर शरीर में दर्द के लिए आपको पेनकिलर दे सकते है। यह इलाज करीब हफ्ते भर के लिए चलता है। लेकिन अगर यह बीमारी गंभीर रुप ले लेती है तो आपको अस्पताल में भर्ती होना पड़ेगा। इस संक्रमण की वजह से आपके शरीर के अंग भी खराब हो सकते है।

बचाव

बचाव

चूहों से रहें दूर और पालतू जानवरों का रखें ध्‍यान

बारिश का पानी और चूहों से दूर रहना ही बेहतर विकल्प है। जिस जगह जल भराव और बहते पानी के कारण यह संक्रमण पानी में मिलकर उसे दूषित कर देता है और इसी वजह से मानसून में लेप्टोस्पायरोसिस होने की आशंका दोगुनी से भी ज्यादा हो जाती है।

घर के पालतू जानवरों की साफ-सफाई पर भी जरूर ध्यान दें। इस बैक्‍टीरिया के सम्‍पर्क में पालतू जानवरों के आने से आप भी संक्रमित हो सकते हैं।

गंदे पानी के सम्‍पर्क में आने से बचें

गंदे पानी के सम्‍पर्क में आने से बचें

गंदे पानी में घूमने से बचें, चोट लगी हो तो उसे ठीक से ढंके। बंद जूते पहन कर चलें। मधुमेह से पीड़ित लोगों के मामले में यह सावधानी खास तौर पर महत्वपूर्ण है। ट्रेवल के दौरान सफाई का पूरा ध्‍यान रखें।

बाढ़ से प्रभावित इलाकों में लेप्टोस्पायरोसिस फैलने की ज्‍यादा सम्‍भावना रहती है। इसलिए इन जगहों पर गंदे पानी के सम्‍पर्क में आने से बचें और केवल सीलबंद पानी पीए। खुले घावों को साफ करके ढंक कर रखे और गंदे पानी स्विमिंग, वाटर स्कीइंग, सेलिंग आदि से बचे।

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    English summary

    know these leptospirosis symptoms, prevention steps to stay safe

    Rat fever or leptospirosis is a waterborne bacterial disease transmitted through the urine of infected animals, with symptoms including muscle pain and fever.
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