हेल्‍थ अलर्ट! होली में बिकने आते है मिलावटी पनीर-खोया, ऐसे फर्क करें असली और नकली में

होली का मतलब होता है तरह-तरह के रंग और स्‍वादिष्‍ट मिठाई। उत्तर भारत में इस त्‍योहार का बहुत ही जोश-खरोश के साथ मनाया जाता है, मिठाईयों के बिना इस त्‍योहार का आनंद ही फीका रह जाता है। हालांकि होली के समय हमें मिठाई खाने में थोड़ी सर्तकता बरतनी जरुरी होती है। गुजियां, ठंडाई और खोया बर्फी जैसी स्‍वादिष्‍ठ स्‍वीट डिशेज देखकर जी ललचा जाता है इसल‍िए चाहकर भी हम खुद को रोक नहीं पाते है।

गुजियां, उत्तर भारत में होली के मौके पर बनाया जाने वाला मुख्‍य स्‍वीट डिश है। ये मिठाई मैदा से तैयार की जाती है इसमें सूजी और खोया की फीलींग करके तैयार किया जाता है। इसका स्‍वाद बढ़ाने के ल‍िए इसमें कैसर और ड्राय फ्रूट्स का इस्‍तेमाल भी किया जाता है। लेकिन क्‍या आप जानते है आपके गुजिएं में भरा जाने वाला खोया नकली हो सकता है। जी हां, होली जैसे कुछ महत्‍वपूर्ण त्‍योहारों से कुछ दिन पहले ही मिलावटी खोया, पनीर, छेना, घी मिलने लगता हैं।

ऐसे बनाया जाता है खोया

ऐसे बनाया जाता है खोया

स्किम्ड दूध और पाम ऑयल को मिलाकर पेस्ट तैयार किया जाता है। तेज आंच पर उसे उबाला जाता है। फिर सैफोलाइट नामक केमिकल, उबले आलू, अरारोट, शकरकंद मिलाकर तैयार किया जाता है। असली दिखने के लिए रंग और एसेंस का इस्तेमाल किया जाता है।

 मिलावटी पनीर-खोआ खाने से हो सकता कैंसर

मिलावटी पनीर-खोआ खाने से हो सकता कैंसर

मिलावटी खोआ व पनीर से पेट दर्द, डायरिया, मरोड़, एसिडिटी और इनडाइजेशन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। ज्यादा मात्रा में सेवन से तो इंटरनल ऑर्गन्स तक भी बुरा असर पड़ता है। मिलावटी पनीर व खोआ खाने से किडनी व लीवर सीधे प्रभावित होते हैं। तीन माह तक यदि मिलावटी पनीर, खोआ या ऐसे अन्य कोई भी सामान खाया जाए तो लीवर कैंसर की बीमारी हो सकती है।

इस तरह से करें पहचान

इस तरह से करें पहचान

कहीं आप गलतफहमी में नकली खोया तो नहीं खा रहे हैं इसके ल‍िए बहुत जरुरी है कि आपको असली व नकली पनीर-खोआ में पहचान होना जरुरी है। इनकी शुद्धता खुद भी कर सकते हैं।

मसलकर देखें

मसलकर देखें

छोटा-सा टुकड़ा हाथ पर मसलें। टूट कर यदि वह बिखरने लगे तो समझ लीजिए कि पनीर अथवा खोआ मिलावटी है। क्योंकि, उनमें जो केमिकल्स होते हैं वे अत्यधिक दबाव नहीं सह पाते हैं।

 आयोडीन से करें चैक

आयोडीन से करें चैक

यदि इन्हें घर ले आए हों तो थोड़े पानी में उबाल लें और ठंडा होने दें। फिर उसके छोटे से टुकड़े पर आयोडीन का टिंचर डालें। अगर रंग नीला पड़ने लगे तो समझिए कि वह मिलावटी है।

चखकर

चखकर

असली खोआ को पहचानने का आसान तरीका यह भी है कि वह चिपचिपा नहीं होता है। इसके साथ ही उसे चख कर भी देखें। यदि उसका स्वाद कसैला लगे तो वह नकली हो सकता है।

 नाखून से रगड़े

नाखून से रगड़े

खोआ की तो अंगूठे के नाखून पर रगड़ कर भी पहचान की जा सकती है। असली खोआ से घी की खुशबू आएगी और वह देर तक रहेगी।

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