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सूरत के इस क्लब में आते है लोग रोने, जानिए इसके फायदे
आपने हंसने-हंसाने वाले क्लब और लाफ्टर थैरेपी के बारे में सुना होगा, लेकिन क्या आप जानते हैं कि ऐसे भी क्लब इस दुनिया में हैं जहां लोग सिर्फ रोने के लिए आते हैं? दरअसल रोने के भी फायदे होते है। विशेषज्ञों का मानना है कि जिस तरह हंसने के फायदे होते है उसी तरह रोने के भी फायदे होते है। लाफ्टर क्लब के तर्ज पर सूरत में क्राइंग क्लब यानी रोने और रुलाने वाला क्लब खुला है।
सूरत में एक ऐसा क्लब है जहां लोग सिर्फ और सिर्फ रोने के लिए आते हैं और खूब चिल्ला-चिल्लाकर रोते भी हैं। माना जाता है कि रोने से उनका स्ट्रेस कम हो जाता है। क्लब के लोग यहां आने वाले लोगों को प्रोत्साहित करते हैं कि वे नियमित तौर पर रोएं। रोना भी एक तरह की एक्ससाइज है और इससे उन्हें काफी फायदा भी मिलता है।

देश का पहला क्राइंग क्लब
रिपोर्ट्स के अनुसार लोगों को रुलाने के लिए उन्हें जिंदगी के बुरे पल और दुखद घटनाएं याद दिलाई जाती हैं। साथ ही उन्हें उस बात को याद करने के लिए भी कहा जाता है, जिसे याद कर वे सबसे ज्यादा भावुक हो जाते हैं। इसे देश का पहला क्राइंग क्लब बताया जा रहा है।

वेंटिलेटर थैरेपी
क्राइंग थैरेपी एक वेंटिलेटर थैरेपी है, इसमें व्यक्ति को रुलाकर उसके शरीर से हानिकारक टॉक्सिन को बाहर निकाला जाता है। जब वह किसी बात को लेकर रोता है तो आंसू से आंख को तकलीफ देने वाला पदार्थ निकल जाता है। डॉक्टरों के मुताबिक रोने से तनाव दूर होता हैए ब्लड प्रेशर नॉर्मल और ब्लड सर्कुलेशन सामान्य रहता है। इंसान का भावुक होना जरूरी होता है।

केमिकल निकलता है बाहर
एक्सपर्ट के मुताबिक, लोगों को खुद को रोने से बिल्कुल भी नहीं रोकना चाहिए क्योंकि आंख से निकलने वाले आंसुओं में एक केमिकल होता है जिसका नाम है कोर्टसॉल (cortisol) यह केमिकल मानव शरीर के लिए बेहद खतरनाक होता है। इसलिए व्यक्ति को जब भी मौका मिले रोना चाहिए ताकि यह केमिकल शरीर से बाहर निकल सके। यह अगर शरीर में रहता है तो इससे टेंशन, चिंता और डिप्रेशन घेर लेता है।

बढ़ रही है संख्यां
वैसे इस क्लब में आने वाले लोगों की संख्या में दिनोंदिन इज़ाफा होता जा रहा है और परिणाम चौंकाने वाले हैं। आमतौर पर माना जाता है कि ज़्यादा रोने से व्यक्ति चिंताग्रस्त हो जाता है और कमज़ोरी भी आ जाती है, लेकिन रोना भी हंसी और खुशी की तरह एक नैचरल इमोशन है, जिसका शरीर से निकलना बेहद ज़रूरी होता है। जिस तरह हंसने पर शरीर में एंडॉर्फिन हॉर्मोन रिलीज़ होता है और व्यक्ति को खुशी महसूस होती है, उसी तरह आंसुओं के निकलने पर खतरनाक कैमिकल कोर्टिसॉल बाहर आ जाता है।

रोने से व्यक्ति का मूड होता है सही
रोने से व्यक्ति का मूड भी सुधरता है। इसे लेकर दुनियाभर में कई स्टडीज़ की गईं, जिनमें 3 हजार से भी ज़्यादा लोगों को शामिल किया गया। इनमें देखा गया जो लोग रोए वे काफी रिलैक्स दिखे।



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