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प्रोग्रेसिव सुप्रान्यूक्लीयर पाल्सी से जूझ रहे थे अभिनेता कादर खान, जाने इस डिसऑर्डर के बारे में

बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता कादर खान ने कनाडा के टोरंटो में 31 दिसंबर की शाम 6 बजे आखिरी सांसें ली। कादर खान को प्रोग्रेसिव सुप्रान्यूक्लीयर पाल्सी डिसऑर्डर (Progressive supranuclear palsy (PSP)) नाम की परेशानी थी, इस बीमारी की वजह से उनके दिमाग ने काम करना बंद कर दिया था। प्रोग्रेसिव सुप्रान्यूक्लीयर पाल्सी (पीएसपी) एक तरह का असामान्य मस्तिष्क विकार है जो शरीर की गति, चलने के दौरान बनने वाले संतुलन, बोलने, निगलने, देखने, मनोदशा और व्यवहार के साथ सोच को प्रभावित करता है, इसकी चपेट में आने वाले मरीज न सिर्फ मानसिक बल्कि शारीरिक रुप से भी कमजोर होने लगते है।
इसकी वजह से दिमाग में नर्व सेल्स भी नष्ट होने लगती हैं, आइए जानते है इस डिसऑर्डर के बारे में।

3 में से 7 लोगों को होती है ये बीमारी
प्रोग्रेसिव सुप्रान्यूक्लीयर पाल्सी डिसऑर्डर यह वह बीमारी है जो करीब एक लाख लोगों में से केवल 3 से 7 लोगों को होती है। इस बीमारी में शरीर का मूवमेंट , संतुलन, बोलने, निगलने, मनोदशा और व्यवहार के साथ सोच को भी प्रभावित करता है। ये डिसऑर्डर मस्तिष्क में नर्व सेल्स के नष्ट होने के कारण होता है।

क्यों होती है ये बीमारी?
पीएसपी, तउ नामक प्रोटीन के बनने की वजह से दिमाग के नर्व सेल्स नष्ट होने लगती है। तउ दरअसल एक प्रोटीन होता है जो दिमाग में पाया जाता है। सामान्य स्थिति में ये जब दिमाग में बनने लगता है तो खुद ही नष्ट हो जाता है। लेकिन जो लोग इस पीएसपी डिसऑर्डर से पीड़ित होते है, उनकी स्थिति में ये नष्ट होने के बजाय दिमाग के एक हिस्से में गुच्छे बन जाते है जो मस्तिष्क के नर्व सेल्स को नष्ट करने लगते है। इससे इस बीमारी से जूझ रहे मरीज को याददाश्त से लेकर सुनने और बोलने में तकलीफ आने लगती है।

ये होते है लक्षण
इस बीमारी से मरीज धीरे-धीरे देखने, सुनने, खाने-पीने की क्षमता लगभग खो देता है। यह पर्किंसन जैसी होती है, 65 साल की उम्र के बाद इस बीमारी का प्रभाव लोगों में ज्यादा देखने को मिलता है। इसके प्राथमिक लक्षणों में नींद की कमी, कठोरपन, चलने-फिरने में परेशानी, नजर का कमजोर होना, आइए जानते है इस बीमारी से जुड़े और लक्षणों के बारे में।

चलते-फिरते शरीर में कंपन-
इस बीमारी के शुरुआती लक्षण यह है कि आप ठीक से चल-फिर नहीं सकते है। और आपको कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।

आंख की रोशनी होती है कम
इस बीमारी के दौरान आंख की रोशनी कम होने लगती है। सिर्फ इतना ही नहीं आपको दूर की चीज दिखनी बंद हो जाती है।

बोलने और सुनने में दिक्कत
उम्र के साथ साथ ये बीमारी बुढ़ापे में लोगों को ज्यादा प्रभावित करने लगती है। जिस वजह से मस्तिष्क में नर्व सेल्स के नष्ट होने लगते है। इस वजह से बोलने और सुनने की क्षमता पर असर पड़ता है।

याददाश्त होती है प्रभावित
इस बीमारी के दौरान डिमेंशिया भी हो सकती है, दिमाग में नर्व सिस्टम को हानि पहुंचने के वजह से, याददाश्त की प्रॉब्लम, दैनिक काम में दिक्कत, व्यवहार में बदलाव आना, गुस्सा, अवसाद, अल्ज़ाइमर और बुढापे की प्रॉब्लम में फ़र्क।



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