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प्रदूषण से फेफड़ों पर पड़ने वाले प्रभाव को कम करती है एस्प्रिनः स्टडी
एस्प्रिन को पहले से ही कई प्रकार के दर्द को दूर करने और सूजन को कम करने में इस्तेमाल किया जाता है लेकिन एक नई स्टडी में एक और नई जानकारी सामने आई है। यह स्टडी जर्नल ऑफ रेस्पिरेटरी एंड क्रिटिकल केयर मेडिसिन में पब्लिश हुई है। कोलंबिया विश्वविद्यालय द्वारी की गई इस नई स्टडी के अनुसार, एस्प्रिन वायु प्रदूषण से फेफड़ों पर पड़ने वाले हानिकारक प्रभावों को कम कर सकती है।
इस स्टडी में बोस्टन के 73 साल की औसत आयु वाले 2280 पुरुषों को शामिल किया गया। स्टडी में शामिल प्रत्येक व्यक्ति की पूरी सेहत और फेफड़ों के काम करने की क्षमता का टेस्ट किया गया।

इसके साथ ही हर व्यक्ति के फेफड़ों के टेस्ट के रिजल्ट, एस्प्रिन का उपयोग करने वाले और पार्टिकुलेट मैटर (पीएम)/ब्लैक कार्बन के स्तर के बीच संबंध का पर जांच की गई। इसके अलावा भी दूसरे कारणों पर भी ध्यान दिया गया, जैसे कि प्रत्येक व्यक्ति की पर्सनल मेडिकल हिस्ट्री और चाहे वह रेगुलर स्मोक न करने वाला हो।
इसके बाद शोधकर्ताओं ने पाया कि एस्प्रिन के उपयोग ने फेफड़ों के काम करने पर पीएम का निगेटिव प्रभाव लगभग आधा कर दिया। स्टडी में शामिल अधिकतर लोग एस्प्रिन ले रहे थे इसलिए स्टडी के ऑथर का कहना है कि स्टडी का निष्कर्ष मुख्य रूप से एस्प्रिन पर ही लागू होता है। वहीं, यह भी कहा जा रहा है कि एस्प्रिन का फेफड़ों के काम करने पर पॉजिटिव प्रभाव पड़ता है और इस पर आगे स्टडी की आवश्यकता है।
शोधकर्ताओं का अनुमान है कि एस्प्रिन जहां तक फेफड़ों के काम करने में फायदा पहुंचा रहा है। इसके साथ ही वायु प्रदूषण से फेफड़ों में आने वाली सूजन में भी राहत मिलती है।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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