नाभि से न‍िकलने वाले मवाद को ऐसे करें ठीक, जानिए घरेलू उपाय

नाभि शरीर का बहुत ही कोमल अंग होता है। इसकी देखभाल चेहरे और शरीर के बाकी हिस्सों जितनी ही जरूरी है। गर्भ में शिशु का विकास पूरी तरह नाभि द्वारा ही होता है, जिसे जन्म के बाद अलग किया जाता है। बॉडी का सेंटर प्वाइंट होते हुए भी ज्यादातर लोग इसकी सफाई को इग्नोर करते हैं, जिस वजह से कई प्रकार के इन्फेक्शन होने का खतरा बना रहता है। नाभि में इन्फेक्शन का खतरा किसी भी व्यक्ति को किसी भी उम्र में हो सकता है, यहां तक कि नवजात शिशुओं को भी। ये दो प्रकार का होता है- बैक्टीरियल और यीस्ट इन्फेक्शन।

नाभि का एरिया बहुत ही गहरा होता है। इसलिए वहां इन दोनों इन्फेक्शन का खतरा सबसे ज्यादा होता है। पसीना, साबुन, पियर्सिंग भी बैक्टीरियल इन्फेक्शन को बढ़ा सकते हैं। इसके अलावा सफाई से न रहने की आदत, सर्जरी, डायबिटीज, सिस्ट जैसे और कई कारण भी जिम्मेदार होते हैं। कई मामलों में तो सूरज की अल्ट्रा वायलेट किरणों और मोटापा भी इसका कारण बन जाता है। इन्फेक्शन होने के कारण हल्का दर्द, नाभि का लाल होना, हरा और सफेद डिस्चार्ज और सूजन की समस्या भी हो सकती है। इसे दूर करने के क्या उपाय हैं, इन्हें जानना जरूरी है, ताकि समस्या की पहचान कर उसे तत्काल दूर किया जा सके।

बैक्टीरियल इंफेक्शन

बैक्टीरियल इंफेक्शन

हेल्थ एक्सपर्ट बताते हैं कि नाभि में संक्रमण का एक मुख्य कारण बैक्टीरियल इंफेक्शन होता है। नाभि लगभग 70 विभिन्न प्रकार के बैक्टीरिया का स्रोत है। यदि आप इस क्षेत्र को अच्छी तरह से साफ नहीं करते हैं, तो ये जीवाणु संक्रमण का कारण बन सकते हैं। कई बार आपकी नाभि में पियर्सिंग भी संक्रमित हो सकती है। जिससे नाभि का संक्रमण हो सकता है। बैक्टीरियल संक्रमणों के कारण पीले या हरे, दुर्गंधयुक्त स्राव होते हैं। आपके पेट के बटन के चारों ओर सूजन, दर्द और पपड़ी भी हो सकती है।

यीस्ट इंफेक्शन

यीस्ट इंफेक्शन

कैंडिडिआसिस एक तरह का यीस्ट संक्रमण है जो कैंडिडा के कारण होता है। यह एक प्रकार का खमीर जो आमतौर पर शरीर के अंधेरे क्षेत्रों में बढ़ता है। यह त्वचा की परतों के बीच हो सकता है, जैसे कि आपके कमर क्षेत्र में और आपकी बाहों के नीचे। खमीर आपके नाभि में भी निवास कर सकता है, खासकर यदि आप इसे साफ और सूखा नहीं रखते हैं। हेल्थ केयर एक्सपर्ट के अनुसार, आपके पेट के बटन अर्थात् नाभि में कैंडिडिआसिस आपकी नाभि पर एक लाल, खुजलीदार दाने का कारण बनता है और इसके कारण आपको थिक और व्हाइट डिस्चार्ज भी हो सकता है।

मधुमेह

मधुमेह

हेल्थ एक्सपर्ट कहते हैं कि मधुमेह भी नाभि में संक्रमण का एक कारण हो सकता है। दरअसल, जिन लोगों को मधुमेह की समस्या है, उन्हें यीस्ट इंफेक्शन होने की संभावना अधिक होती है। कई अध्ययन भी यह बताते हैं कि बेली बटन में यीस्ट संक्रमण मधुमेह वाले लोगों में अधिक आम होता है।

सर्जरी

सर्जरी

हेल्थ एक्सपर्ट बताते हैं कि सर्जरी भी नाभि संक्रमण की वजह बन सकता है। यदि आपकी हाल ही में सर्जरी हुई है, तो इससे आपकी नाभि से पस निकलने की शिकायत हो सकती है। यदि ऐसा होता है, तो अपने डॉक्टर को बुलाएं। यह एक संक्रमण का संकेत हो सकता है जिसका इलाज किया जाना चाहिए।

नाभि के इन्फेक्शन को दूर करने के आसान घरेलू उपाय

नमक वाला गर्म पानी

नाभि के इन्फेक्शन को दूर करने का सबसे आसान घरेलू नुस्खा है नमक डला गर्म पानी। इस पानी के इस्तेमाल से इन्फेक्शन वाले एरिया में ब्लड का सर्कुलेशन तेजी से होने लगता है। नमक नाभि के अंदर के मॉइश्चराइजर को सोख लेता है, जिससे इन्फेक्शन की समस्या दूर हो जाती है। इसके ल‍िए

-1 चम्मच नमक को 1 कप गरम पानी में डाल अच्छे से घुलने दें।

-कॉटन की मदद से इस मिक्सचर को नाभि के आसपास अच्छे से लगाएं और इसे सूखने दें।

-सूखने के बाद एंटी बैक्टीरियल क्रीम लगा लें।

-दिन में तीन से चार बार इसका इस्तेमाल बहुत ही फायदेमंद रहेगा।

अन्‍य उपचार: नीम की पत्तियां, सिंकाई करना , एल्कोहल से मालिश, व्हाइट विनेगर, एलोवेरा, हल्दी।

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