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आपके टीनेजर बच्चे को भी है ईटिंग डिसऑर्डर, जानिए इसके कारण
ईटिंग डिसऑर्डर एक ऐसी एक समस्या है, जिसे लोग अक्सर हल्के में लेते हैं, लेकिन वास्तव में यह एक बेहद गंभीर समस्या है। यूं तो यह समस्या किसी को भी हो सकती है, लेकिन फिर भी टीनेजर्स में यह परेशानी अधिक देखी जाती है। खाने से जुड़े ईटिंग डिसऑर्डर कई तरह के हेल्थ इश्यूज को जन्म दे सकते हैं। यहां तक कि इससे व्यक्ति का मानसिक स्वास्थ्य भी प्रभावित होता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि टीनेजर्स में यह समस्या क्यों होती है। अगर आपका बच्चा भी टीनेजर है और इस समय किसी ना किसी तरह के ईटिंग डिसऑर्डर से जूझ रहा है, तो उसे दूर करने से पहले आपके इसके पीछे के कारण के बारे में जानिए-

ईटिंग डिसऑर्डर के प्रकार
टीनेजर्स में ईटिंग डिसऑर्डर की समस्या अधिक देखी जाती है। यूं तो ईटिंग डिसऑर्डर कई तरह के हो सकते हैं। लेकिन टीनेजर में विशेष रूप से तीन तरह के ईटिंग डिसऑर्डर देखे जाते हैं- एनोरेक्सिया, बुलिमिया और बिंज ईटिंग डिसऑर्डर।

एनोरेक्सिया
एनोरेक्सिया को एनोरेक्सिया नर्वोसा के रूप में जाना जाता है। जिन लोगों को यह विकार होता है, उन्हें हमेशा ही स्लिम होने की इच्छा होती है और वह मोटे होने से डरते हैं। यहां तक कि स्लिम होने के बावजूद भी वह खुद को मोटे के रूप में देखते हैं, जिसके कारण वे इस बात को लेकर बहुत सख्त होते हैं कि वे क्या और कितना खाएंगे। वे लगभग हर समय भोजन या कैलोरी के बारे में सोच सकते हैं।

बुलीमिया
बुलीमिया चिकित्सकीय रूप से बुलिमिया नर्वोसा के रूप में जाना जाता है, यह खाने का एक ऐसा डिसऑर्डर है, जिसमें एक बार में व्यक्ति बहुत अधिक खाना खा लेता है। लेकिन एक बार में अधिक खाने के बाद व्यक्ति खुद ही जान-बूझकर उल्टी करता है या फिर किसी तरह की दवा का सेवन करके उसे बाहर निकालने की कोशिश करता है।

बिंज ईटिंग डिसऑर्डर
यह एक ऐसा डिसऑर्डर होता है, जिसमें व्यक्ति आवश्यकता से अधिक भोजन करता है और वह चाहकर भी खुद पर नियंत्रण नहीं रख पाता है। यहां तक कि भूख न होने पर भी वह अधिक मात्रा में खाता है। जिसके कारण उसका वजन बढ़ने लगता है। इस डिसऑर्डर से पीड़ित लोग सामान्य से अधिक तेजी से खाते हैं। वे अकेले खा सकते हैं ताकि दूसरे यह न देखें कि वे कितना खा रहे हैं।

टीनेजर्स में ईटिंग डिसऑर्डर के कारण
टीनेजर्स में ईटिंग डिसऑर्डर के पीछे कई कारण जिम्मेदार हो सकते हैं-
• पारिवारिक इतिहास और जेनेटिक्स के कारण टीनेजर में यह समस्या विकसित हो सकती है। मसलन, टीनेजर के परिवार का कोई सदस्य ईटिंग डिसऑर्डर से पीड़ित है, तो उन्हें भी यह समस्या हो सकती है।
• किशोरों में एंग्जाइटी डिसऑर्डर भी देखे जाते हैं और उन्हें सोशल फोबिया भी हो सकता है। जिसके कारण ईटिंग डिसऑर्डर होने का रिस्क काफी बढ़ जाता है।
• कई बार जीवन में होने वाले कुछ परिवर्तन टीनेजर को इमोशनल डिस्ट्रेस या भावनात्मक रूप से परेशान कर सकते हैं। ऐसे में टीनेजर खाने में अपनी खुशी ढूंढते हैं और उनके भीतर ईटिंग डिसऑर्डर डेवलप हो सकता है।
• टीनेज उम्र में बच्चे अपनी फिगर या फिजिकल अपीयरेंस के बारे में कुछ जरूरत से ज्यादा सोचते हैं। जब यह सोच उन पर हावी हो जाती है तो ऐसे में परफेक्ट फिगर पाने की चाहत में वे एनोरेक्सिया या बुलीमिया से पीड़ित हो सकते हैं।
• अगर टीनेज में किसी का शारीरिक, भावनात्मक दुर्व्यवहार या यौन शोषण हुआ है तो ऐसे में उनमें भी ईटिंग डिसऑर्डर डेवलप होने का रिस्क भी काफी बढ़ जाता है।
तो अब अगर आपके टीनेज बच्चे में भी आपको ईटिंग डिसऑर्डर से जुड़े लक्षण नजर आते हैं तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।



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