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Monkeypox in India: केरल के बाद दिल्ली में मिला मंकीपॉक्स का मामला, ये है लक्षण और बचाव
देश में मंकीपॉक्स का नया मामला देश की राजधानी दिल्ली में मिला है। इसकी के साथ देश में मंकीपॉक्स से संक्रमित लोगों की संख्या कुल मिलाकर 4 हो गई है। केरल में अब तक 3 नए केस आ चुके हैं। डब्लूएचओ (विश्व स्वास्थ्य संगठन) ने भी इसे ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित कर दिया है।
देश में मंकीपॉक्स का पहला मरीज केरल में मिला था। इसके बाद 2 अन्य मामले सामने आए थे। केरल में अभी 3 मंकीपॉक्स के मामले सामने आए हैं। जिसके बाद संदिग्ध मरीजों को आइसोलेट कर डब्ल्यूएचओ और आईसीएमआर के निर्देशों के मुताबिक उनकी जांच और निगरानी की जा रही है।
मंकीपॉक्स, एक दुर्लभ बीमारी है। जो मंकीपॉक्स वायरस के कारण होती है। यह दाने और फ्लू जैसे लक्षणों की तरह होता है। मंकीपॉक्स वायरस, ऑर्थोपॉक्सवायरस के परिवार से आता है। यह स्माॉल पॉक्स यानी चेचक के वायरस के परिवार का ही सदस्य है। एक्सपर्टस की मानें तो मंकीपॉक्स के लक्षण चेचक की तुलना में कम गंभीर होते हैं। मंकीपॉक्स आम तौर पर फ्लू जैसी बीमारी और लिम्फ नोड्स की सूजन से शुरू होती हैं। चेहरे और शरीर पर दाने निकल आते हैं। आइए इस बीमारी के कारण और लक्षण जानते हैं। वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशन की एक रिपोर्ट बताती है कि करीब एक दर्जन अफ्रीकी देश हर साल मंकीपॉक्स से प्रभावित होते हैं। इसमें से सबसे अधिक केस कांगो से रिपोर्ट होते हैं।

क्या है मंकीपॉक्स?
मंकीपॉक्स एक वायरस है जो कि आम तौर पर जंगली जानवरों में होता है। लेकिन इसके कुछ केस मध्य और पश्चिमी अफ्रीका के लोगों में भी देखे गए हैं। पहली बार इस बीमारी की पहचान 1958 में हुई थी। उस वक्त रिसर्च करने वाले बंदरों में चेचक जैसी बीमारी हुई थी इसीलिए इसे मंकीपॉक्स कहा जाता है। पहली बार इंसानों में इसका संक्रमण 1970 में कांगों में एक 9 साल के लड़के को हुआ था। मंकीपॉक्स किसी संक्रमित जानवर के काटने या उसके खून या फिर उसके फर को छूने से हो सकता है। ऐसा माना जाता है कि यह चूहों और गिलहरियों द्वारा फैलता है।

मंकीपॉक्स के लक्षण
मंकीपॉक्स के लक्षणों में बुखार, शरीर में दर्द, ठंड लगना और थकान जैसे लक्षण का अनुभव करते हैं। अधिक गंभीर बीमारियों वाले लोगों के चेहरे और हाथों पर दाने और घाव हो सकते हैं जो कि शरीर के अन्य भागों में भी फैल सकते हैं।

मंकीपॉक्स का कोई इलाज है?
मंकीपॉक्स 10 में से एक व्यक्ति के लिए घातक हो सकता है और बच्चों के केस में इसे गंभीर माना जता है। मंकीपॉक्स आमतौर पर दो से चार सप्ताह तक चलने वाले लक्षणों के साथ बिना इलाज के अपने आप ठीक हो जाते हैं। जांच के बाद स्वास्थ्यकर्मी आपकी स्थिति की निगरानी करेंगे और आपके लक्षणों को दूर करने में मदद करेंगे। आपको डिहाइड्रेशन की समस्या न हो इसके लिए एंटीबायोटिक्स देंगे ताकि आप किसी दूसरे इंफेक्शन की चपेट में न आ जाएं।
मंकीपॉक्स के लिए वर्तमान में कोई स्वीकृत एंटीवायरल उपचार नहीं है। कुछ एंटीवायरल दवाएं मदद करती हैं, लेकिन मंकीपॉक्स के इलाज के रूप में इन पर कोई पुख्ता स्टडी नहीं हुई है। मंकीपॉक्स के इलाज के लिए ऐसे तो कई जांची हुई एंटीवायरल उपलब्ध हैं, लेकिन केवल एक शोध अध्ययन के हिस्से के रूप में।

कैसे मालूम चलेगा कि मंकीपॉक्स हुआ है?
चूंकि मंकीपॉक्स दुर्लभ है, इसलिए शायद पहली नजर में ये अन्य दानों वाली बीमारियों, जैसे कि खसरा या चिकनपॉक्स लगे। लेकिन सूजी हुई लिम्फ नोड्स आमतौर पर मंकीपॉक्स को अन्य दानों वाली बीमारी से अलग बनाती है। इस बीमारी का पता लगाने के लिए स्वास्थ्यकर्मी आपके खुले घाव से टिश्यू का सेम्पल लेंगे। फिर वे इसे पोलीमरेज़ चेन रिएक्शन (पीसीआर) परीक्षण (जेनेटिक फिंगरप्रिंटिंग) के लिए एक प्रयोगशाला में भेजते हैं। आपको मंकीपॉक्स वायरस या आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली द्वारा बनाए गए एंटीबॉडी की जांच के लिए रक्त का नमूना देने की भी आवश्यकता हो सकती है।

डॉक्टर के पास कब जाएं
- बुखार, दर्द या सूजी हुई लिम्फ नोड्स के साथ बीमार महसूस करें।
- नए दाने या घाव हों।
- एक संक्रमित व्यक्ति के निकट संपर्क में आए हो, इन स्थितियों में देरी न करें तुंरत डॉक्टर से संपर्क करें।

मंकीपॉक्स किसे प्रभावित करता है?
मंकीपॉक्स किसी को भी हो सकता है। अफ्रीका में, ज्यादातर मामले 15 साल से कम उम्र के बच्चों में हैं। अफ्रीका के बाहर, समलैंगिग और गे पुरुषों के साथ यौन संबंध रखने वाले पुरुषों में यह रोग देखने को मिला है, लेकिन ऐसे कई मामले हैं जो उस श्रेणी में नहीं आते हैं।

बचाव
मंकीपॉक्स वायरस को फैलने से बचाव का सबसे अच्छा तरीका है:
- संक्रमित जानवरों (विशेषकर बीमार या मृत जानवरों) के संपर्क में आने से बचें।
- बिस्तर और वायरस से दूषित अन्य सामग्री के संपर्क में आने से बचें।
- जानवरों के मांस या भागों वाले सभी खाद्य पदार्थों को अच्छी तरह से पकाएं।
- अपने हाथों को बार-बार साबुन और पानी से धोएं।
- ऐसे लोगों के संपर्क में आने से बचें जो इस वायरस से संक्रमित हो सकते हैं।
- सुरक्षित सेक्स का अभ्यास करें, जिसमें कंडोम और डेंटल डैम का उपयोग शामिल है।
- ऐसा मास्क पहनें जो दूसरों के आस-पास होने पर आपके मुंह और नाक को अच्छी तरह कवर करें।
- बार-बार छुई जाने वाली सतहों को साफ और कीटाणुरहित करें।
- वायरस से संक्रमित लोगों की देखभाल करते समय व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (पीपीई) का प्रयोग करें।



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