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अलर्ट! कोरोना के बाद अब मिला डेंगू का नया वेरिएंट DENV-2, जानें क्यों है चिंता की बात
जहां एक तरफ देश में कोरोना वायरस की रफ्तार थोड़ी धीमी पड़ी है। वहीं देशभर में कई और वायरस अपने पांव पसारने लगे हैं। पिछले कुछ समय में देशभर में डेंगू के मामलों में बढ़ती तेजी से नई चिंताएं सामने आई हैं। फिलहाल चिंता की बात इसलिए भी है कि डेंगू का एक नया वेरिएंट मिला है। इससे पहले तक हम सिर्फ कोरोना वायरस के वेरिएंट्स के बारे में ही बात करते थे। डॉक्टर्स का कहना है कि डेंगू वायरस के नए वेरिएंट DENV-2 के मामलें 11 राज्यों में मिले हैं, जो आगे चलकर खतरनाक साबित हो सकते हैं। आइए डेंगू के इस नए वेरिएंट से जुड़ी जरुरी बातें।

क्या है डेंगू का नया वेरिएंट DENV-2
पिछले महीनेभर में केरल, तेलंगाना, महाराष्ट्र , उत्तर प्रदेश और उड़ीसा सहित 11 राज्यों में डेंगू का प्रकोप देखने को मिला है। जबकि मानसून के मौसम में कुछेक ही डेंगू के मामले सामने आते है।। रिपोर्टों के अनुसार, डेंगू वायरस के चार सीरोटाइप में से DENV- 2 या स्ट्रेन D2 ज्यादा फैल रहा है , जो मामलों में गंभीरता को बढ़ाने के लिए जिम्मेदार हैं। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद के महानिदेशक बलराम भार्गव ने कहा है कि ये स्ट्रेन खतरनाक है और ये डेंगू से पीड़ित लोगों में मृत्यु दर को बढ़ाने में भी सक्षम है। इस रहस्यमय प्रकोप ने पश्चिमी यूपी में कई लोगों की जान तक ले ली है।

क्यों है चिंता की बात
डेंगू के स्ट्रेन D2 के मामल ज्यादा गंभीरता वाले है, जो चिंता की बात है। कई मामले तो इतने गंभीर हो गए हैं, कि बच्चों को इलाज के लिए अस्पतालों में तक भर्ती कराया गया है। इस दौरान कई मौतें भी दर्ज हुई हैं। अधिकारियों का कहना है कि ऐसा मच्छर जनित वायरस के D2 स्ट्रेन के कारण है।
जबकि ज्यादातर बार DENV तेज या फिर हल्के फ्लू जैसी बीमारी का कारण बनते हैं। DENV के विशेष स्ट्रेन जैसे D2 खासतौर से गंभीर लक्षणों से जुड़ा हुआ है। जिसका समय रहते इलाज नहीं किया गया, तो यह मृत्यु की वजह भी बन सकता है। कई बार तो यह डेंगू शॉक सिंड्रोम और डेंगू रक्तस्त्रावी बुखार का कारण भी बनता है।

कितनी बार डेंगू का वायरस बदलता है?
डेंगू वायरस के चार रुप जानें जाते हैं। D1, D2, D3 और D4। DENV संक्रमण होने की स्थिति में ये कोविड की तरह खतरनाक हो सकती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि डेंगू स्ट्रेन की उपस्थिति का मतलब है कि जो लोग पहले से संक्रमित हो चुके हैं, वे एक बार फिर संक्रमित हो सकते हैं।

क्या डेंगू का वेरिएंट COVID-19 वेरिएंट जितना गंभीर हो सकता है?
माना जा रहा है कि कोरोनावायरस के वेरिएंट जिस प्रकार तेजी से फैलते हैं और लक्षण आने से पहले संक्रमित हो जाते है। जबकि डेंगू वायरस जनित मच्छरों के काटने से फैलता है, और यह आवश्यक नहीं है कि ये संक्रमित व्यक्ति के श्वसन बूंदों के प्रसार के माध्यम के संपर्क में आने से हो। DENV-2 तेजी से फैल सकता है, इलाज के अभाव में इसकी वजह से डेंगू रोगी की स्थिति गंभीर होने के साथ मुत्यु होने का डर रहता है। इसके अलावा, DENV-2 ऐसे किसी भी व्यक्ति के लिए ज्यादा खतरा बन सकता है जो पहले से डेंगू सीरोटाइप से संक्रमित हो, और फिर इस वेरिएंट से भी संक्रमित हो जाएं।

डेंगू और कोविड-19 में कैसे करें अंतर?
टेस्ट और ट्रेसिंग कॉन्टेक्ट के जरिए दोनों के बीच अंतर करने के कुछ तरीके हैं।
कोविड-19 होने कि स्थिति में गंध और स्वाद की कमी के लक्षण दिखाई देते हैं। इसके अलावा सांस लेने में तकलीफ, सीने में दर्द जैसी समस्या हो सकती है। डेंगू में कमजोरी या सिरदर्द की शिकायत होती है। यदि आपको कोविड-19 है , जो जरूरी नहीं कि आपको ये लक्षण दिखाई दें।

डेंगू और कोविड-19 के लक्षणों में अंतर-
कोविड होने पर बुखार, ठंड लगना, खांसी, सर्दी, गले में खराश, सांस लेने में कठिनाई, सिरदर्द, तेज थकान और कमजोरी ये सभी अलग-अलग तरीकों से डेंगू और मलेरिया के साथ दिख सकते हैं। डेंगू की शुरुआत तेज बुखार, गंभीर सिरदर्द से होती है। फिर जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द के अलावा मतली, पेट दर्द और दस्त की शिकायत भी हो सकती है।



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