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West Nile fever: केरल में फैला वेस्ट नाइल वायरस, तीन जिलों में अलर्ट, जानें क्या हैं ये खतरनाक बीमारी
West Nile fever in kerala: केरल में वेस्ट नाइल बुखार के बढ़ते मामलों को देखते हुए केरल सरकार ने तीन जिलों में हाई अलर्ट घोषित कर दिया है। समय रहते इस बुखार का इलाज नहीं किया गया तो ये जानलेवा साबित हो सकता है।
वेस्ट नाइल बुखार से खासकर बुजुर्गों, कमजोर इम्यूनिटी वाले लोग, बच्चे और पहले से ही बीमार चल रहे लोगों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। इस खतरनाक बुखार से बचने के लिए मच्छरों से बचाव के लिए सावधानी बरतना जरुरी है। आइए जानते हैं कि क्या होता है वेस्ट नाइल बुखार जिसके मामले सामने आते ही केरल सरकार को अर्लट जारी करना पड़ा।

वेस्ट नाइल बुखार क्या है ?
वेस्ट नाइल बुखार मच्छर जनित बीमारी है, जो आमतौर पर मच्छरों के काटने पर होती है। वैसे तो यह बीमारी किसी भी मच्छर के काटने पर हो सकती हैं लेकिन ज्यादात्तर इस बीमारी के पीछे क्यूलेक्स पिपियन्स नामक प्रजाति का मच्छर होता है।
अधिकांश लोगों में वेस्ट नाइल बुखार के लक्षण शुरुआत में नहीं दिखते हैं। मामला गंभीर होने पर मेनिन्जाइटिस या एन्सेफलाइटिस जैसी गंभीर रोग हो सकता हैं, जो न्यूरोलॉजिकल डैमेज की वजह भी बन सकता है।
कैसे फैलता हैं इंसानों में ये वायरस
संक्रमित मच्छर वेस्ट नाइल वायरस को फैलाने के लिए मुख्य कारक माने जाते हैं। वे आम तौर पर संक्रमित पक्षी के संपर्क में आने से यह वायरस मच्छर के अंदर पनपता है और यह जब इंसानों को काटता है तो इंसान भी संक्रमित हो जाता है। इसके लक्षण सामने आने में 14 दिनों का समय लग जाता है।
वेस्ट नाइल बुखार के लक्षण
अधिकांश लोगों में वेस्ट नाइल बुखार के हल्के या गंभीर लक्षण हो सकते हैं।
- बुखार, सिरदर्द
- मांसपेशियों में दर्द
- थकान, त्वचा पर लाल चकत्ते,
- मतली और उल्टी
वेस्ट नाइल बुखार के गंभीर लक्षण
वेस्ट नाइल बुखार में स्थिति गंभीर में ये नजर आ रहे हैं।
- तेज बुखार, गंभीर सिरदर्द
- गर्दन में अकड़न
- भ्रम
- कमजोरी
- दौरा
- कोमा जैसे लक्षण आ सकते हैं।
वेस्ट नाइल बुखार होने पर हो सकते हैं ये खतरे
वेस्ट नाइल बुखार के गंभीर लक्षण होने पर शरीर पर ये सभी समस्याएं नजर आ सकती हैं।
- मेनिन्जाइटिस (मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी की झिल्लियों की सूजन)
- एन्सेफलाइटिस (मस्तिष्क की सूजन)
- मायलाइटिस (रीढ़ की हड्डी की सूजन)
- मेनिन्जोएन्सेफलाइटिस (मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी दोनों की सूजन) जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
इलाज
अभी तक इस वायरस के इलाज के लिए कोई टीका नहीं बना है। इस बीमारी का बचाव ही इलाज है। इसलिए सोते समय मच्छरदानी का इस्तेमाल करें और आसपास गंदगी और गंदा पानी इक्ट्ठा न होने दें।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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