Latest Updates
-
Ganesh Chaturthi Decoration Ideas: गणेश चतुर्थी पर ऐसे सजाएं बप्पा का दरबार, कम खर्च में ये आइडियाज आएंगे काम -
Hartalika Teej 2026: हरतालिका तीज पर हाथों में लगी मेहंदी का चाहती हैं डार्क कलर, तो आजमाएं ये 4 आसान टिप्स -
Modak Recipe: गणेश चतुर्थी पर बप्पा के लिए घर पर बनाएं उनके प्रिय उकडिचे मोदक, जानें इसकी आसान रेसिपी -
Hartalika Teej 2026: हरतालिका तीज का व्रत कब है? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व -
ना मूर्ति, ना पुजारी, सूर्यास्त के बाद एंट्री भी मना, जानिए फिल्म 'The Vvaan' वाले वन देवी मंदिर का रहस्य -
नेपाल में बाढ़ के बाद भूकंप, इंडोनेशिया में फटा ज्वालामुखी, क्या बाबा वेंगा की भविष्यवाणी हुई सच? -
Pithori Amavasya 2026: आज या कल, पिठोरी अमावस्या कब है? जानें सही तारीख, स्नान-दान का शुभ मुहूर्त और महत्व -
World Suicide Prevention Day 2026: क्यों मनाया जाता है विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस? जानें इसका इतिहास और महत्व -
तांबे के बर्तन में पानी पीने से मिलेंगे ये 5 फायदे, डायजेशन के साथ इम्यूनिटी भी होगी मजबूत -
Ganesh Chaturthi 2026: कब है गणेश चतुर्थी? जानें तिथि, गणपति स्थापना का शुभ मुहूर्त और विसर्जन की तारीख
Online Gaming की जाल में फंसकर जान गंवा रहे हैं युवा, कैसे ये लत तबाह कर देती हैं आपकी मेंटल हेल्थ
केस नम्बर 1 : कर्नाटक के कलबुर्गी में ऑनलाइन जुए की लत में फंसे बीएससी नर्सिंग अंतिम वर्ष के छात्र सोमनाथ चिदरी (22) ने कर्ज न चुकाने की वजह से 5 दिसंबर को आत्महत्या कर ली। इस युवक ने ऑनलाइन गेमिंग के लिए 4 से 10 प्रतिशत दर के ब्याज से 80 लाख रुपये का कर्जा लिया हुआ था, कर्ज न चुका पाने की नाकामी के वजह से युवक ने ऐसा कदम उठाया।
केस नम्बर 2 : उत्तराखंड के रुद्रपुर में 12वीं के छात्र ने ऑनलाइन गेमिंग के कर्ज के कारण 5 दिसंबर को आत्महत्या कर ली। परिवार वालों के मुताबिक मना करने के बावजूद भी इस 18 वर्षीय छात्र की गेमिंग की लत नहीं छूट रही थी, वो दोस्तों से उधार लेकर खेलता रहा। मगर भारी कर्ज के चलते वह लंबे समय से तनाव में था।
केस नम्बर 3: झारखंड के जमशेदपुर में कदमा थाना क्षेत्र की 19 वर्षीय बीबीए छात्रा ने ऑनलाइन गेमिंग के तनाव में आकर टोल ब्रिज से कूदकर 4 दिसंबर को आत्महत्या कर ली।

हाल ही में हुए इन तीन मामलों में 18 से 22 साल के युवाओं ने ऑनलाइन गेमिंग की लत और कर्ज के दबाव में जान गंवा दी। जिस उम्र में युवा भविष्य संवारने का सपना देखते हैं, उस दौर में यह लत उन्हें डिप्रेशन में धकेल रही है। आज के समय में ऑनलाइन गेमिंग की लत शराब से भी अधिक खतरनाक साबित हो रही है। लोग इसमें लाखों-करोड़ों रुपये गंवा बैठते हैं और कर्ज न चुका पाने की असफलता उन्हें आत्महत्या जैसा कदम उठाने पर मजबूर कर देती है।
आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि कैसे यह ऑनलाइन गेमिंग की लत युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य और जीवन पर गंभीर खतरा बन रही हैं और कैसे इस चुंगल की गिरफ्त में युवा फंस जाते है और कैसे इस लत से छुटकारा पाएं।
ऑनलाइन गेमिंग की लत क्या है?
गेमिंग डिसऑर्डर एक मानसिक बीमारी है, जिसे विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) भी मानता है। यह तब होता है जब व्यक्ति गेम खेलने का आदी हो जाता है और उसे छोड़ नहीं पाता। गेम की लत के कारण व्यक्ति की कामकाजी जिंदगी, नींद, डाइट और अन्य जीवनशैली प्रभावित होने लगती है। जब गेमिंग की आदत व्यक्ति के रोजमर्रा के काम, रिश्तों, पढ़ाई और अन्य महत्वपूर्ण गतिविधियों को प्रभावित करने लगे, तो यह संकेत होता है कि व्यक्ति गेमिंग डिसऑर्डर का शिकार हो चुका है। इस स्थिति को नजरअंदाज करना मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है।
यह लत मानसिक तनाव, समय की बर्बादी और कर्ज जैसी समस्याओं को जन्म देती है, जिससे व्यक्ति मानसिक और शारीरिक रूप से प्रभावित होने लगता है।
कैसे पता चलता है बच्चे को लग गई है ऑनलाइन गेमिंग की लत
- गेम खेलने की तीव्र इच्छा और बार-बार खेलने की आदत।
- दिनभर मोबाइल में देखते रहना
- पढ़ाई, काम या परिवार को इग्नोर करना।
- समय सीमा तय करने के बावजूद लंबे समय तक गेम खेलना।
- तनाव, गुस्सा, या चिड़चिड़ापन जब गेम खेलने से रोका जाए।
- शारीरिक गतिविधि और नींद की कमी।
- ऑनलाइन गेमिंग के लिए हर समय पैसे को मांग करते रहना।

गेम की लत बिगाड़ रही हैं मेंटल हेल्थ
मनोरोग विशेषज्ञ डॉक्टर कपिल शर्मा के अनुसार, गेम की लत का धीरे-धीरे बच्चों की मानसिक सेहत पर गहरा असर पड़ता है। गेम खेलते समय बच्चे का मन किसी और काम में नहीं लगता। वह अकेले रहना पसंद करने लगता है और असल जिंदगी से कटाव महसूस करता है, जिससे मानसिक स्वास्थ्य बिगड़ने लगता है।
गेम की दुनिया में डूबे बच्चे बाहरी दुनिया को भी गेम का हिस्सा मानने लगते हैं। उनके व्यवहार में बदलाव आ जाता है; वे लोगों से मिलना-जुलना और बाहर जाना कम कर देते हैं। बच्चा गेम की कमांड को असली जिंदगी में फॉलो करने लगता है, जिससे उसकी सोचने-समझने की शक्ति कम हो सकती है। गंभीर मामलों में यह आत्मघाती प्रवृत्तियों या दूसरों को नुकसान पहुंचाने का कारण बन सकता है।
कैसे करें बचाव?
बच्चे को मोबाइल और लैपटॉप से दूर रखें: बच्चों को टेक्नोलॉजी से दूर रखने की कोशिश करें ताकि वे गेमिंग और इंटरनेट के नकारात्मक प्रभावों से बच सकें।
बच्चे को मोबाइल न दें: बच्चों को मोबाइल सिर्फ जरूरी काम के लिए दें, ताकि वे खेल या सोशल मीडिया में अधिक समय न बिता सकें।
मॉनिटरिंग करें: अगर बच्चे के पास मोबाइल या लैपटॉप है, तो उसकी गतिविधियों की निगरानी रखें। यह सुनिश्चित करें कि वे गेमिंग या अन्य लत लगाने वाली गतिविधियों में शामिल न हों।
ज्यादा वक्त बिताने पर ध्यान दें: यदि बच्चा किसी साइट पर अधिक समय बिता रहा है, तो उसे लेकर सतर्क हो जाएं।
बच्चों के साथ खेलें: बच्चों के साथ शतरंज, लूडो या अन्य आउटडोर गेम्स खेलें ताकि वे मानसिक और शारीरिक रूप से सक्रिय रहें।
फालतू ऐप्स से बचाएं: बच्चों के फोन में बेवजह के एप्स डाउनलोड न होने दें और रात को उन्हें मोबाइल न दें।
इस तरह से आप बच्चों को ऑनलाइन गेमिंग की लत से बचा सकते हैं।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications
