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क्या है रानीखेत रोग जिसका मामला हाईकोर्ट पहुंचा, जानें कितनी खतरनाक है बीमारी
Ranikhet Disease : उत्तराखंड का मशहूर हिल स्टेशन रानीखेत इन दिनों सुर्खियों में है। इस बार वजह इस टूरिस्ट स्पॉट की खूबसूरत वादियां नहीं बल्कि इस जगह के नाम से पहचाने जाने वाली पक्षियों की एक काफी घातक बीमारी है।
इस बीमारी के नाम से इस खूबसूरत टूरिस्ट स्पॉट की छवि खराब होने की वजह से इस बीमारी का नाम बदलने का मामला कोर्ट पहुंचा है। इसके बाद हाईकोर्ट ने उत्तराखंड के रानीखेत के नाम पर रखी बीमारी का नाम बदलने के आदेश जारी किए हैं।
आइए इसी बीच जानते हैं कि रानीखेत बीमारी क्या है और इसके क्या लक्षण हैं?

रानीखेत बीमारी क्या है?
रानीखेत बीमारी को न्यूकैसल बीमारी के नाम से भी जाना जाता है। यह एक खतरनाक संक्रामक बीमारी है जो पक्षियों को संक्रमित करती है खासकर मुर्गियों को। पोल्ट्री फार्म की मुर्गियां जल्दी इस बीमारी की जद में आती है। इस वजह से इसे पोल्ट्री डिजीज भी कहा जाता है। इस बीमारी से संक्रमित होने के बाद मुर्गियां खाना-पीना बंद कर देती हैं और कमजोरी की वजह से कुछ दिन बाद उनकी मौत हो जाती है। रानीखेत वायरस के चपेट में आने वाली मुर्गियों या अन्य पक्षियों का 50 से 60 प्रतिशत तक मरना तय होता है।
लक्षण
- भूख न लगना
- खांसी
- हांफना
- नाक से पानी आना
- आंखों से पानी आना
- हरे रंग का दस्त
- सांस लेने में तकलीफ
- गर्दन का हिलना
- पक्षियों के पैरों एवं पंखों का लकवाग्रस्त होना।
कैसे न्यू कैसल रोग का नाम पड़ा रानीखेत डिजीज?
रानीखेत बीमारी का पहला मामला 1926 को इंडोनेशिया के शहर जावा के पोल्ट्री फॉर्म में पाया गया था। इसके बाद 1927 में इंग्लैंड के न्यूकैसल अपॉन टाइन शहर में इस बीमारी के मामले मिले। वैज्ञानिकों ने इस वायरस का नाम NDV (Newcastle Disease Virus) और 'न्यूकैसल रोग' रख दिया। जो इंग्लैंड के शहर (न्यूकैसल अपॉन टाइन) का नाम पर रखा गया था लेकिन अंग्रेंज इस बात से खुश नहीं थे।
1928 में उत्तराखंड के रानीखेत में मुर्गियों में जब यह बीमारी फैली तो ब्रिटिश वैज्ञानिकों ने न्यू कैसल रोग का नाम बदलकर भारत के इस खूबसूरत टूरिस्ट प्लेस पर रानीखेत डिजीज रख दिया। तब से ही मुर्गियों में फैलने वाले इस वायरस को दुनिया के कई देशों में रानीखेत रोग के नाम से पहचाने जाने लगा।
कहां है रानीखेत?
उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले से रानीखेत 50 किलोमीटर दूर है। 1869 में, अंग्रेजों ने यहां कुमाऊं रेजिमेंट का मुख्यालय स्थापित किया था। यहां आसपास घूमने के लायक बेहद सारी पर्यटन स्थल है।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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