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STSS बैक्टीरिया क्या है, जिससे 48 घंटों में हो जाती है मौत, जापान में फैली ये बीमारी कितनी खतरनाक?
What is streptococcal toxic shock syndrome (STSS) : इस समय दुनियाभर में जहां एक तरफ बर्ड फ्लू का खतरा मंडरा रहा है। वहीं अब एक नई बीमारी ने दस्तक दे दी है। जापान में एक दुर्लभ "मांस खाने वाले बैक्टीरिया" के वजह से ऐसी घातक बीमारी फैल रही है जिससे मरीज की 48 घंटे के अंदर मौत हो सकती है।
इस बैक्टीरिया को 'स्ट्रेप्टोकोकल टॉक्सिक शॉक सिंड्रोम' (Streptococcal Toxic Shock Syndrome - STSS) कहा जाता है। ब्लूमर्ग ने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इन्फेक्शियस डिजीज का हवाला देते हुए कहा है कि इस साल 2 जून तक स्ट्रेप्टोकोकल टॉक्सिक शॉक सिंड्रोम (STSS) के 977 मामले दर्ज किए गए जो कि चिंता पैदा करने वाला विषय है।
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इन्फेक्शियस डिजीज इस बीमारी को 1999 से मॉनिटर कर रही है। संस्थान के मुताबिक इस साल इस घातक वायरस के मामलों में बढ़ोतरी देखने को मिली है। साल 2022 के अंत में कम से कम पांच यूरोपीय देशों में इस मामले की पुष्टि हुई थी।

आइए जानते है क्या है ये खतरनाक बीमारी और इसके लक्षण-
STSS का इंफेक्शन कैसे फैलता है?
क्लीवलैंड क्लीनिक की रिपोर्ट के मुताबिक टॉक्सिक शॉक सिंड्रोम (STSS ) तब हो सकता है जब बैक्टीरिया आपके शरीर पर खुले घावों, कटों या घावों के संपर्क में आता है। यह स्किन इंफेक्शन, सर्जरी, प्रसव या नाक से खून बहने के कारण हो सकता है, जिसे रोकने के लिए जरूरी उपचार की जरूरत होती है। इसके अलावा पीरियड में टैम्पोन के इस्तेमाल से भी यह बैक्टीरिया संक्रमण दे सकता है।
इन लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत?
50 साल से अधिक आयु के लोगों में इस बीमारी का खतरा ज्यादा रहता है। डब्लूएओ ने इस बैक्टीरिया को ग्रुप ए स्ट्रेप्टोकोकस (GAS) में शामिल किया है। जो अक्सर गले और त्वचा पर ज्यादा पाया जाताहै। आम तौर पर बच्चों को सूजन और गले में खराश की समस्या का सामना करना पड़ता है। इसे "स्ट्रेप थ्रोट" के रूप में जाना जाता है।
यह है लक्षण
- बदन दर्द
- सूजन
- बुखार
- लो ब्लडप्रेशर
- नेक्रोसिस
- सांस लेने में समस्या
- आर्गन फेल
टोक्यो वूमेन मेडिकल यूनिवर्सिटी में संक्रामक रोगों के प्रोफेसर केन किकुची के मुताबिक " लक्षण दिखने के बाद अधिकांश मरीजों की मौतें 48 घंटों के भीतर हो जाती हैं। इस बैक्टीरिया के चपेट में आने वाले लोग मरीज को सुबह पैर में सूजन दिखती है, दोपहर तक यह घुटने तक फैल सकती है और 48 घंटों के अंदर वह मर सकता है।"
बचाव के कुछ उपाय
किकुची ने इस बैक्टीरिया से बचाव के कुछ उपाय बताए है, जैसे- हाथ साफ रखें और खुले घावों का उपचार कराएं। यह बैक्टररिया मरीजों की आंतों में मिल सकता है, जिसकी वजह मल के दूषित हाथ हो सकते हैं।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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