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Bleeding Eye Virus से अब तक 15 की मौत, अफ्रीका जाने वाले सावधान रहें, WHO ने किया अलर्ट
Bleeding Eye Virus : दुनिया भर में मारबर्ग (Marburg), एमपॉक्स (Mpox) और ओरोपाउच (Oropouche) वायरस तेजी से फैल रहे हैं, जिससे कम से कम 17 देश प्रभावित हुए हैं। मारबर्ग वायरस, जिसे 'ब्लीडिंग आई' (bleeding eye) वायरस भी कहा जाता है, रवांडा में 15 लोगों की जान ले चुका है और सैकड़ों लोग संक्रमित हैं।
WHO के अनुसार, मारबर्ग एक गंभीर बीमारी है जिसकी मृत्यु दर लगभग 50% है। यह वायरस इंसान से इंसान में रक्त, लार और अन्य शारीरिक तरल पदार्थों के जरिए फैलता है, और इसकी गंभीरता के कारण इसके संक्रमण से बचना आवश्यक है।
एमपॉक्स के मामले भी बढ़ रहे हैं, विशेष रूप से मध्य अफ्रीका में, और यूके में भी इसके गंभीर मामले सामने आए हैं। ओरोपाउच वायरस, जो मिज बाइट्स से फैलता है, दक्षिण अमेरिका और कैरिबियन में 10,000 से अधिक लोगों को संक्रमित कर चुका है। यात्रियों को इन वायरसों से बचने के लिए विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

कितना खतरनाक है मारबर्ग वायरस
अफ्रीका के रवांडा में कहर बरपा रहा है। इसने अब तक 15 लोगों की जान ले ली है और सैकड़ों लोगों को संक्रमित किया है। इसका नाम आंखों से खून आने के लक्षण के कारण पड़ा है। WHO ने इस वायरस को गंभीर बीमारी बताते हुए इसकी औसत मृत्यु दर लगभग 50% दर्ज की है। पिछले प्रकोपों में, मृत्यु दर 24% से 88% तक रही है। यह वायरस अफ्रीका के अन्य देशों में भी फैलने की आशंका जताई जा रही है, जो पहले से ही अन्य वायरसों के प्रकोपों से जूझ रहे हैं, जिससे स्थिति और भी जटिल हो सकती है।
मारबर्ग वायरस के लक्षण
WHO के अनुसार, मारबर्ग वायरस के प्रारम्भिक लक्षण 2 से 21 दिनों के बाद दिखाई देते हैं, जिनमें बुखार, तेज सिरदर्द, अत्यधिक थकान, शरीर और मांसपेशियों में दर्द शामिल हैं। तीसरे दिन से गंभीर लक्षण जैसे पानी जैसे दस्त, पेट में ऐंठन, मतली, उल्टी और गैर-खुजली वाले दाने दिखाई देते हैं। पांचवे दिन से लक्षणों में नाक, मसूड़ों, योनि, आंख, मुंह और कानों से रक्तस्राव, उल्टी में ताजा रक्त, आंतरिक रक्तस्राव और अंडकोष की सूजन जैसी समस्याएं शामिल होती हैं। यह लक्षण आठ या नौ दिन बाद गंभीर हो सकते हैं, और मरीज की हालत खतरनाक हो सकती है।
डब्ल्यूएचओ ने इन बातों का ध्यान रखने को कहा
डब्ल्यूएचओ ने कहा है कि मारबर्ग वायरस से रिकवर होने के सात सप्ताह बाद तक यह वायरस सीमन के जरिए एक से दूसरे इंसान में फैल सकता है, इसलिए यौन रूप से सक्रिय लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
मारबर्ग से ठीक होने के बाद भी मरीजों को अपनी सेहत का ध्यान रखना चाहिए, क्योंकि वायरस शरीर के कुछ हिस्सों में रह सकता है। डॉक्टरों को ठीक हो चुके मरीज़ों और उनके साथी को संभावित खतरों के बारे में सूचित करना चाहिए। इसके अलावा, सुरक्षित यौन संबंध बनाने और कंडोम का इस्तेमाल करने की सख्त सलाह दी जाती है, ताकि वायरस के फैलने से बचा जा सके।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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