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डायबिटीज Type 1.5 क्या है? Type 1 और 2 से कितना है अलग, जानें लक्षण
What is type 1.5 diabetes : अब तक आपने टाइप 1 और टाइप 2 डायबिटीज के बारे में सुना होगा, लेकिन क्या आपने टाइप 1.5 डायबिटीज के बारे में सुना है? टाइप 1.5 डायबिटीज, जिसे Latent Autoimmune Diabetes in Adults (LADA) भी कहा जाता है, एक ऐसी बीमारी है जो टाइप 1 और टाइप 2 डायबिटीज के बीच की स्थिति होती है। इसे पहचानना मुश्किल होता है, क्योंकि इसके लक्षण धीरे-धीरे सामने आते हैं और यह शरीर को धीरे-धीरे नुकसान पहुँचाती है।
टाइप 1.5 डायबिटीज में शरीर की इम्यून सिस्टम बीटा कोशिकाओं को नुकसान पहुँचाती है, जिससे इंसुलिन का उत्पादन कम हो जाता है। इसका इलाज टाइप 1 डायबिटीज की तरह इंसुलिन से किया जाता है, लेकिन कभी-कभी दवाइयों की जरूरत भी हो सकती है।

टाइप 1.5 डायबिटीज क्या है?
फैमिली फिजिशियन डॉक्टर प्रवीण मंगलूणिया के अनुसार, टाइप 1.5 डायबिटीज, जिसे लेटेंट ऑटोइम्यून डायबिटीज इन एडल्ट्स (LADA) कहा जाता है, टाइप 1 और टाइप 2 डायबिटीज का मिश्रण है। यह बीमारी वयस्कों को प्रभावित करती है, जिसमें इम्यून सिस्टम पैनक्रियास को नुकसान पहुंचाता है, जिससे इंसुलिन का उत्पादन कम हो जाता है। यह टाइप 1 डायबिटीज की तरह इम्यून सिस्टम के हमले से जुड़ी होती है, लेकिन टाइप 2 की तरह धीरे-धीरे विकसित होती है। इसका इलाज टाइप 1 डायबिटीज से अलग हो सकता है।
Type 1 और 2 से कितना है अलग?
टाइप 1.5 डायबिटीज टाइप 1 और टाइप 2 से अलग है क्योंकि इसमें इम्यून सिस्टम पैनक्रियास पर हमला करता है, जैसा टाइप 1 डायबिटीज में होता है, लेकिन यह धीरे-धीरे विकसित होती है, जैसे टाइप 2 डायबिटीज। इसका इलाज टाइप 1 से अलग हो सकता है, जिसमें दवाएं और इंसुलिन दोनों की आवश्यकता हो सकती है।
टाइप 1.5 डायबिटीज के लक्षण
टाइप 1.5 डायबिटीज के लक्षण शुरुआती स्टेज में टाइप 2 डायबिटीज जैसे होते हैं, जैसे अत्यधिक प्यास लगना, बार-बार पेशाब आना, थकान, धुंधला दिखना और वजन में बदलाव। जैसे-जैसे बीमारी बढ़ती है, इंसुलिन का उत्पादन कम होने के कारण शारीरिक कमजोरी और अन्य गंभीर लक्षण सामने आते हैं। इससे शरीर में खतरनाक रूप से एसिड का निर्माण होता है, जो हार्ट डिजीज, किडनी की समस्या और विजन लॉस का कारण बन सकता है। इसलिए, समय पर इलाज करना जरूरी है।
टाइप 1.5 डायबिटीज का ट्रीटमेंट
टाइप 1.5 डायबिटीज का ट्रीटमेंट टाइप 1 और टाइप 2 दोनों का मिश्रण होता है। इस बीमारी में मरीजों को इंसुलिन की आवश्यकता हो सकती है, जैसे टाइप 1 डायबिटीज में होता है। शुरुआत में यदि ब्लड शुगर का स्तर कंट्रोल में रहता है, तो दवाओं का भी इस्तेमाल किया जा सकता है, जो टाइप 2 डायबिटीज में मदद करती हैं। इसके अलावा, सही आहार और नियमित शारीरिक गतिविधि इस बीमारी को कंट्रोल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। मरीजों को लाइफस्टाइल चेंजेस जैसे वजन नियंत्रण, स्वस्थ आहार और व्यायाम पर ध्यान देना चाहिए।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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