Latest Updates
-
World Asthma Day Quotes 2026: सांसों पर सबका हक! विश्व अस्थमा दिवस पर भेजें खास कोट्स, फैलाएं जागरूकता -
Aaj Ka Rashifal, 4 May 2026: सोमवार को बन रहे हैं 6 शुभ योग, सिंह और कन्या राशि वालों की खुलेगी किस्मत -
Mothers Day Wishes For Sasu Maa: सास-बहू के रिश्ते में घोलें प्यार की मिठास, भेजें ये शुभकामना संदेश -
Mango Chutney Recipe: कच्चे आम की चटनी बनाने की सबसे आसान विधि, जो पेट को देगी ठंडक -
क्या आप भी पीले दांतों से शर्मिंदा हैं? रसोई में रखी ये 5 चीजें साफ कर देंगी सालों से जमी गंदगी -
शनि, राहु और मंगल की चाल बदलेगी बंगाल की सत्ता? आचार्य विनोद कुमार ओझा ने की हैरान करने वाली भविष्यवाणी -
मई के दूसरे रविवार को ही क्यों मनाया जाता है Mother's Day? जानें इसके पीछे की भावुक करने वाली कहानी -
Gond Katira: इन 3 लोगों को गलती से भी नहीं लेना चाहिए गौंद कतीरा? वरना अस्पताल जाना तय -
दिल्ली के विवेक विहार में फटा एसी, गई कई लोगों की जान, जानें AC में फटने व आग लगने के कारण -
World Laughter Day 2026 Jokes: टेंशन को कहें टाटा! अपनों को भेजें ये फनी जोक्स, नहीं रुकेगी हंसी
Diwali Ritual : दिवाली की रात क्यों बनाई जाती है जिमीकंद की सब्जी, जानें वजह
Why do we eat Jimikand on Diwali: नॉर्मली हमारे घरों में सूरन या जिमीकंद की सब्जी आम दिनों में कम ही बनती होगी लेकिन कभी सोचा है कि दिवाली के दिन ज्यादातर घरों में इसकी सब्जी क्यों बनाई जाती है? खासकर उत्तर प्रदेश के अधिकतर घरों में दिवाली के दिन सूरन या जिमीकंद की सब्जी बनानी अनिवार्य है। दरअसल दिवाली की इस परांपरा के पीछे एक वजह छुपी हुई है।
आइए जानते है किसूरन हमारे शरीर के लिए किस तरह से फायदेमंद है और मां लक्ष्मी से इस सब्जी का क्या कनेक्शन हैं?

बनारस से आई परांपरा
हिन्दू धर्म में दिवाली पर सूरन की सब्जी बनाने और खाने की परंपरा काशी यानी बनारस की देन है। वहां दिवाली के दिन यह सब्जी जरुर बनाई जाती है। यह गोलाकार एक ऐसी सब्जी होती है, जो आलू की तरह मिट्टी के नीचे उगाई जाती है और जड़ खोद कर इसे निकाला जाता है, कहते हैं कि इसे निकालने के बाद भी इसकी जड़ें मिट्टी में ही रह जाती हैं और अगली दिवाली तक उसी जड़ से दोबारा सूरन तैयार हो जाती है। इसकी यही विशेषता दिवाली पर्व की उन्नति और खुशहाली से इसे जोड़ती है, जिसके चलते इसे दिवाली के दिन घर में बनाना और खाना दोनों ही बेहद शुभ माना जाता है।
माना जाता है कि दिवाली के दिन इसे खाने से परिवार में सुख-समृद्धि आती है क्योंकि इस कंद के भीतर खुद धन की देवी लक्ष्मी का वास होता है। आखिर इस मान्यता के पीछे क्या कारण हो सकता है? मान्यताओं केअनुसार जिमीकंद या रतालू का पौधा मिट्टी में आसानी से उग जाता है। इसे ज्यादा पानी की ज़रूरत नहीं पड़ती। कंद भी आसानी से फैलता है, इसलिए इसे प्रजनन और समृद्धि से जोड़ा जाता है। एक बार उगने के बाद इस सब्ज़ी की कभी कमी नहीं पड़ती और यह आपकी सारी ज़रूरतें पूरी करती है।
काटना, बनाना और खाना तीनों मुश्किल
सूरन की सब्जी देखने में गोलाकार होती है इसे काटना, पकाना दोनों आसान नहीं है, इसे काटते समय हाथों में खुजली होने लगती है, यह आलू या दूसरी सब्जियों की तरह जल्दी नहीं पकती है। इसे खाने से गले में खराश भी होने लगती है। इसे काटने के लिए विशेष विधि और सामान लगते हैं, इसे तेल से सने हाथों से इसे काटना चाहिए और खराश खत्म करने के लिए नींबू का रस डालकर छोड़ा जाता है।
डायबिटीज मरीज भी खा सकते हैं सूरन
शुगर में जिमीकंद बेहद लाभदायक है। जिमीकंद में ग्लूकोज की मात्रा कम होती है। शर्करा ना होने से डायबिटीज वाले इसे आराम से खा सकते हैं और हर सप्ताह इसके सेवन से बहुत से लोगों का ब्लड शुगर सुधरता है. जिमीकंद के फायदे बहुत हैं, इसलिए इसे त्योहार से जोड़ दिया गया. परंपरा बना देने से सभी लोग इसे इस्तेमाल करने लगे हैं और बच्चे भी इसे खा सकेंगे। मान्यता है कि सब्जी के इसी गुण के चलते इसे दीपावली में खाना अनिवार्य बना दिया गया है।
घाना में भी जिमीकंद का है महत्व
जहां उत्तर भारत के कई हिस्सों में जिमीकंद को लक्ष्मी मां का फल मान कर दिवाली के दिन खाना शुभ माना जाता है, वहीं घाना के एक ट्राइबल फेस्टिवल में कंद को सुख-समृद्धि देने वाले भोजन के रूप में पूजा जाता है। एक लोककथा के अनुसार, अकाल के दौरान एक शिकारी ने जंगल में एक कंद को उगते देखा। सिर्फ अपनी भूख मिटाने के लालच में उसने उसे कबीले में ले जाने के बजाए ज़मीन में छुपा दिया। कुछ दिन बाद जब वह वापस उसे लेने आया तो देखा कि कंद का पौधा बढ़ चुका था और उसमें से इतने कंद निकल आए थे, जो अकाल का प्रकोप झेल रहे पूरे क़बीले की भूख मिटाने के लिए काफी थे। बस, तभी से वहां की जनजातियां इसे सुख-समृद्धि देने वाले फल के रूप में पूजती हैं। तो इस दिवाली, जिमीकंद को रिच ग्रेवी में पकाते हुए धरती मां से मिले इस तोहफे का शुक्रिया अदा कीजिए और दुआ कीजिए कि आने वाला साल सबकी ज़िंदगी में समृद्धि लेकर आए।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications