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दिमाग को मजबूत बनाने के लिए हेल्दी फैट्स क्यों जरूरी? डॉक्टर ने बताया किन चीजों को करें डाइट में शामिल
Mental Resilience And Healthy Fats: हम सब कहते हैं कि हमें खुश रहना है, स्ट्रेस नहीं लेना चाहिए और खुद का ख्याल रखना चाहिए। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि हमारा दिमाग रोज क्या खा रहा है? थकान, चिड़चिड़ापन या ध्यान न लगना सिर्फ काम की वजह से नहीं, बल्कि हमारे खाने की आदतों से भी जुड़ा होता है। जी हां, जो कुछ भी हम खाते हैं, वह हमारे मूड, सोच और मानसिक ताकत को प्रभावित करता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, दुनिया भर में हर चार में से एक व्यक्ति मानसिक स्वास्थ्य विकारों से जूझ रहा है और पोषण इसमें सबसे अधिक अनदेखा किया जाने वाला कारक है। मानसिक मजबूती के लिए केवल मेडिटेशन या पॉजिटिव सोच ही नहीं, बल्कि सही फैट, संतुलित डाइट, पानी और गट हेल्थ का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी है। सही फैट्स और बैलेंस्ड न्यूट्रिशन से दिमाग शांत, फोकस्ड और तनाव-मुक्त बन सकता है। आज इस लेख में मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट, टेडएक्स स्पीकर और ऑथर डॉ रचना खन्ना सिंह से जानते हैं कि दिमाग को स्वस्थ और मजबूत रखने के लिए कौन-कौन से फैट्स और आदतें जरूरी हैं।
दिमाग को चाहिए सही फैट
हमारा दिमाग करीब 60 प्रतिशत फैट से बना होता है। यही फैट उसकी कोशिकाओं को मजबूत बनाता है ताकि वे जल्दी और साफ तरीके से काम कर सकें। अगर शरीर को सही फैट नहीं मिलता, तो सोचने की गति धीमी हो जाती है, ध्यान कम लगता है और मन जल्दी थक जाता है। मछली, बादाम, अलसी के बीज, जैतून और पाम ऑयल में पाए जाने वाले ओमेगा-3 और मोनोअनसैचुरेटेड फैट्स दिमाग को पोषण देते हैं और सूजन को कम करते हैं। जैतून तेल में मौजूद ओलिक एसिड और पॉलिफिनॉल्स दिमाग में ब्लड फ्लो बढ़ाते हैं और डिमेंशिया जैसी बीमारियों से बचाते हैं। वहीं, घी में मौजूद ब्यूटिरेट आंतों की सेहत सुधारता है और दिमाग को शांत रखता है।पाम ऑयल में पाया जाने वाला विटामिन E टॉकॉट्रिनॉल दिमाग को ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से बचाता है और मेमोरी को बेहतर बनाता है।

फोकस और स्ट्रेस रिकवरी में फैट की भूमिका
अक्सर लोग मानते हैं कि फैट सेहत के लिए खराब है, लेकिन असल में सही फैट दिमाग का ईंधन है। यह न सिर्फ ध्यान और एकाग्रता बढ़ाता है, बल्कि स्ट्रेस के बाद दिमाग को रिकवरी करने में भी मदद करता है। ओमेगा-3 फैटी एसिड कोर्टिसोल जैसे स्ट्रेस हार्मोन को संतुलित करते हैं और न्यूरॉन्स को रिपेयर करने में मदद करते हैं। इसी वजह से हेल्दी फैट लेने वाले लोग ज्यादा फोकस्ड, शांत और पॉजिटिव रहते हैं।
जब डाइट दिमाग को नुकसान पहुंचाती है
ज्यादा खाना ही नहीं, बहुत कम खाना या फैट से परहेज करना भी दिमाग के लिए हानिकारक होता है। एक स्टडी के मुताबिक, जो लोग बहुत कम कैलोरी लेते हैं, उनमें डिप्रेशन, थकान और एंग्जायटी ज्यादा पाई जाती है। दिमाग को काम करने के लिए ग्लूकोज और हेल्दी फैट दोनों की जरूरत होती है।
ये ही ऊर्जा देकर सेरोटोनिन और डोपामिन जैसे 'मूड हार्मोन' बनाते हैं। अगर डाइट बहुत स्ट्रिक्ट हो या फैट बहुत कम हो जाए, तो मूड जल्दी बिगड़ता है, ध्यान भटकता है और मन बेचैन रहता है।
मेडिटेरेनियन और भारतीय डाइट दोनों हैं बेस्ट
मेडिटेरेनियन डाइट यानी जैतून तेल, मछली, मेवे और सब्जियों से भरपूर भोजन को दिमाग के लिए सबसे अच्छा माना जाता है। एक अध्ययन के अनुसार। सिर्फ 10 हफ्तों तक इस डाइट को अपनाने से याददाश्त और मूड दोनों में सुधार देखा गया है। भारतीय परंपरा में भी दिमाग को मजबूत करने वाले खाद्य पदार्थ हमेशा से शामिल रहे हैं। घी, नारियल तेल, सरसों तेल, बीज और हल्दी हमारे भोजन का हिस्सा रहे हैं। हल्दी का करक्यूमिन दिमागी कोशिकाओं को ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से बचाता है। ICMR की रिपोर्ट के अनुसार, जो लोग पारंपरिक भारतीय भोजन लेते हैं, उनमें चिंता और थकान 25-30% तक कम पाई गई है।
गट हेल्थ और दिमाग का रिश्ता
हमारा गट यानी पेट भी हमारा दूसरा दिमाग है। शरीर का करीब 90 प्रतिशत सेरोटोनिन (मूड और नींद कंट्रोल करने वाला हार्मोन) यहीं बनता है। इसलिए दिमाग को स्वस्थ रखने के लिए पेट का स्वस्थ होना जरूरी है। इसके लिए आप अपनी डाइट में दही, फर्मेंटेड फूड, ग्रीन टी और फाइबर से भरपूर चीजें गुड बैक्टीरिया को बढ़ाने वाली चीजें जरूर शामिल करें, जो गट को हेल्दी रखने में मदद करती हैं। वहीं, जंक या प्रोसेस्ड फूड गट बैक्टीरिया को नुकसान पहुंचाते हैं, इसलिए इन्हें अपनी डाइट से बाहर करें। इसके कारण मूड बिगड़ता है और डिप्रेशन का खतरा बढ़ता है।
हाइड्रेशन और माइंडफुल ईटिंग भी जरूरी
हमारे दिमाग का लगभग 75 प्रतिशत हिस्सा पानी से बना होता है। अगर शरीर में पानी की कमी हो जाए तो सिरदर्द, थकान और चिड़चिड़ापन बढ़ जाता है।
सिर्फ कुछ हफ्तों तक अपने खानपान और पानी की मात्रा पर ध्यान देने से नींद और सोचने की क्षमता दोनों बेहतर हो सकती हैं। साथ ही, धीरे-धीरे और ध्यान से खाना (mindful eating) दिमाग को ज्यादा फायदा पहुंचाता है। जब हम जल्दबाजी में या मोबाइल देखकर खाते हैं, तो दिमाग को पता ही नहीं चलता कि पेट भर चुका है। ऐसे में ओवरईटिंग और सुस्ती दोनों बढ़ जाती हैं।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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