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अनियमित माहवारी के कारण

अनियमित या समय से माहवारी न आना कोई नई बात नहीं है। ज्यादातर महिलाएं माहवारी की समस्याओं से परेशान रहती है लेकिन अज्ञानतावश या फिर शर्म या झिझक के कारण लगातार इस समस्या से जूझती रहती हैं। समय पर पीरियड्स का ना होना कोई भयंकर बात नहीं है लेनिक ऐसा क्यूं हो रहा है इसके बारे में जानना बहुत जरुरी है। अनियमित माहवारी क्या होती है? अनियमित पीरियड वह होता है जिसमें अवधि एक चक्र से दूसरे चक्र तक लम्बी हो सकती है, या वे बहुत जल्दी-जल्दी होने लगते हैं या असामान्य रूप से लम्बी अवधि से बिल्कुल बिखर जाते हैं।
किशोरावस्था के पहले कुछ वर्षों में अनियमित पीरियड़ होना क्या सामान्य बात है?हां, शुरू में पीरियड अनियमित ही होते हैं। हो सकता है कि लड़की को दो महीने में एक बार हो या एक महीने में दो बार हो जाए, समय के साथ-साथ वे नियमित होते जाते हैं। लेकिन अगर आप इस समस्या से अभी तक जूझ रही हैं तो इसके लिये कारण जानना जरुरी है।

प्रेगनेंसी
जब महिला प्रेगनेंट होती है तो उसके अंदर के हार्मोन लेवल अपनी तरह से काम करने लगते हैं, जिससे पीरियड्स बंद हो जाते हैं। कुछ केस में महिलाओं को हल्के धब्बे दिखते हैं या फिर लेट पीरियड्स आते हैं।

तनाव
तनाव लेने से स्ट्रेस हार्मोन के ऊपर सीधा असर पड़ता है जो कि एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन (दो सेक्स हार्मोन) की शरीर से ज्यादा या कम उत्पत्ती के लिये जिम्मेदार होता है। अगर खून की धारा में स्ट्रेस हार्मोन बढ जाता है तो आपकी साइकिल पर असर पडे़गा।

आहार
अगर आप मोटी है और ऐसी डाइट खा रही हैं जो कार्बोहाइड्रेट या वजन बढाने के लिये जाना जाता है तो, शरीर में कुछ तरह के हार्मोन लेवल में परिवर्तन आ सकता है। यही कारण वजन घटाने पर भी होता है।

अत्यधिक व्यायाम
माहावारी करवाने के लिये हमारे शरीर को शक्ति चाहिये और अगर इसी शक्ति को आप जिम में जा कर बर्न कर देती हैं, तो शरीर के पास महीने के इन दिनों में कुछ भी यूज करने के लिये नहीं रहेगा। अचानक वजन कम होना या बढ़ना हार्मोन में परिवर्तन कर देता है।

बर्थ कंट्रोल पिल्स
शरीर को कई महीने लग जाते हैं, बर्थ कंट्रोल पिल्स के साथ एडजस्ट करने में।

ज्यादा शराब पीना
हमारा लीवर एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन को मेंटेन करता है। ज्यादा शराब पीने से लीवर डैमेज हो सकता है और इससे दोनों हार्मोन के बीच में बैलेंस बिगड़ सकता है।

पीसीओएस(PCOS)
ओवरी में सिस्ट और उसके कारण सही समय पर पीरियड्स का न आना पीसीओएस कहलाता है। हार्मोन में ज़रा सा भी बदलाव मासिक धर्म चक्र पर तुरंत असर डालता है। चेहरे पर बाल उग आना, मुंहासे होना, पिगमेंटेशन, अनियमित रूप से माहवारी आना, यौन इच्छा में अचानक कमी आ जाना, गर्भधारण में मुश्किल होना, आदि कुछ ऐसे लक्षण हैं।

मेनोपॉज
जब महिला अपनी 40 या 50 की उम्र में होती है तब उसके हार्मोन लेवल में परिवर्तन आने लगता है, जिससे पता चलता है कि उसके पीरियड्स अब हमेशा के लिये बंद हो जाएंगे।

दवाइयां
अगर आप हालही में बिमार पड़ गई थीं और इसकी वजह से आपको दवाइयां लेनी पड़ी थीं तो, भी आपके पीरियड्स कुछ दिनों के लिये टल सकते हैं। ऐसा इसलिये क्योंकि कुछ दवाइयां एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन के लेवर पर असर डालती हैं।

उपचार
अनियमित माहावारी का कारण जानने के बाद ही इसका इलाज संभव है। इसके बारे में अपने डॉक्टर से मिल कर उन्हें इसकी सही जानकारी दीजिये। वे आपको डाइट चार्ट, एक्सरसाइज प्लान, स्ट्रेस को कैसे कम करें और दवाइयां आदि देगें।



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