समय से पहले भारतीय महिलाओं को हो रहा मेनोपॉज, जानें कारण

Menopause

बचपन से ही हम सब सुनते आ रहे हैं कि महिला जन्म ही कठिनाइयों को झेलने के लिए लेती हैं। महिलाओं का पूरा जीवन जन्म से लेकर मृत्यु तक सिर्फ और सिर्फ कठिनाइयों से घिरा रहता है। पीरियड्स, प्रेग्नेंट होना, बच्चों को जन्म देना, से लेकर मेनोपॉज की समस्या तक उनका शरीर और फर्टिलिटी सिस्टम जीवन के हर पड़ाव पर बदल जाता है। मेनोपॉज का समय हर महिला के दर्द का वो अंतिन चरण है जो उनके जीवन को पूरी तरह प्रभावित कर देता है। लेकिन भारत में महिलाएं पश्चिमी देशों की महिलाओं की तुलना में मेनोपॉज की स्थिति में 4-5 साल पहले ही पहुंच जा रही हैं। जिसका कारण भारतीय महिलाओं का रहन-सहन और खान-पान है। भारत में महिलाएं अपनी सेहत पर ज्यादा ध्यान नहीं देती। जिसके कारण भारतीय महिलाओं में कम उम्र में मेनोपॉज की समस्या सामने आ रही है। पश्चिमी देशों में महिलाओं में मेनोपॉज की समस्या 50 साल की उम्र के बाद देखने को मिल रही हैं। जबकि भारतीय महिलाओं में मेनोपॉज की उम्र 45 से 46 साल के बीच देखी जा रही है।


क्या है मेनोपॉज?

Menopause
मेनोपॉज एक ऐसी स्थिति है जब महिलाओं को लगातार 12 महीनों तक पीरियड नहीं होते। इस दौरान महिलाएं गर्भवती नहीं हो सकती है। मेनोपॉज के दौरान महिलाओं के पीरियड आने की प्रक्रिया में काफी बदलाव आता है। यह प्रक्रिया कई सालों तक चलती है। इसमें महिलाओं के पीरियड आने का समय घटता जाता है। अगर किसी महिला को 7 दिन तक पीरियड्स आता है, तो यह धीरे धीरे घटकर 5 और 3 दिन हो जाता है। इस दौरान ब्लड फ्लो में भी काफी परिवर्तन देखने को मिलते हैं। फिर धीरे धीरे ये अवधि भी घटने लगती है, और महिलाओं को 2-2 महीने पर पीरियड्स आने लगते हैं। इस दौरान महिलाओं के शरीर में कई तरह के हॉर्मोनल बदलाव भी होते हैं। जिसके कारण महिलाओं को शरीरिक और मानसिक दोनों तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

समय से पहले मेनोपॉज के कारण

अधिकांश महिलाओं को उनके जीवन में 50 की उम्र तक पीरियड आता हैं। लेकिन कई महिलाएं ऐसी है जिन्हें समय से पहले ही पीरियड आने बंद हो जाते हैं। भारत में समय से पहले मेनोपॉज आने के मामले पश्चिमी देशों की तुलना में ज्यादा है। इस दौरान महिलाएं 40 साल की उम्र में मेनोपॉज की अनुभव करती है। महिलाओं में एस्ट्रोजेन की कमी भी समय से पहले मेनोपॉज का अनुभव करने का एक कारण है। इसके साथ महिलाओं का स्वास्थ्य, उनका खान-पान भी इसका प्रमुख कारण बन सकता हैं। इसके अलावा विशेषज्ञों के मुताबिक मुख्य समय से पहले मेनोपॉज का अनुभव करने के ये भी कारक हो सकते हैं।

पारिवारिक इतिहास: जिनके परिवार में महिलाओं ने पहले भी समय से पहले मेनोपॉज का अनुभव किया हो उन महिलाओं को भी ये समस्या हो सकती है। पारिवारिक इतिहास वाली महिलाओं में जल्दी या समय से पहले मेनोपॉज होने की संभावना अधिक होती है।
धूम्रपान: धूम्रपान करनेवाली महिलाओं को समय से पहले ही मेनोपॉज़ हो सकता है। इतना ही नहीं उन्हे मेनोपॉज़ के गंभीर लक्षणों का भी सामना करना पड़ सकता है।

कैंसर के लिए कीमोथेरेपी: कीमाथेरेपी ट्रीटमेंट आपके अंडाशय को नुकसान पहुंचा सकते हैं। जिसके कारण हमेशा के लिए या कुछ समय के लिए आपके पीरियड्स बंद हो सकते हैं। ऐसी महिलाओं को कनसीव करने में भी काफी परेशानी होती है।

अंडाशय को हटाने के लिए सर्जरी: दोनों अंडाशयों को हटाने के लिए सर्जरी करवाने पर ये तुरंत मेनोपॉज के लक्षणों को पैदा कर सकता है। इस सर्जरी के बाद पीरियड्स आने बंद हो जाएंगे। यहां तक की महिलाओं को गंभीर मेनोपॉज के लक्षणों का सामना करना पड़ सकता है।

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प्री-मेनोपॉज के संकेत

समय से पहले मेनोपॉज आने का सबसे पहला संकेत अनियमित पीरियड्य का आना होता है। इसके साथ ही ज्यादा ब्लीडिंग की समस्या को भी इग्नोर नहीं करना चाहिए। कई बार महिलाओं को एक-एक हफ्ते से ज्यादा पीरियड की समस्या रहने लगती हैं, ये भी प्री मेनोपॉज के संकेत हैं। इस दौरान महिलाओं को मूड स्विंग, नींद न आना, कमजोरी महसूस होना जैसी परेशानी का भी सामना करना पड़ सकता है।

Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्‍वास्‍थ्‍य प्रदात्ता से सलाह लें।

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