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Women's Day : महिलाओं में लो-एस्ट्रोजन के होते हैं ये संकेत, इन फूड्स में भरपूर होता है ये हार्मोन
एस्ट्रोजन हार्मोन को महिलाओं की लाइफलाइन कहा जाता है, क्योंकि इसकी कमी की वजह से महिलाओं के शरीर को खूब सारी दिक्कतें झेलनी पड़ सकती है। ये हार्मोन महिलाओं की स्त्रीत्व के लिए बहुत जरुरी है। एस्ट्रोजन की कमी की वजह से मासिक धर्म में और ओव्यूलेशन में दिक्कत आती हैं, जिसकी वजह से प्रेगनेंट होने में समस्या हो सकती हैं। महिलाओं की खूबसूरती के पीछे भी इस हार्मोन की भूमिका बहुत बड़ी होती है। इसलिए महिलाओं के लिए इस हार्मोन की बहुत अहमियत है।
इस महिला दिवस के मौके पर हम महिलाओं की लाइफलाइन कही जाने वाली एस्ट्रोजन हार्मोन से जुड़े जरूरी बिंदुओं पर चर्चा करेंगे कि कैसे एस्ट्रोजन शरीर में बनता है और इसके लिए डाइट पर ध्यान देना बहुत जरुरी है। कई ऐसे फ़ूड प्रोडक्ट्स हैं, जिन्हें डाइट में शामिल करने से एस्ट्रोजन का स्तर शरीर में बनाया रखा जा सकता है।

ये लक्षण बताते है एस्ट्रोजन की कमी को
अचानक से पसीना आना और गर्मी लगने जैसी समस्याएं, इसके अलावा मेनोपॉज भी एस्ट्रोजन की कमी के वजह से होता है। आइए जानते है कैसे मालूम चलेगा शरीर में लो एस्ट्रोजन है।

पीरियड्स में कमी
एस्ट्रोजेन हार्मोन की वजह से हर महीने पीरियड्स रेग्यूलर समय पर आ जाते हैं। इसीलिए, एस्ट्रोजेन का लेवल कम होने के कारण पीरियड्स कम या देरी से आते हैं। पीरियड्स में बहुत अधिक गैप होने या अनियमित पीरियड्स लो-एस्ट्रोजेन लेवल का संकेत हो सकता है। दरअसल, एस्ट्रोजेन की वजह से यूटरीन लाइनिंग पतली हो जाती है। जिससे, सही तरीके से पीरियड्स नहीं हो पाते।

लो-सेक्स ड्राइव
महिलाओं में लो-सेक्स ड्राइव का एक बड़ा कारण है एस्ट्रोजेन लेवल की कमी। अगर, आपकी सेक्स ड्राइव लगातार कम हो रही है तो हो सकता है कि आपके एस्ट्रोजेन लेवल में कमी हो सकती है। एस्ट्रोजन की कमी का असर वजाइनल लुबिक्रेशन पर भी पड़ता हैं। इस हार्मोन की कमी के वजह से वजाइना ड्रायनेस की समस्या उत्पन्न हो सकती है।

थकान
जब, आपके एस्ट्रोजन लेवल सही नहीं रहते हैं, तो आपको बहुत अधिक थकान महसूस होती है।

हेयर फॉल
हार्मोन्स का असंतुलन से फीमेल पैटर्न हेयर लॉस हो सकता है। इसीलिए, अचानक से आपके बाल झड़ने लगें। तो, आपको डॉक्टर से मिलना चाहिए। इस हेयर फॉल की वजह, लो-एस्ट्रोजन लेवल भी हो सकता है।

एनोरेक्सिया
जिन महिलाओं में एनोरेक्सिया जैसी ईटिंग डिसऑर्डर की समस्या होती है, उनमें एस्ट्रोजन की कमी की समस्या होने के ज्यादा सम्भावना रहती हैं। एस्ट्रोजन लेवल को बनाए रखने के लिए इन डाइट पर ध्यान दें।

अखरोट
सभी मेवों में से सबसे अधिक कारगर अखरोट हैं। फाइटोएस्ट्रोजेन से भरपूर इन नट्स में प्रोटीन, ओमेगा -3 फैटी एसिड और कई पोषक तत्व भी होते हैं। इन्हें ऐसे ही खाएं या उन्हें अपने फलों के सलाद या आइसक्रीम के लिए ऊपर डालें।

मूंगफली
मूंगफली के बारे में सबसे अच्छी बात यह है कि वे आसानी से हर जगह उपलब्ध हैं। ये फाइटोस्ट्रोजेन में रिच होने के साथ -साथ स्वाद से भी भरपूर होते हैं। आप इन्हें कच्चा,उबालकर या रोस्टेड खा सकते हैं या फिर पीनट बटर के रूप में भी इसका उपयोग कर सकते हैं।

सूखे मेवे
सूखे मेवे में फाइटोएस्ट्रोजेन होते हैं । फाइटोएस्ट्रोजेन का उच्च स्तर होने के कारण, खजूर, छुहारे और सूखे खुबानी का सेवन अवश्य करें। साथ ही फाइबर के लिए भी आपको नियमित रूप से सूखे फल का सेवन करना चाहिए।

सोयाबीन
सोयाबीन में प्रोटीन, विटामिन और खनिजों का एक समृद्ध स्रोत हैं। इनमें आइसोफ्लेवोन्स की मात्रा भी उच्च होती है, जो फाइटोएस्ट्रोजेन होते हैं। सोया आइसोफ्लेवोन्स नेचुरल एस्ट्रोजन के प्रभाव की तरह ही रक्त एस्ट्रोजन के स्तर को कम या बढ़ा सकते हैं। टोफू भी सोयाबीन से बनाए जाते हैं। आप इन्हें भी डाइट में शामिल कर सोयाबीन का फायदा उठा सकते हैं।

अलसी का बीज
ये छोटे बीज लिग्नन्स के रूप में जाने वाले केमिकल कंपाउंड्स का एक समृद्ध स्रोत हैं, जो फाइटोएस्ट्रोजेन की तरह काम करते हैं। अलसी में अन्य खाद्य पदार्थों की तुलना में अधिक लिग्नन होते हैं। कुछ स्टडीज से पता चलता है कि अलसी के बीज में पाए जाने वाले फाइटोएस्ट्रोजेन स्तन कैंसर के खतरे को कम करने में मदद कर सकते हैं।

तिल के बीज
तिल के बीज आकार में छोटे हो सकते हैं, लेकिन ये फाइबर का एक समृद्ध स्रोत हैं। इससे भी महत्वपूर्ण बात, वे फाइटोएस्ट्रोजेन से भरे हुए होते हैं। एक अध्ययन के अनुसार तिल के बीज के पाउडर का सेवन रजोनिवृत्ति के बाद की महिलाओं में एस्ट्रोजन के स्तर पर प्रभाव डालता है। जो लोग रोजाना पांच सप्ताह तक इसका सेवन करते हैं उनमें एस्ट्रोजन का स्तर अधिक पाया गया। यह उनके कोलेस्ट्रॉल के स्तर को सुधारने में भी मदद करता है।



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