World Bicycle Day: क्‍यों मनाया जाता है साइक‍िल डे, सेहत से जुड़ी है वजह

World Bicycle Day 2024: हर साल 3 जून को दुनियाभर में वर्ल्ड साइकिल डे मनाया जाता है। इस दिन को मनाने के पीछे का उद्देश्‍य दुनियाभर में साइकिलिंग के फायदों के बारे में लोगों को जागरूकता फैलाना है। यूएनओ की ओर से 3 जून 2018 को वर्ल्ड साइकिल डे के रूप में मनाने की आधिकारिक घोषणा की थी।

अमेरिका के मोंटगोमरी कॉलेज के प्रोफेसर लेस्जेक सिबिल्स ने एक याचिका देकर वर्ल्ड साइकिल डे मनाने का प्रस्ताव दिया था। जिसके बाद यूएनओ की महासभा ने साइक‍िल‍िंग का महत्‍व समझते हुए इसे मान्यता दे दी और पहली बार 2018 में तीन जून को वर्ल्ड साइकिल मनाया गया।

World Bicycle Day 2024 Date history significance

वर्ल्ड साइकिल डे का मनाने का उद्देश्‍य

मानसिक और शारीरिक स्‍वास्‍थ्‍य की बेहतरी के लिए लोगों को साइकिल का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित करना है, ताकि लोग इस दुपह‍िया का इस्‍तेमाल कर खुद के साथ पर्यावरण को स्‍वस्‍थ बना सकें। इसके अलावा पैदल यात्री सुरक्षा और साइकिल चालन की सुरक्षा को भी बढ़ावा देना भी इस दिन से जुड़ा एक मकसद था।

साइकिल चलाने के फायदे

- साइकिल‍िंग बेस्ट कार्डियोवैस्कुलर एक्सरसाइज है, जो दिल और फेफड़ों स्‍ट्रॉन्‍ग बनाकर दिल से जुड़ी समस्‍याओं से बचाता है।

- साइकिलिंग से कैलोरी बर्न होती है और वेटलॉस होता है।

- साइकिल चलाने से पेट्रोल और अन्‍य ईंधन से चलने वाली गाड़ियों का इस्‍तेमाल कम होता है और इससे वायु प्रदूषण भी नहीं होता है।

- साइक‍िलिंग से पाचन बेहतर होता है और मेटाबोलिज्‍म भी बेहतर होने से पेट की बीमारियां नहीं होती है।

साइक‍िल से जुड़े फैक्‍ट

- ब्रिटेनिका इनसाइक्लोपीडिया के मुताबिक मशहूर चित्रकर लियोनार्दो द विंची की पेंटिंग में साइकिल की पहली डिजाइन देखने को म‍िली थी। यह पेंटिंग उन्होंने बनाई थी सन् 1492 में यानी तकरीबन 520 साल पहले।

- सबसे पहले दुपह‍िया वाली साइकिल जर्मनी में बनी थी। इसका आविष्कारक बेरोन कार्ल वॉन ड्रेस डी साउबू्रन को माना जाता है। वर्ष 1817 में उन्होंने 14 किमी. तक इसकी सवारी की थी। 1818 में इस अनोखी मशीन को लोगों ने पहली बार पेरिस में लगाई गई एक प्रदर्शनी में देखा। इसे "स्विफ्टवॉकर" के नाम से जाने लगी।

- साइकिल की पहली रेस 31 मई, 1868 पेरिस के पार्क दे सेंट क्लाउड में हुई थी। 1200 मीटर की इस रेस के विजेता इंग्लैंड के जेम्स मूरे बने थे।

- 1890 के मध्‍य से लेकर 20वीं सदी तक की अवधि को 'गोल्डन एज ऑफ बाइसिकल' कहा जाता है। इसी समय साइकिल को नई शक्ल मिली। ज्‍यादात्‍तर लोग इस दुपह‍िया वाहन का इस्‍तेमाल करते थे।

- न्यूयॉर्क में 'पैडलिंग बाइसिकल म्यूजियम' मौजूद है जहां पुरानी साइकिलों का संग्रह देखा जा सकता है।

- नीदरलैंड्स को दुनिया का बाइसिकल कैपिटल भी कहा जाता है, क्योंकि यहां की जनसंख्या लगभग 170 लाख के आसपास है, लेकिन साइकिलों की संख्या लगभग 2 करोड़ से ज्यादा है।

Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्‍वास्‍थ्‍य प्रदात्ता से सलाह लें।

Story first published: Monday, June 3, 2024, 10:37 [IST]
Desktop Bottom Promotion