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Cervical Cancer Myths and Facts: सर्वाइकल कैंसर दुनियाभर में महिलाओं के लिए दूसरी सबसे घातक बीमारी है। यह कैंसर योनि से शुरू होकर मूत्राशय, मलाशय से लेकर फेफड़ों तक में बहुत तेजी से फैलता है। इसके लगभग सभी मामले हाई रिस्क वाले ह्यूमन पैपिलोमावायरस (एचपीवी) के संक्रमण से जुड़े होते हैं, जो यौन संपर्क के जरिए फैलने वाला एक बेहद आम वायरस है।
इस वायरस और सवाईकल कैंसर से बचाव के लिए वैक्सीन भी उपलब्ध है। लेकिन इसकी सही जानकारी की कमी की वजह से महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर के बचाव के लिए टीकाकरण की दर भी काफी कम है।

इसलिए आज हम आपको बताने वाले हैं कि सर्वाइकल कैंसर या एचपीवी क्या है और इससे जुड़े कुछ मिथकों की सच्चाई के बारे में बताएंगे।
क्या है एचपीवी?
सर्वाइकल कैंसर एक वायरस के कारण होता है, जिसे HPV (Human Papillomavirus) कहते हैं। यह वायरस यौन संपर्क (वेजाइनल, एनल और ओरल) से फैलता है और कैंसर का कारण बन सकता है।
क्लीवलैंड क्लीनिक के मुताबिक, एचपीवी एक सामान्य वायरस है, जो शरीर के अलग-अलग हिस्सों को प्रभावित कर सकता है। इस वायरस के 100 से भी अधिक प्रकार होते हैं, जिनके कुछ टाइप ऐसे हैं, जो चेहरे, हाथ, पैर आदि पर वॉर्ट्स का कारण बन सकते हैं। इस वायरस के लगभग 30 प्रकार ऐसे हैं, जो वल्वा, योनि (वजाइना), सर्विक्स, पीनिस, एनस आदि को प्रभावित कर सकते हैं। शरीर में प्रवेश करने से लेकर कैंसर पैदा करने तक यह वायरस लंबा समय लेता है।
Myth 1: आप 12 वर्ष की आयु के बाद एचपीवी वैक्सीन नहीं लगवा सकते हैं।
Fact : चाहे आप पहले ही इसके संपर्क में आ चुके हों या नहीं, किशोरावस्था के बाद भी वैक्सीन लगाई जा सकती है। हालांकि, अगर आप यौन रूप से सक्रिय हैं, तो यह उतना असरदार नहीं हो सकता है, लेकिन फिर भी काफी हद तक मदद कर सकता है।
Myth 2 : आपको हर साल पैप टेस्ट की जरूरत होती है।
Fact : अगर आपका पैप टेस्ट और एचपीवी टेस्ट दोनों सामान्य हैं, तो हर साल पैप टेस्ट कराने की कोई जरूरत नहीं है। महिलाओं के लिए सर्वाइकल कैंसर से जुड़े दिशानिर्देश के मुताबिक विभिन्न उम्र में महिलाओं को अलग-अलग समय पर टेस्ट कराना चाहिए।
आयु 21-30- हर तीन साल में पैप टेस्ट
आयु 30-64- हर पांच साल में पैप और एचपीवी टेस्ट
उम्र 65 और उससे अधिक- डॉक्टर से परामर्श लें। अगर आप यौन रूप से सक्रिय हैं, तो इसे हर 5 साल में टेस्ट करवाएं।
Myth 3 : सर्वाइकल कैंसर से पीड़ित मां नहीं बन सकती है?
Fact : ऐसे कई नए ट्रीटमेंट ऑप्शन हैं, जो प्रजनन क्षमता को बचाने में सक्षम हैं। आप अंडों को फ्रीज करने के लिए रिप्रोडक्टिव ट्रीटमेंट का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके अलावा आप ओवरीज को सर्जिकली बाहर निकाल सकते हैं, ताकि रेडिएशन के इन्हें कोई नुकसान न पहुंचे।
Myth 4: बांझपन का कारण बनती एचपीवी वैक्सीन?
Fact : यह धारणा पूरी तरह से गलत है। ज्यादातर वैक्सीन की ही तरह, एचपीवी वैक्सीन के भी हल्के साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं, जिनमें इंजेक्शन वाली जगह पर दर्द, सिरदर्द, थकान और मतली शामिल है। हालांकि, अभी तक ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला है, जिसमें यह पता चले कि एचपीवी वैक्सीन बांझपन का कारण बनती है।
Myth 5: सर्वाइकल कैंसर जेनेटिक होता है?
Fact: यह धारणा पूरी तरह गलत है। ब्रेस्ट कैंसर और ओवेरियन कैंसर की तरह सर्वाइकल कैंसर वंशानुगत नहीं होता है। यह एचपीवी संक्रमण के कारण होता है। ऐसे में अपनी बेटी को इस संक्रमण से बचाने के लिए, सुनिश्चित करें कि उन्हें 15 साल की आयु से पहले एचपीवी टीका लग जाए।
Myth 6: एचपीवी केवल उन लोगों को प्रभावित करता है, जिनके कई यौन पार्टनर होते हैं?
Fact : एचपीवी संक्रमण लगभग 80% पुरुषों और महिलाओं को प्रभावित करता है। हालांकि, यह हर किसी में कैंसर का कारण नहीं बनता है।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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