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World Contraception Day 2024: क्यों पुरुष नसबंदी कराने से कतराते हैं, Vasectomy के 5 मिथकों का सच जानें
Five Myths About Male Vasectomy : 26 सितंबर को हर साल 'विश्व गर्भनिरोधक दिवस' मनाया जाता है। बात जब परिवार नियोजन यानी अनचाही प्रेग्नेंसी को टालने की होती है, तो इसकी सारी जिम्मेदारी महिलाओं पर डाल दी जाती है। खासकर के जब बात नसबंदी की होती है तो महिलाओं की तुलना में इक्के-दुक्के मर्द ऐसे होंगे जो गर्भनिरोधक के लिए ये रास्ता अपनाते होंगे।
एक्सपर्ट के मुताबिक इसकी बड़ी वजह लोगों के बीच फैली गलतफहमी है। पुरुषों को लगता है कि नसबंदी कराने से मर्दानगी कम होगी और टेस्टोस्टेरॉन और लिबिडो लेवल कम हो जाता है और प्रोस्टेट कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। लेकिन, इन बातों में कतई सच्चाई नहीं है।
महिलाओं की तुलना में पुरुषों के लिए गर्भनिरोधक उपायों को अपनाना ज्यादा आसान है। लेकिन, दकियानूसी सोच और कुछ प्रचलित मिथकों की वजह से फैमिली प्लानिंग की सारी जिम्मेदारी महिलाओं के हिस्से आ जाती है।

इसलिए इस विश्व गर्भनिरोधक दिवस पर पुरुषों को जागरुक करते हुए पुरुष नसबंदी (Vasectomy) से जुड़े उन 5 मिथकों के बारे में जिसकी वजह से मर्द नसबंदी कराने से कतराते हैं?
मिथक 1: नसबंदी से खत्म हो जाती है सेक्सुअल लाइफ?
फैक्ट: ज्यादात्तर पुरुष इस बात से डरते हैं कि नसबंदी से उनकी सेक्स लाइफ पर बुरा पड़ेगा। लेकिन, NCBI की एक रिसर्च बताती हैं कि नसबंदी का इजैकुलेशन की क्षमता, सेक्स लाइफ, फ्रिक्वेंसी या संतुष्टि पर कोई असर नहीं पड़ता। संबंध बनाने के दौरान पुरुष और महिला को किसी तरह का अंतर महसूस नहीं होता है।
मिथक 2 : नसबंदी के बाद स्पर्म नहीं बनते हैं?
फैक्ट: नसबंदी के बाद भी सीमेन बनने की प्रक्रिया नहीं रुकती है। नेचुरल तरह से पुरुषों में सीमेन और स्पर्म पहले की भांति बनते रहते हैं। लेकिन, नसों के ब्लॉक करने के कारण स्पर्म बाहर नहीं निकल पाते। इस तरह, बॉडी से बिना स्पर्म के सीमेन निकलता रहता है।
मिथक 3: पुरुषों की नसबंदी चीरा लगाकर ही होता है?
फैक्ट: वैसे जानकारी के लिए बता दें कि पुरुष नसबंदी के दो तरीके होते हैं पहला जिसे कन्वेंशनल मैथड कहते हैं। इसमें एनेसिथिया से टेस्टिकल्स को सुन्न करके पहले 2 छोटे चीरे लगाए जाते हैं। फिर वास डेफेरेंस नली को काटकर उसके सिरों को टांके या क्लिप से सील कर देते हैं।
दूसरे तरीके में बिना चीरा-टांका लगाए जिसे नो-स्केलपेल मैथड कहते हैं। इसमें बिना सर्जरी के टेस्टिकल्स में बहुत छोटा सा होल किया जाता है, जिससे वास डेफेरेंस नली को बाहर निकालकर सील कर देते हैं।
मिथक 4: नसबंदी के बाद कभी भी नहीं बन सकते हैं पिता?
फैक्ट: कई पुरुषों को इसकी जानकारी नहीं होती है कि नसबंदी के बाद भी पुरुष भविष्य में चाहे तो पिता बन सकते हैं। इसके लिए अलग-अलग विकल्प हैं- नसबंदी को रिवर्स कराकर यानी सील की जा चुकीं नलियों को ऑपरेशन से फिर से जोड़कर, जिसे वैसेक्टमी रिवर्सल के जरिए वो पिता बनने का सुख प्राप्त कर सकते हैं। इसके अलावा नसबंदी से पहले सीमेन को बैंक में फ्रीज करा सकते हैं। ताकि फिर जब पिता बनना चाहें तो आईवीएफ से गर्भधारण किया जा सकता है। एक और रास्ता है जिसमें टेस्टिकुलर स्पर्म एक्सट्रैक्शन यानी नसबंदी के बाद भी टेस्टिकल्स में बनने वाले स्पर्म को इंजेक्शन या फिर बायोप्सी के जरिए निकालकर आईवीएफ की मदद से गर्भधारण किया जा सकता है।
मिथक 5: नसबंदी तुरंत असरदार होती है?
फैक्ट : कई पुरुषों को लगता है कि नसबंदी करवाते ही प्रभावी हो जाती है और अनचाही प्रेग्नेंसी को टाला जा सकता है जबकि सच तो यह है कि ऑपरेशन करवाने के बाद भी वास डेफेरेंस में स्पर्म मौजूद और सक्रिय हो सकते हैं, इसलिए पुरुषों को नसबंदी के 3 माह तक कंडोम का इस्तेमाल करने के लिए कहा जाता है। इसके बाद एक बार स्पर्म टेस्ट किया जाता है ताकि पता कर सकें कि स्पर्म रिलीज नहीं हो रहे हैं।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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