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World Down Syndrome Day 2023: जानिए क्या है डाउन सिंड्रोम, कारण और लक्षण
विश्वभर में आज वर्ल्ड डाउन सिंड्रोम डे मनाया जा रहा है। डाउन सिंड्रोम के साथ जीना किसी भी व्यक्ति के लिए आसान नहीं होता है। इस सिंड्रोम के कारण शारीरिक और मानसिक ग्रोथ रुकने के अलावा, उनके साथ होने वाला दुर्व्यवहार और भेदभाव उनकी लाइफ को और मुश्किल बना देता है। अपने लिए शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं या कमाई के अधिकारों तक पहुंचना भी उनके लिए किसी चुनौती से कम नहीं है।
यूनाइटेड नेशंस के अनुसार हर साल पांच हजार के लगभग बच्चे डाउन सिंड्रोम के साथ पैदा होते हैं। आज के दिन अंतर्राष्ट्रीय एजेंसी अपने सभी सदस्य देशों के साथ-साथ संबंधित अंतर्राष्ट्रीय संगठनों को डाउन सिंड्रोम पर बातचीत करने के लिए प्रोत्साहित करती है। ताकि डाउन सिंड्रोम से जुझ रहे लोगों की लाइफ बेहतर बनाने की कोशिश की जा सकें।

क्या है डाउन सिंड्रोम
डाउन सिंड्रोम एक जेनेटिक स्थिति है जो किसी व्यक्ति में तब होती है जब वो एक्सट्रा क्रोमोसोम के साथ पैदा होता है। इस सिंड्रोम को ट्राइसॉमी 21 के नाम से भी जाना जाता है। डाउन सिंड्रोम वाले लोगों में कुछ सामान्य विशेषताएं होती हैं जैसे छोटे कान, एक चपटी नाक, बाहरी कोने पर तिरछी आंखें, उभरी हुई जीभ, छोटी गर्दन, छोटे हाथ और पैर। डाउन सिंड्रोम वाले लोगों को स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का भी अनुभव हो सकता है, जैसे दिल से जुड़ी कोई बीमारी, सुनने की समस्याएं या देखने में समस्या हो सकती है।
डाउन सिंड्रोम के कारण
जब एक बच्चा पैदा होने से पहले अपने माता-पिता से 46 क्रोमोसोम के रूप में जेनेटिक सामग्री के रूप में पाता है, जिसमें से 23 क्रोमोसोम पिता से और 23 क्रोमोसोम माता से मिलते है। लेकिन डाउन सिंड्रोम में, बच्चे को एक अतिरिक्त क्रोमोसोम 21 माता-पिता से विरासत में मिलता है। कुछ मामलों में, अतिरिक्त क्रोमोसोम 21 दूसरे क्रोमोसोम से जुड़ जाता है। यह अतिरिक्त जेनेटिक सामग्री डाउन सिंड्रोम व्यक्तियों में विशिष्ट शारीरिक विशेषताओं और विकास संबंधी अक्षमताओं का कारण बनता है। किसी व्यक्ति में डाउन सिंड्रोम इन तीन कारणों से हो सकते हैं-
1. ट्राइसॉमी 21
यह डाउन सिंड्रोम का सबसे आम कारण है जो लगभग 95 प्रतिशत मामलों में होता है। यह तब होता है जब सेल्स विभाजन के दौरान एक गलती होती है। इसके कारण शरीर के सभी सेल्स में एक्सट्रा क्रोमोसोम बनने लगते हैं।
2. मोजाइसिज्म
डाउन सिंड्रोम के इस प्रकार में, क्रोमोसोम शरीर के सभी सेल्स में नहीं बल्कि कुछ ही सेल्स में होते हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि फर्टिलाइजेशन के बाद गलती होती है, जब एक सेल असामान्य रूप से बांटता है और अन्य सेल्स में से एक में अतिरिक्त क्रोमोसोम 21 बनता है।
3. ट्रांसलोकेशन
लगभग 4 प्रतिशत मामलों में, डाउन सिंड्रोम क्रोमोसोम 21 और दूसरे क्रोमोसोम के बीच जेनेटिक सामग्री के रिअरेंजमेंट के कारण होता है।
डाउन सिंड्रोम से जुड़े फैक्ट्स
1. वर्ल्ड डाउन सिंड्रोम के स्टडी के अनुसार 800 बच्चों में से 1 बच्चे में डाउन सिंड्रोम होता है।
2. डाउन सिंड्रोम का नाम इंग्लिश डॉक्टर John Langdon Down के नाम पर रखा गया था जिसने 1866 में इस कंडीशन का क्लीनिकल विवरण किया था।
3. डाउन सिंड्रोम कंडीशन की पहचान गर्भावस्था के शुरुआती दिनों में अल्ट्रासाउंड और ब्लड सैंपल की मदद से की जा सकती है।
4. 1960 के दौरान इस कंडीशन से पीड़ित बच्चे की आयु सिर्फ 10 साल तक की ही होती थी लेकिन आज मेडिकल केयर के कारण इनकी उम्र 60 या उससे अधिक हो गई है।
( डिस्क्लेमर : इस लेख में दी गई सभी जानकारी और सूचनाएं सामान्य जानकारियों पर आधारित हैं। Boldsky Hindi इसकी पुष्टि नहीं करता है। इन चीजों पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें। )
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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