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World Food Day : मल्टीग्रेन या गेंहू, जानें कौनसे आटे की बनी रोटियां खाना है ज्यादा सेहतमंद
Multigrain Atta vs Regular Atta : रोटी हम सबकी थाली का मुख्य आहार है। जिसका हम रोजाना सेवन करते हैं। हमारे देश में अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग अनाजों की रोटी बनाकर खाई जाती है।
जैसे पंजाब में मक्का, राजस्थान में बाजरा, नॉर्थ इंडिया में ज्यादातर गेंहू की रोटी तो वहीं साउथ में रागी की रोटी खूब चाव से खाई जाती है। इन अनाजों में मौजूद पोषक तत्व रोटी को पौष्टिक बनाते हैं। लेकिन आजकल रोटी को ज्यादा पौष्टिक और सेहतमंद बनाने के लिए लोग रेगुलर आटे की जगह मल्टीग्रेन आटे से बदल रहे हैं।
अब सवाल यह उठता है कि क्या सच में मल्टीग्रेन आटा सिंगल ग्रेन यानी साधारण आटे की तुलना में ज्यादा पौष्टिक होता है? मल्टीग्रेन आटा और सिंगल ग्रेन आटा चाहे गेहूं का आटा हो, ज्वार का आटा हो, बाजरा का आटा हो या कोई अन्य आटा हो, इन सभी में बहुत अंतर है। क्या आप जानते हैं? नहीं तो यहां पता करें।

साधारण आटा और मल्टीग्रेन आटे में अंतर?
साधारण आटा सिर्फ एक अनाज का आटा होता है सामान्यतः गेंहू, ज्वार, मक्का, चावल इन्ही में से कोई एक अनाज को पीस कर आटा तैयार करते हैं। वहीं मल्टीग्रेन आटा 3 या उससे अधिक अनाज से मिलकर बना आटा है।
जरूरत के हिसाब से अलग अलग गुण वाले आटे मिला कर उपयोग करते हैं। मल्टीग्रेन आटा रागी, ज्वार, बाजरा, सोयाबीन, जई, मक्का, गेहूं, आदि जैसे कई अनाजों से बनाया जाता है। इसमें इन सभी अनाजों से कई प्रकार के पोषक तत्व होते हैं, जिससे अगर आप बैलेंस डाइट लेना चाहते हैं तो यह एक बढ़िया विकल्प है।
मल्टीग्रेन आटा खाने के फायदे
मल्टीग्रेन आटा दो या दो से अधिक अनाजों को मिलाकर बनाया जाता है। इसलिए इसका पोषण मूल्य गेहूं जैसे एकल अनाज के आटे से अधिक होता है। यह प्रोटीन, फाइबर और कई सूक्ष्म पोषक तत्वों से भरपूर होने के साथ-साथ शरीर को संपूर्ण पोषण प्रदान करता है।

मल्टीग्रेन आटा या रेग्युलर आटा क्या खाएं?
वजन घटाने के लिए मल्टीग्रेन आटा भी बहुत अच्छा पाया गया है। मल्टीग्रेन आटे में ज्यादातर अनाज और बाजरा में रागी और ज्वार शामिल होते हैं, जो ग्लूटेन फ्री होते हैं और इसलिए ये हेल्दी होते हैं। मल्टीग्रेन आटा कई प्रकार के अनाज से बना होता है जैसे की बार्ली, गेहूं, ओट्स, ब्राउन राइस, क्विनोआ, इत्यादि ऐसे में इन सभी को एक साथ खाना पाचन क्रिया के लिए मुसीबत खड़ी कर सकता है। वहीं हम जितना सादा और साधारण खाना खाते हैं, डाइजेस्टिव सिस्टम उतने ही अच्छे से काम करता है।
कैसे करें सेवन
इसलिए आप हफ्ते में एक से दो ज्यादा बार मल्टीग्रेन आटे का सेवन करें। या आप इन्हें एक साथ न खाकर अलग-अलग समय पर खा सकते हैं। जैसे ब्रेकफास्ट में जई या ओट्स के आटे का चीला, दिन में रागी की रोटी और रात में गेंहू की रोटी। इससे शारीर को पोषण तो मिलेगा ही साथ ही पाचन तंत्र भी सही रहेगा।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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