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World Lung Cancer Day: नॉन स्मोकर्स को भी हो सकता है फेफड़ों का कैंसर, जानें वजह, लक्षण और बचाव के तरीके
World Lung Cancer Day 2023: फेफड़ों के कैंसर यानी लंग कैंसर को लेकर लोगों में सबसे बड़ी गलतफहमी ये है कि यह बीमारी सिर्फ सिगरेट या हुक्का पीने वालों को ही हो सकती है। लेकिन आपको बता दें कि ऐसा नहीं है कि फेफड़ों का
कैंसर सिर्फ सिगरेट पीने से होता है। नॉन स्मॉकर्स या ध्रूमपान के आदी नहीं लोगों को भी फेफड़ों का कैंसर हो सकता है। अमेरिका की स्वास्थ्य संस्था सीडीसी (Centers for Disease Control and Prevention) के अनुसार, लंग कैंसर के 50% से अधिक मामले उन लोगों में पाए जाते हैं, जो कभी धूम्रपान नहीं करते थे।
ऐसे में ये जानना जरूरी है कि आखिर नॉन-स्मोकर में लंग कैंसर के प्रमुख कारण क्या हो सकते हैं। तो चलिए जानते हैं गैर-धूम्रपान करने वालों में बढ़ते फेफड़े के कैंसर के कुछ प्रमुख कारणों के बारे में-

लंग कैंसर के सामान्य क्या लक्षण है?
लगातार खांसी
खांसी में खून के आना
सांस लेने में कठिनाई
छाती में दर्द
आवाज में बदलाव
अचानक वजन घटना
हड्डियों में अत्यधिक दर्द
भयंकर सिरदर्द
वायु प्रदूषण
भारत में फेफड़ों के कैंसर का एक मुख्य कारण वायु प्रदूषण भी है। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) के मुताबिक, वायु प्रदूषण की वजह से हर साल फेफड़ों के कैंसर से 18 लाख लोगों की मौत होती है। साल 2020 में द लांसेट में पब्लिश एक स्टडी के मुताबिक, 2019 में भारत में वायु प्रदूषण से 17 लाख लोगों की मौत हुई थी।
सेकेंड हैंड स्मोकिंग
कई लोग ऐसे हैं जो स्मोकिंग नहीं करते हैं, लेकिन स्मोकिंग करने वालों के संपर्क में आते हैं। जिसे सेकेंड हैंड स्मोकिंग भी कहते है। नॉन-स्मोकर्स में लंग कैंसर के सबसे बड़े जोखिम कारकों में से एक है।

फैमिली हिस्ट्री
लंग कैंसर के पीछे एक वजह फैमिली हिस्ट्री भी होती है। जीन म्यूटेशन से फैमिली के सदस्यों में फेफड़े के कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। अगर आपके परिवार के किसी सदस्य को फेफड़े का कैंसर था, तो आपको भी ये बीमारी होने का खतरा रहता है।
केमिकल रिएक्शन की वजह से
अक्सर ऐसी जगह काम करने की वजह से भी लंग कैंसर का शिकार हो जाते हैं। आसान भाषा में समझें तो, जो लोग आर्सेनिक, यूरेनियम, एस्बेस्टस और डीजल निकास वाली जगहों पर काम करते हैं, उनमें फेफड़ों के कैंसर के विकास का जोखिम अधिक होता है।
रेडिएशन एक्सपोजर
रेडिएशन एक्सपोजर फेफड़ों की सेल्स में डीएनए को नुकसान पहुंचकर फेफड़ों के कैंसर का कारण बन सकता है। उच्च स्तर के आयनीकरण विकिरण के कॉन्टैक्ट में आने वाले लोगों, जैसे- परमाणु उद्योग में काम करने वालों में फेफड़ों के कैंसर के पैदा होने का खतरा ज्यादा रहता है।
फेफड़ों को मजबूत बनाने के लिए करें ये काम
पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं: शरीर में पानी की कमी की वजह से कई तरह की समस्या होने लगती है। पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से रक्त संचार बेहतर होता है। साथ ही इसकी वजह से आपके फेफड़े हाइड्रेट रहते हैं।
ब्रीदिंग एक्सरसाइज करें : ब्रीदिंग एक्सरसाइज करने के लिए अपनी सांस पर फोकस करें। जिससे दिमाग शांत और रिलैक्स होता है। प्राणायम, कपाल भांति और मुंह से गुब्बारें फुलाएं। इसे करने फेफड़े मजबूत बनते हैं।
धूम्रपान तुरंत छोड़ दें: धूम्रपान से फेफड़ों में कार्बन मोनोऑक्साइड, निकोटीन और टार पहुंचता है। ये सारे तत्व फेफड़ों के लिए हानिकारक होते हैं। इसलिए धूम्रपान करने की आदत में बदलाव करें।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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