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World Osteoporosis Day 2023 : दुनियाभर में कई लोग ऑस्टियोपोरोसिस से पीड़ित है। यह हड्डियों से जुड़ी एक समस्या है जो बढ़ती उम्र के साथ लोगों को अपना शिकार बनाती है। ऐसे में इस बीमारी के प्रति जागरूकता फैलाने के मकसद से हर साल 20 अक्टूबर को वर्ल्ड ऑस्टियोपोरोसिस डे मनाया जाता है।
ऑस्टियोपोरोसिस की मुख्य वजह जीवनशैली के कारक जैसे कम कैल्शियम और विटामिन डी वाली डाइट, गतिहीन जीवन शैली, धूम्रपान, शराब, हार्मोनल डिस्बैलेंस जैसे कारक शामिल हैं। यह बीमारी आमतौर पर बुजुर्गों और उम्र बढ़ने के साथ व्यक्ति को अपना शिकार बनाती है। इसके अलावा मेनोपॉज में भी महिलाएं इस बीमारी का शिकार हो जाती है। जब आप ऑस्टियोपोरोसिस से पीड़ित हो जाते हैं, या इस रोग से बचाव चाहते हैं, तो इसमें हड्डियों को मजबूती देने वाले पोषक तत्वों से भरपूर आहार मदद करते हैं। ये आहार कैल्शियम, विटामिन डी, विटामिन सी, मैग्नीशियम और प्रोटीन से भरपूर होना चाहिए। ये पोषक तत्व मजबूत स्केलेटन के आधार बनते हैं। इस मौके पर जानेंगे उन डिशेज के बारे में जो आपकी हड्डियां मजबूत करती हैं।

क्यों मनाते हैं ऑस्टियोपोरोसिस डे?
हर साल 20 अक्टूबर को वर्ल्ड ऑस्टियोपोरोसिस डे मनाया जाता है। यह एक ऐसी बीमारी है, जिसमें आप अपनी लाइफस्टाइल और खानपान में बदलाव कर इससे बच सकते हैं। ऐसे में ऑस्टियोपोरोसिस डे के मौके पर आज हम आपको बताएंगे कुछ ऐसी रेसिपीज के बारे में, जिनकी मदद से आप ऑस्टियोपोरोसिस से बच सकते हैं और अपनी हड्डियों को मजबूत बना सकते हैं।
सेहत के लिए बहुत खास है शिमला मिर्च
शिमला मिर्च में विटामिन डी, विटामिन सी, विटामिन ए, विटामिन बी6, कैल्शियम और फोलेट होते हैं। लाल और हरा शिमला मिर्च ऑस्टियोपोरोसिस, अर्थराइटिस, क्रोन डिजीज से बचाव के अलावा डिस्लिपिडेमिया और कैंसर से भी बचाव करती है। यह इम्यून सिस्टम और मेटाबोलिज्म को बढ़ावा देता है।
मशरुम खाने के फायदे
हड्डियों को मजबूत बनाए रखने और अच्छे स्वास्थ्य के लिए मशरूम का सेवन अति आवश्यक है। मशरूम में कैल्शियम और मैग्नीशियम जैसे जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो हड्डियों को मजबूत बनाने में काफी सहायक होते हैं। साथ ही बढ़ती उम्र में हड्डियां कमज़ोर होने लगती हैं ऐसे में मशरूम का सेवन करना जरूरी हो जाता है।

ये है मशरूम कैपसिकम मसाला के लिए सामग्री
कटा हुआ मशरूम-1 कप
कटी हुई शिमला मिर्च- 1/2 कप
प्याज- 1, टमाटर-2, लहसुन- 5 कली,
जीरा - 1/4 छोटा चम्मच,
सौंफ - 1/4 छोटा चम्मच, सरसों तेल-2 और आधा टी स्पून
दालचीनी - 1/2 इंच का टुकड़ा, लौंग-2, इलायची-2, हल्दी पाउडर-1/4 छोटा चम्मच, लाल मिर्च पाउडर- ¼ टी स्पून, धनिया पाउडर-1 टी स्पून, गरम मसाला-1/2 टी स्पून, एक मुट्ठी धनिया पत्ती, नमक स्वादानुसार
विधि:
- एक पैन में 1/2 टीस्पून तेल डालें। तेल गर्म होने पर मशरूम और शिमला मिर्च डालें।
- इसमें थोड़ा नमक मिला दें। ढंक कर मशरूम और शिमला मिर्च को नरम पकाएं।
- दूसरी तरफ प्याज, लहसुन, टमाटर को मोटा काट लें। पैन में 1 टीस्पून तेल डाल कर गरम करें।
- इसमें जीरा और सौंफ डालें। चटकने पर प्याज, लहसुन डाल दें। आधा टीस्पून नमक डालें।
- प्याज हल्का भूनने के बाद टमाटर काट कर डालें। नरम होने तक भूनें। ठंडा होने पर इसे ब्लेंडर में पेस्ट बना लें।
- पैन में 1 टी स्पून तेल डालकर दालचीनी, लौंग और इलायची डाल दें। हल्का भूनने पर मसाला पेस्ट, हल्दी, धनिया पाउडर, लाल मिर्च पाउडर और नमक डाल दें।
चौलाई के पत्तियों के फायदे
चौलाई के पत्तियों में कैल्शियम, आयरन, सोडियम, पोटेशियम, विटामिन ए, ई, सी और फोलिक एसिड होता है। कैल्शियम जहां हड्डियों की बनावट को बेहतर बनाता है और इनका घनत्व बढ़ता है वहीं आयरन खून बढ़ाकर हड्डियों को ऑस्टियोपोरोसिस जैसी बीमारियों से बचाता है। इसके अलावा चौलाई प्रोटीन से भी भरपूर है जो कि स्वस्थ हड्डियों के लिए बेहद जरूरी है। इसलिए, आपको इन तमाम कारणों से चौलाई की सब्जी या साग जरूर खाना चाहिए।
चौलाई साग रेसिपी-
चौलाई साग बनाने के लिए आपको पहले चौलाई के पत्तों को धो लेना है और फिर इसे भाप के साथ पका लें या कुकर में सीटी लगा लें। अब इसमें पूरे साग को मैश कर लें। इसके बाद एक कढ़ाई में थोड़ा सा सरसों का तेल डालें। थोड़ा लहसुन, हरी मिर्च और प्याज डालें। हल्के-हल्के मसाले डालें। सारा साग इसमें पलट दें। ऊपर से थोड़ा सा बेसन का आटा डालकर इसे पकाएं और आखिरी में 1 चम्मच घी डाल लें। अब इस साग को अच्छे से पकाकर, उतार लें और इसे सर्व करें।

रागी का हलवा
रागी एक ऐसा अनाज है, जिसमें अमीनो एसिड, फाइबर काफी अधिक होता है, जो वजन नहीं बढ़ने देता है। रागी खाने से कोलेस्ट्रॉल और शुगर लेवल भी कंट्रोल में रहता है। शरीर में खून की कमी दूर होती है। इसके अलावा, रागी के सेवन से वजन कम होता है। रागी में कैल्शियम भरपूर मात्रा में पाया जाता है जिससे हड्डियां, दांत मजबूत रहते हैं और ऑस्टियोपोरोसिस (हड्डियों से जुड़ी बीमारी) से बचाव मिलता है। कैल्शियम से भरपूर होने के कारण बढ़ते बच्चे और गर्भवती महिलाओं के लिए रागी के फायदे बढ़ जाते हैं।
सामग्री
½ कप रागी का आटा
300 मिली नारियल का दूध
जरूरत के मुताबिक गुड़
¼ कप सूखे मेवे
¼ कप भुने हुए कद्दू और सूरजमुखी के बीज
बनाने का तरीका
- सबसे पहले एक बाउल में रागी का आटा और नारियल का दूध डालकर अच्छी तरह मिला लें।
- अब गैस पर एक सॉस पैन गर्म करें और फिर इसमें मिश्रण डालें।
- फिर इसमें जरूरत के मुताबिक गुड़ डालकर इन्हें तब तक पकाएं जब तक यह गाढ़ा पेस्ट न बन जाए।
- इसके बाद इसे एक बाउल में निकाल लें और टॉपिंग के रूप में सूखे मेवे और बीज डालें।
- अंत में इसे सेट होने दें। स्वादिष्ट रागी का हलवा सर्व करने के लिए तैयार है।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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