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Delhi Water Crisis: दिल्ली में बढ़ा जल संकंट, जाने कैसे करें पानी की बचत
how to manage water storage during Water Crisis : बेंगलुरु के बाद दिल्ली में जल संकट दिन-ब-दिन गहराता जा रहा है। हाल ही में एक चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है जहां पानी के टैंकरों को भरने के लिए लोगों की लंबी-लंबी कतारें लगी हुई हैं। ये नजारा बहुत ही भयावह और सोचने पर मजबूर कर देता है कि आखिर प्रकृति किस कदर हमसे रूठती हुई जा रही है और हम किस तरफ जा रहे हैं?
जल सकंट बहुत ही गंभीर मुद्दा बन चुका है। चिलचिलाती गर्मी में पानी की कमी एक बहुत बड़ी समस्या है। जी हां, जल संकट एक ऐसी समस्या है जो धीरे-धीरे पूरी दुनिया में अपना पैर पसार रही है। आइए जानते है कि पानी के संकंट के बीच कैसे वाटर स्टोरेज को मैनेज करें-

जल संकट की वजहें
- बढ़ती जनसंख्या और शहरीकरण
- अंधाधुंध प्रदूषण और औद्योगिक कचरा
- भूजल का अंधाधुंध दोहन
- यमुना नदी का सूखना और वाटर स्टोरेज का अभाव
सबसे पहले तो ये जानना जरूरी है कि आखिर जल संकट होता क्यों है? इसकी कई सारी वजह हैं एक तो बढ़ती जनसंख्या और दूसरा प्रकृति का बेतरतीब दोहन। बेफिजूल पानी की बर्बादी और वहीं दूसरी तरफ ग्लोबल वार्मिंग और क्लाइमेट चेंज की वजह से बारिश का पैटर्न भी बिगड़ता जा रहा है। नतीजा ये कि सूखे की समस्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में हमें पानी के स्टोरेज के तरीके अपनाने ही होंगे।
रेनवॉटर हार्वेस्टिंग
सबसे पहला और अहम तरीका है रेनवॉटर हार्वेस्टिंग। जब बारिश आती है, तो छत पर बारिश का पानी इकट्ठा कर उसे टैंक या बोरवेल में स्टोर करना चाहिए। बस ध्यान रहे कि पानी को इकट्ठा करने से पहले छत की सफाई कर लें, नहीं तो गंदगी भी पानी में मिल जाएगी।
वॉटर रीसाइक्लिंग
अगला तरीका है घर में वॉटर रीसायकलिंग का इंतजाम करना। मतलब पानी एक बार इस्तेमाल होने के बाद उसे फिर से ट्रीटमेंट करके दूसरे कामों से बागवानी, फ्लशिंग वगैरह में इस्तेमाल करना। इससे पानी की काफी बचत होती है। आजकल तो कई जगह सीवेज का पानी भी साफ करके दोबारा इस्तेमाल किया जा रहा है।
घरेलू स्तर पर पानी बचाएं
घरेलू स्तर पर भी पानी की बचत करके आप पानी की बर्बादी को रोक सकते हैं। जैसे पानी को लीक होने से रोकना, बर्तन धोते हुए पानी को बर्बाद नहीं करना, शॉवर में ज्यादा समय नहीं बिताना। हम रोजमर्रा में पानी की खपत को कम कर पानी को खूब बचा सकत है। इसके अलावा डाइट में पानी वाले फल और सब्जियों का इस्तेमाल ज्यादा करना। क्योंकि इन्हें खाने से पानी की जरूरत भी कम होती है।
जल संरक्षण मुहिम से जुड़े
बहुमंजिला सोसायटी और कॉलोनियों में जल संरक्षण की मुहीम चलाकर लोगों को भी जागरूक करना बहुत जरूरी है। सरकार से भी ये डिमांड करनी होगी कि पानी बचाने वाली नई तकनीक को प्रमोट किया जाए। साथ ही नदियों, तालाबों जैसे जल स्रोतों को दूषित होने से बचाना जरूरी है। इन छोटी-छोटी कोशिशों से हम सब मिलकर जल संकट की समस्या से उबार सकते हैं।
पानी से बचाने के लिए हमारी जिम्मेदारी
- पानी का बुद्धिमानी से और कम-से-कम इस्तेमाल करना
- लीकेज और वेस्टेज को रोकना
- पानी का वेल्यू समझे और उसे प्रदूषित होने से बचाना
- जल संरक्षण के उपाय अपनाएं
ये शहर भी झेल चुके हैं जल संकंट
दिल्ली के अलावा भी कई शहर और गांव जल संकट का कहर झेल चुके हैं, आइए एक नजर डालते हैं आंकड़ों पर-
बेंगलुरु, कर्नाटक
- तेजी से बढ़ते शहरीकरण ने बेंगलुरु को जल संकट में डाला दिया, भूजल का स्तर तेजी से गिरता जा रहा है। पानी की किल्लत की वजह से लोग खूब परेशान है।
चेन्नई, तमिलनाडु
- साल 2019 में चेन्नई शहर भीषण जल संकट की चपेट में आया था। लोगों को पानी के लिए लंबी कतारों में लगना पड़ा कई इलाकों में पानी के टैंकर तक नहीं पहुंच पाते थे।
शिमला, हिमाचल प्रदेश
- साल 2018 में शिमला में भारी जल संकट की समस्या से देखने को मिली थी। टूरिस्ट सीजन में लोग पीने के पानी के लिए परेशान हो गए थे। होटल और रिजॉर्ट्स में पानी का रेशनिंग करनी पड़ी थी।
लातूर, महाराष्ट्र
मराठवाड़ा के लातूर जिले में भीषण सूखा पड़ने की वजह से साल 2016 में ट्रेन के जरिए पानी पहुंचाया गया था। पानी की कमी के वजह से कृषि और पशुधन को भारी नुकसान पहुंचा था।
बुंदेलखंड, उत्तर प्रदेश-मध्य प्रदेश
बुंदेलखंड लगातार सूखे की मार झेल रहा है तालाब, नदियां और कुएं सूख चुके हैं यहां के लोग पलायन करने के लिए मजबूर हैं।



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