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होम गार्डन में नहीं पनप रहे प्लांटस, तो जिप्सम का यूं करें इस्तेमाल
क्या आप अपने होम गार्डन में पौधों के ना पनपने से परेशान है। क्या आप ये नहीं समझ पा रहे कि पौधों की देखभाल में क्या कमी रह गई है। तो बतादें कि ज्यादातर गार्डनर नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटेशियम से भरपूर उर्वरकों का उपयोग करते है, लेकिन कैल्शियम और सल्फर का उपयोग नहीं करते हैं। और इस वजह से मिट्टी में और पौधों में कैल्शियम व सल्फर पोषक तत्वों की कमी होती जाती है और पौधें अच्छी तरह से फल-फूल नहीं पाते। ऐसे में ये जरूरी है कि पौधों को कैल्शियम एवं सल्फर बराबर मात्रा में मिलता रहे। और इन दोनों का मुख्य स्रोत होता है जिप्सम फर्टिलाइजर। जिसका उपयोग सब्जी, फल, फूल, हर्ब, झाड़ियों, पेड़ों आदि की मिट्टी में सुधार करने और कैल्शियम व सल्फर की पूर्ति करने में किया जा सकता हैं। यहां हम आपको बताएंगे कि जिप्सम मिट्टी में किस तरह से काम करता है और गार्डन में पौधों के लिए जिप्सम का प्रयोग किस तरह किया जा सकता है।

जिप्सम पाउडर क्या है
जिप्सम प्राकृतिक रूप से पाया जाने वाला एक खनिज है, जिसका उपयोग भारी, कड़क और चिकनी मिट्टी की संरचना में सुधार करने और मिट्टी में कैल्शियम व सल्फर की पूर्ति करने के लिए किया जाता है। ये पानी में पाए जाने वाले आवश्यक न्यूट्रीयंस को पौधे की जड़ों द्वारा एब्जार्ब करने में मदद करता है। जिप्सम का रासायनिक नाम कैल्शियम सल्फेट डाईहाइड्रेट है, इसमें 23.3 प्रतिशत कैल्शियम और 18.5 प्रतिशत सल्फर होता है। जिप्सम पाउडर मिट्टी में आसानी से घुलने लगता है और ये कैल्शियम एवं सल्फेट पोषक तत्व छोड़ने लगता है। सबसे खास बात ये है कि जिप्सम फर्टिलाइजर मिट्टी के पीएच स्तर में कोई खास बदलाव नहीं करता है। ये दानेदार या पाउडर के फॉर्म में आता है।
जिप्सम डालने के फायदे –
- जिप्सम ड़ालने से पौधों की जड़ों की अच्छी ग्रोथ होती है।
- जिप्सम, मिट्टी में अतिरिक्त मात्रा में मौजूद सोडियम को दूर करता है, जो पौधों के लिए जरूरी नहीं होता है।
- समुद्री इलाके की मिट्टी में सुधार करने के लिए जिप्सम बहुत काम का है, क्योंकि वहां की मिट्टी में नमक अधिक मात्रा में होता है।
- जिप्सम डालने से मिट्टी भुरभुरी बनती है।
- जिप्सम से मिट्टी में एल्युमिनियम की विषाक्तता दूर होती है।
- पौधों में जिप्सम ड़ालने से उसकी मिट्टी की ड्रेनेज क्षमता बढ़ जाती है।
- जिप्सम के इस्तेमाल से मिट्टी के ऊपर पपड़ी नहीं जम पाती है।
- जिप्सम के जरिए पौधों को कैल्शियम और सल्फर न्यूट्रीयंटस मिल जाते हैं।
- मिट्टी में अन्य न्यूट्रीयंटस जैसे नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटैशियम की मात्रा बढ़ जाती है।
- जिप्सम मिट्टी को कड़क और सघन होने से रोकता है, जिससे मिट्टी को पानी और हवा अच्छे से मिल पाता है।
- कैल्शियम की कमी के कारण पौधों में जो लक्षण नजर आते हैं, वे जिप्सम के इस्तेमाल से दूर हो जाते हैं।
जिप्सम का प्रयोग करने का तरीका –
सबसे पहले तो आपको मिट्टी की जांच कर लेनी चाहिए, और इसके लिए आप कुछ गार्डनिंग टूल्स जैसे- खुरपा, ट्रॉवेल आदि की मदद ले सकते हैं या फिर सॉइल फिंगर टेस्ट से भी आप मिट्टी की नमी का पता लगा सकते हैं। ताकि आपको पता चल सके कि उसमें कितनी मात्रा में कैल्शियम और सल्फर की कमी है और फिर उसके अनुसार जिप्सम का प्रयोग करें। जिप्सम को पौधों की मिट्टी में समान रूप से मिलाएं और फिर तुरंत पानी का छिड़काव कर दें। लेकिन, जिप्सम का इस्तेमाल करने से पहले उसके पैकेट पर लिखे दिशा-निर्देशों को अच्छे से जान लें। अच्छी बात ये है कि, जिप्सम जहरीला नहीं होता है। ऐसे में अगर आपके घर में पालतू जानवर हैं, तो भी आप इसे आसानी से अपने पौधों में इस्तेमाल कर सकते हैं।



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