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टॉयलेट के फ्लश में क्यों होता है एक बड़ा और एक छोटा बटन, जानें यहां सही जवाब
Toilet Flush Dual Flushing System : सुबह उठकर हम सभी सबसे पहले बाथरूम जाते हैं और टॉयलेट का इस्तेमाल करते हैं। यह हमारी दिनचर्या में किया जाने वाला सबसे पहला काम है। अमूमन जब भी आप टॉयलेट का इस्तेमाल करने के बाद फ्लश का इस्तेमाल करते होंगे तो आपने वहां पर एक छोटा व दूसरा बटन जरूर देखा होगा। सिर्फ घर के टॉयलेट ही नहीं, बाहर किसी रेस्त्रां या मॉल में भी ड्यूल फ्लश सिस्टम ही होता है।
अमूमन दोनों ही बटन का इस्तेमाल फ्लश करने के लिए किया जाता है। लेकिन आपने कभी सोचा है कि जब दोनों बटन एक ही काम करते हैं तो टॉयलेट में फ्लश करने के लिए दो की जगह एक बटन का इस्तेमाल क्यों नहीं किया जाता। दरअसल, ऐसा करने के पीछे की वजह बेहद खास है। तो चलिए आज इस लेख में हम आपको बता रहे हैं कि फ्लश में दो बटन का इस्तेमाल क्यों किया जाता है-

पानी की होती है बचत
फ्लश में अमूमन एक छोटा व एक बड़ा बटन होता है। दोनो ंही बटन का काम फ्लश करना होता है। ये दोनों बटन एक एक्जिट वॉल्व से जुड़े होते हैं और इसलिए इन्हें प्रेस करने पर पानी निकलता है। हालांकि, दोनों बटन के सही इस्तेमाल से पानी की बड़ी मात्रा में बचत की जा सकती है। अगर आप बड़े बटन को प्रेस करते हैं तो इससे करीबन 6 लीटर पानी निकलता है, जबकि छोटे बटन को दबाने से करीबन 3 से 4.5 लीटर तक पानी निकलता है।
इस तरह किया जाता है इस्तेमाल
इन दोनों बटनों को उनकी जरूरत को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया गया है। मसलन, अगर आप वॉशरूम जाकर टॉयलेट फ्लश करते हैं तो उस दौरान फ्लश बटन का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। वहीं, अगर आपको सॉलिड वेस्ट फ्लश करना है, उस समय बड़े बटन से फ्लश बटन का इस्तेमाल करना चाहिए।
पानी की खपत पर पड़ता है असर
टॉयलेट फ्लश के दो बटन पानी की खपत पर बड़ा असर डालते हैं। जब आप छोटे बटन का इस्तेमाल करते हैं तो इससे पानी की खपत कम होती है। वहीं, बड़ा बटन दबाने से अधिक पानी वेस्ट होता है।
20 हजार लीटर पानी की हो सकती है बचत
टॉयलेट फ्लश के लिए ड्यूल फ्लश सिस्टम बेहद ही कारगर है। अगर सभी लोग इन फ्लश का इस्तेमाल सही तरह से करते हैं, तो इससे पूरे साल में करीब 20 हजार लीटर पानी की बचत की जा सकती है। इस तरह ना केवल वाटर बिल में कटौती होती है, बल्कि भविष्य के लिए भी पानी की बचत की जा सकती है।
अमेरिकन इंडस्ट्रीयल डिजाइनर का था आइडिया
आज के समय में जब पूरी दुनिया पानी की भयंकर कमी से जूझ रही हैं, तब यह ड्यूल फ्लश का आइडिया यकीनन पानी की काफी बचत कर सकता है। टॉयलेट में ड्यूल फ्लश का आइडिया वास्तव में अमेरिका के इंडस्ट्रीयल डिजाइनर विक्टर पापानेक ने दिया था। उन्होंने साल 1976 में विक्टर ने अपनी किताब में इसका जिक्र किया था। शुरुआत में इस आइडिया को छोटे लेवल पर टेस्ट किया गया। जब इसमें सफलता मिली तो फिर इसे दुनियाभर में इस्तेमाल किया जाने लगा।



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